पश्चिम बंगाल के मछुआरों के जाल में फंसी 55 Kg की तेलिया भोला मछली, रातों-रात कमा लिए 13 लाख

क़िस्मत बदलते देर नहीं लगती. कब, कहां, कैसे, किसे, क्या मिल जाए और उसकी क़िस्मत रातों-रात पलट जाए कोई नहीं जानता. मछली पकड़ने का काम बेहद मुश्किल काम है. जाल में कितनी और कौन सी मछली फंसेगी इसी से उसका भाग्य तय होता है.

ज़िला पूर्व मेदनीपुर , पश्चिम बंगाल स्थित दीघा के एक मछुआरे की किस्मत भी रातों-रात पलट गई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण 24 परगना  के शिवाजी कबीर 55 किलोग्राम की एक मछली निलामी के लिए लेकर पहुंचे. निलामी में उन्हें 13 लाख रुपये मिले.

बताया जा रहा है कि इस विशालकाय मछली तेलिया भोला प्रजाति की है. इसे खरीदने के लिए 3 घंटे तक बोली लगाई गई. एक मछली के लिए इतनी देर तक बोली लगाई गई, ये पढ़कर यकिन करना मुश्किल है. लेकिन इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये मछली कितनी लाभदायक है.

बीते रविवार को दीघा मोहना बाज़ार में इस विशालकाय मछली की निलामी हुई. मछली के पेट में अंडे थे इस वजह से पांच किलो कम किया गया और इसका वज़न 50 किलोग्राम माना गया.

Biswa Bangla Sangbad नामक न्यूज़ पोर्टल के अनुसार, 3 घंटे की निलामी के बाद एसएसटी संघ ने 13 लाख रुपये की बोली लगाकर मछली को खरीदा.

मछुआरों ने बताया कि अगर ये नर प्रजाति की मछली होती तो इसकी कीमत और ज़्यादा मिलती. नर तेलिया भोला कि कीमत 20 लाख रुपये तक हो सकती है.

तेलिया भोला मछली से बनती है दवाइयां

तेलिया भोला मछली की अतंर्राष्ट्रीय मार्केट में भारी मांग है. इसकी आंत की बहुत ज़्यादा कीमत मिलती है. इस विशालकाय मछली की आंत से दविाइयां बनती हैं लिहाज़ा जिस भी मछुआरे के जाल में ये फंस जाती है वो लखपति बन जाता है. विदेश की दवाई कंपनियां लाखों रुपये देकर ये मछली खरीदती है.

ये मछली साल में 2-4 बार ही जाल में फंसती है. और जिस किसी की जाल में फंसती है उसकी किस्मत पलट देती है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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