गांव में किसान के बेटे ने पास की यूपीएससी परीक्षा, 642वीं रैंक हासिल कर बनें अधिकारी

किसी भी काम को पूरी इच्छाशक्ति के साथ किया जाए तो उसमें सफलता जरूर मिलती है. आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं वो एक ऐसे इलाके से आते हैं जहां ऐसा माना जाता है डकैती या आपराधिक घटनाएं आम बात हैं. बीहड़ इलाके से देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनें इस शख्स का नाम विकास सेथिया हैं.

जिन्होंने ना सिर्फ यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की बल्कि अच्छी खासी रैंक के साथ अधिकारी बनकर अपने परिवार ही नहीं पूरे गांव का नाम रोशन किया है. विकास की सफलता की कहानी ऐसे युवाओं को जरूर पढ़नी चाहिए जो मुश्किल हालातों से गुजर रहे हैं.

कौन हैं विकास सेथिया

विकास सेथिया मध्य प्रदेश में भिंड के गोरम गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम का नाम अवधेश सेथिया है. जो कि किसान हैं. विकास ऐसे इलाके से ताल्लुक रखते हैं जो बीहड़ इलाके में बसा हुआ है. ऐसे में विकास के पिता ने उनकी शुरुआती पढ़ाई भिंड से ही पूरी करवाई. फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए भिंड शहर में जाकर रहने लगे. यहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उन्होंने अच्छे अंक हासिल किए.

इंटरमीडिएट की तैयारी के दौरान वो भी अन्य युवाओं की तरह मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते थे. तभी उन्हें यूपीएससी परीक्षा के बारे में पता चला. वो इस परीक्षा से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने तैयारी करने का फैसला कर लिया. उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी को लेकर अपने पिता से बातचीत की और दिल्ली जाकर तैयारी करने लगे.

14 घंटों तक करते थे यूपीएससी परीक्षा की तैयारी

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के अनुभवों को साझा करते हुए विकास बताते हैं कि वो इस परीक्षा की तैयारी को लेकर काफी मेहनत करते थे. तैयारी के शुरुआती दिनों में तो उन्होंने 8-10 घंटों तक पढ़ाई की. लेकिन जैसे जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आती जा रही थी वैसे ही वो तैयारी के लिए ज्यादा समय देने लगे.

वो बताते हैं परीक्षा के 2-3 महीने पहले से वो 14 घंटों तक रोजाना पढ़ाई किया करते थे. वहीं, इस परीक्षा की तैयारी उन्होंने रणनीतिक स्तर पर की. जिसमें उन्होंने ज्यादा कठिन सब्जेक्ट्स की तैयारी सबसे पहले की. वहीं, प्री और मेन्स की परीक्षा की तैयारी वो एकसाथ ही की.

यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 642वीं रैंक

विकास सेथिया की कड़ी मेहनत और सटीक रणनीति ने उन्हें बहुत जल्द ही सफलता दिला दी. महज 24 साल की उम्र में उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की. उनकी सफलता से सिर्फ उनका परिवार ही नहीं बल्कि गांव के सारे लोगों के बीच खुशी का माहौल है.

इस रैंक के साथ उन्हें आईपीएस अधिकारी बनने का मौका मिल सकता है. विकास बताते हैं कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी उसे वो पूरी ईमानदारी से निभाएंगे. वहीं, उनकी रुचि महिलाओं से जुडे़ अपराधों को लेकर है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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