सिंधी समाज के लोग क्यों लौटा रहे हैं गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियाँ?

ये फ़ैसला एक विवाद के बाद हुआ और ये विवाद तेज़ी से फैलता भी चला गया. सिंधी समाज ने कुल मिलाकर विभिन्न मंदिरों और डेरों से गुरु ग्रंथ साहिब की 90 प्रतियाँ सिखों के हवाले कर दी हैं.

सिंधी समाज का कहना है कि सारा विवाद तब शुरू हुआ जब शहर के राजमहल के इलाक़े में कुछ लोग एक घर में पहुँचे जहाँ गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियाँ रखी थीं. कुल दस हथियारबंद लोग थे जो वेशभूषा से निहंग लग रहे थे, उन्होंने वहाँ रखे ग्रंथ साहिब की ‘बेअदबी’ का आरोप लगाया और उनसे मर्यादा का पालन करने के लिए कहा.

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया जिसमे वहाँ मौजूद लोगों और ‘निहंग जैसे दिखने’ वाले लोगों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई. निहंग जैसी वेश भूषा में आए लोगों की पहचान सामने नहीं आई है.

ये विवाद और ज्यादा तब गहराया जब ‘निहंग’ दल के लोगों ने इंदौर के पुलिस डीआईजी एक को ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि सिंधी समाज के सभी मंदिरों और संतों के डेरों में रखे गुरु ग्रंथ साहिब जी को जिस तरह रखा जाना चाहिए था वैसा नहीं है जिससे इस पवित्र ग्रंथ की ‘बेअदबी’ हो रही है और ‘इससे सिखों की भावनाएं आहात हो रही हैं.’

इंदौर के सिंधी समाज के कमल ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “जो लोग राजमहल के डेरे में आए थे उन्होंने वहाँ रखी मूर्तियों पर आपत्ति जताई थी. उनका आरोप था कि जो लोग आए थे वो कह रहे थे कि वो अमृतसर से आए हैं और उन्होंने ये भी कहा कि मंदिरों में मूर्तियाँ हैं और सिख समाज मूर्ति पूजा नहीं करता इसलिए मंदिर में गुरु ग्रंथ साहिब जी का होना उनकी धार्मिक मर्यादा के खिलाफ़ है.”

कमल कहते हैं, “ये लोग कौन थे उन्होंने अपना परिचय नहीं बताया. सिर्फ़ इतना कहा कि वो अमृतसर से आए हैं. उन्होंने कहा कि या तो यहाँ से मूर्तियाँ हटा दो या फिर जो गुरु ग्रंथ साहिब यहाँ विराजमान हैं उन्हें स्थानीय गुरुद्वारे पहुँचा दो.”

वो कहते हैं कि सिंधी समाज के लोग इस घटना से भयभीत हो गए थे और उन्होंने संतों से संपर्क किया. जल्दबाज़ी में सिंधी संतों की बैठक बुलाई गई और समाज ने स्थानीय गुरुद्वारा और स्थानीय गुरु सिंह सभा के पदाधिकारियों के संपर्क किया.

इंदौर की गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह भाटिया ‘रिंकू’ ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “शिकायतें मिल रहीं थीं कि गुरु ग्रंथ साहब सिंधी मंदिरों में और संतों के डेरों में विराजमान ज़रूर हैं. मगर अमृतसर से आए धर्म सत्कार कमेटी के सदस्यों ने जाँच में पाया कि जिन-जिन स्थानों पर गुरु ग्रंथ साहिब जी को स्थापित किया गया है, उन जगहों पर इस पवित्र ग्रंथ की मर्यादा की अनदेखी हो रही है.”

भाटिया कहते हैं, “सिंधी समाज गुरु नानक देव जी महाराज से 500 सालों से जुड़ा हुआ है. ये सही है कि उनकी आस्था सिखों के पवित्र ग्रंथ पर अटूट है लेकिन जो गुरु ग्रंथ साहिब इन मंदिरों और डेरों में मौजूद हैं वो बहुत पुराने, हस्तलिखित हैं और उनके कागज़ भी गलने लगे हैं. जगह-जगह पर मंदिरों और डेरों में देखा गया है कि उनकी लिखाई मिट रही है और गुरु ग्रंथ साहिब के ऊपर से हाथ से आकृतियाँ भी बनी हुईं हैं. ऐसा करना अकाल तख़्त और सत्कार कमेटी के नियमों के खिलाफ़ है”.

भाटिया ये भी कहते हैं कि ऐसा ग्रंथ साहिब की अवमानना करने के लिए नहीं, बल्कि आस्था की वजह से ही किया गया होगा, लेकिन ऐसा करना तय मर्यादा के प्रतिकूल है.

पाकिस्तान के सिंधी मंदिरों में गुरु ग्रंथ साहिब

राजदेव जी प्रकाश बताते हैं कि उनके समाज के लोग पाकिस्तान में भी रहते हैं. पहले सब पकिस्तान में ही थे और वहीं से यहाँ आए हैं. उनका कहना था कि गुरु नानक के जीवनकाल से ही उनके समाज के लोग गुरुनानक देव जी से जुड़े रहे थे. तब से ही वे गुरु नानकदेव और श्री गुरुग्रंथ साहिब को भी मानते आ रहे हैं.

राजदेव कहते हैं कि ख़ुद को निहंग कहने वाले ‘बगैर किसी सूचना’ के अवैध तरीक़े से साईं अनिल महाराज और पूनम दीदी के पार्श्वनाथ कालोनी और राजमहल कालोनी स्थित दरबारों में जबरन घुस गए. इससे तनाव की स्थिति बन गई.

राजदेव बताते हैं कि आज भी पकिस्तान के सिंध में उनके समाज के जितने भी हिंदू मंदिर हैं और संतों के दरबार हैं, सबमें गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना है.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, “हम माहौल बिगाड़ना नहीं चाहते. सिख हमारे भाई हैं. सिंधी समाज से भी एक लड़के के सिख बन्ने की परंपरा आज भी चल रही है. हम आपस में मन-मुटाव नहीं चाहते हैं इसलिए हमने गुरु ग्रंथ साहिब जी की प्रतियाँ गुरु सिंह सभा को सौंप दी हैं.”

राजदेव के साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रभंधक कमेटी के अमृतसर से आए प्रतिनिधियों की बैठक हुई और ये भी तय किया गया कि गुरु ग्रंथ साहिब को सिंधी समाज के संत अपने डेरों में स्थापित करना चाहते हैं तो उन्हें सत्कार और मर्यादा समिति के मानदंडों को ही अपनाना होगा.

वैसे सिख समाज में भी एक बड़ा तबक़ा है जो कुछ इस बात से नाराज़ है कि ख़ुद को ‘निहंग’ बोलने वालों ने सिंधी दरबारों में जाकर ग़लत किया है. उन्होंने इस पर ‘नाराज़गी’ भी ज़ाहिर की है.

भोपाल के गुरु सिंह सभा के मंजीत सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए अकाल तख़्त का हवाला दिया और कहा कि अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने निर्देश जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘किसी को भी अधिकार नहीं है वो किसी के घरों में घुस जाए और और छवियों या प्रतियों को ख़ुद से हटाने का काम करे.’ वो कहते हैं कि इससे श्री अकाल तख़्त साहिब की मर्यादा को ठेस पहुँचती है.

बाद में सिंधी समाज, इंदौर की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी और गुरु सिंह सभा के प्रतिनिधियों ने मिलकर माहौल को शांत करने की कोशिश की और तय किया कि जिन डेरों में गुरु ग्रन्ध साहिब को मर्यादित ढंग से रखने की व्यवस्था सुनिश्चित होगी वहाँ पर उनको धार्मिक रीति रिवाजों के साथ दोबारा स्थापित किया जाएगा.

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