पकौड़े वाले ने बनाई ऐसी मशीन, 10 मिनट में बन जाती हैं एक किलो भजिया

पकौड़े वाले ने बनाई ऐसी मशीन, 10 मिनट में बन जाती हैं एक किलो भजिया

कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। अगर किसी को अपने काम के लिए किसी चीज़ की जरूरत है और वह उपलब्ध न हो तो इंसान किसी न किसी तरकीब से वह चीज़ बना ही लेता है। जैसा कि छत्तीसगढ़ के बसंत कुमार चंद्राकर ने किया। राजनांदगांव जिले के गठुला में मुंगोड़ी और भजिया की दुकान चलाने वाले बसंत कुमार ने ‘मुंगोड़ी/भजिया मेकिंग मशीन’ बनाई है। जिसे वह न सिर्फ अपनी दुकान पर इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि और भी कई पकौड़े का काम करने वाले लोगों को बनाकर दे चुके हैं।

बसंत ने बताया, “मैंने 12वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण रोजगार के साधन तलाशने लगा। कई अलग-अलग काम करने के बाद लगभग नौ साल पहले यह मुंगोड़ी का सेंटर शुरू किया। सुबह-शाम बहुत से लोग नाश्ता करने के लिए मेरे स्टॉल पर आते हैं। इससे अच्छा काम चल रहा है। साथ ही, मैं दो-तीन लोगों को रोजगार भी दे पा रहा हूं। लेकिन शुरुआती दिनों में मुझे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था।”

बाजार में नहीं मिली, तो खुद बनाई मशीन

बसंत की सबसे बड़ी परेशानी थी कि वह मुंगोड़ी हाथ से बनाते थे, जिसमें न चाहते हुए भी समय लगता है। लेकिन सुबह और शाम के समय उनकी दुकान पर काफी भीड़ होती है। ऐसे में, अगर थोड़ी भी देर हुई तो ग्राहक वापस चले जाते थे। बसंत कहते हैं कि आए हुए ग्राहक के वापस चले जाने से नुकसान ही हो रहा था। इसलिए उन्होंने सोचा कि मुंगोड़ी या भजिया बनाने के लिए कोई मशीन खरीद लेनी चाहिए। हाथ से एक बार में आप सिर्फ एक ही मुंगोड़ी या भजिया बना सकते हैं। लेकिन मशीन से एक बार में आप कई भजिया/मुंगोड़ी एक साथ कड़ाही में डाल सकते हैं।

बसंत कुमार कहते हैं कि उन्होंने आसपास के बाजार में ढूंढा लेकिन उन्हें अपनी दुकान के लिए मुंगोड़ी बनाने वाली मशीन नहीं मिली। “मुझे छोटी मशीन चाहिए थी जो मेरी दुकान के लिए पर्याप्त हो। लेकिन बाजार में ऐसा कुछ उपलब्ध नहीं था और जो बड़ी मशीनें उपलब्ध थीं वे सभी इंडस्ट्रियल स्तर की थी। जिससे बहुत ज्यादा मात्रा में आप बड़ी बना सकते हैं। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न खुद ही कुछ किया जाए। मुझे इस तरह के काम की थोड़ी-बहुत जानकारी है, तो मैंने फैसला किया कि मैं खुद ही मुंगोड़ी बनाने की मशीन बनाऊंगा।”

कैसे पहुंचे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन?

बसंत हर सुबह जल्दी उठकर इस मशीन पर काम करते थे। कई महीने तक मेहनत करने के बाद, उन्होंने लगभग पांच साल पहले एक मुंगोड़ी मेकिंग मशीन तैयार की। जिसे वह इतने सालों तक मॉडिफाई करते रहे और पिछले साल 2020 में उन्होंने आखिरकार अपना बेस्ट मॉडल तैयार कर ही लिया। उन्होंने बताया, “इस मशीन में दो हिस्से हैं। सबसे पहले आप नीचे वाले हिस्से में लगे मग में बैटर भर सकते हैं। फिर इसके ऊपर वाले हिस्से से इसे दबाते हैं और नीचे बने छेद में से मुंगोड़ियां कड़ाही में बनती रहती हैं। इस मशीन से आप 10 मिनट में आराम से एक किलो भजिया तैयार कर सकते हैं।”

उन्होंने सबसे पहले जो मॉडल तैयार किया था, उसे बनाने में लगभग 700 रुपये की लागत आई थी। साल 2018 में उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के जरिए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल, लखनऊ में अपनी इस मशीन को प्रदर्शित करने का मौका मिला। उन्होंने बताया, “मैंने एक बार इंटरनेट पर सर्च किया कि क्या कोई ऐसी संस्था है, जो इस तरह के छोटे इनोवेशन को बढ़ावा देती है। तब मुझे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के बारे में पता चला। मैंने अपने और अपनी मशीन के बारे में विवरण लिखकर उन्हें पोस्ट किया। जिसके बाद उनकी तरफ से एक टीम ने आकर मशीन की जांच की और तब मुझे लखनऊ जाने का मौका मिला।”

अब तक बेच चुके हैं लगभग 100 मशीनें

बसंत कुमार बताते हैं कि नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की तरफ से उन्हें 25 हजार रुपये की अनुदान राशि मिली थी। जिसकी मदद से वह फेस्टिवल में प्रदर्शित करने के लिए मशीन बना सके और साथ ही, वह एक अच्छी वेल्डिंग मशीन भी खरीद पाए। इस वेल्डिंग मशीन की मदद से उनके लिए अपनी पुरानी मुंगोड़ी मेकिंग मशीन को मॉडिफाई करना काफी आसान हो गया। साथ ही, वह और भी कई आइडियाज़ पर काम कर रहे हैं। जैसे कि उन्होंने सड़क से कूड़ा-कचरा साफ़ करने के लिए भी एक क्लीनिंग मशीन बनाई है।

हालांकि, उनकी इस मशीन को खास पहचान नहीं मिली है। लेकिन उनकी मुंगोड़ी मेकिंग मशीन अब तक लगभग 100 दूसरे छोटे-बड़े शॉप या स्टॉल चलाने वालों तक पहुंच चुकी है। उनकी दुकान पर बहुत से लोग आते हैं और ग्राहकों के जरिए इलाके में बहुत से लोगों को उनकी इस मशीन के बारे में पता चला है। इसलिए दूसरे लोग, जो कहीं पर पकौड़े या मुंगोड़ी बनाने का काम करते हैं, उनके पास आकर मशीन का ऑर्डर देने लगे। उन्होंने पहला जो मॉडल बनाया था, उसकी उन्होंने लगभग 80 मशीनें बेचीं और अब नए मॉडल की लगभग 20 मशीनें बेच चुके हैं।

लोगों की ज़रूरत के हिसाब से बनाते हैं मशीन

नागपुर में अपनी मुंगोड़ी और भजिया की दुकान चलाने वाले मनीष साहू बताते हैं कि उन्होंने चार साल पहले यह मशीन बसंत से खरीदी थी। “बसंत जी के गांव के पास ही हमारे एक रिश्तेदार रहते हैं। उन्होंने मुझे इस मशीन का बारे में बताया और मैंने अपनी दुकान के लिए मशीन बनवाई। पहले हाथ से एक कड़ाही मुंगोड़ी बनाने में 15-20 मिनट का समय लगता था लेकिन अब मशीन से यह काम पांच-दस मिनट में हो जाता है। इससे हमारा काम भी बढ़ा है। पहले दिन में 10 किलो मुंगोड़ी ही बनकर बिक पाता था पर अब 40 किलो मुंगोड़ी हम बेचते हैं,” उन्होंने कहा।

बसंत कुमार कहते हैं कि वह लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से मुंगोड़ी मेकिंग मशीन बनाकर देते हैं। अगर आप उनसे यह मशीन खरीदना चाहते हैं तो उन्हें 7000816817 पर कॉल कर सकते हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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