चीन दे गया दगा, अब अमेरिका बना पाकिस्तान का सगा; बिजली संकट में करेगा मदद

पाकिस्तान की कंगाली और चीन की बदहाली के मौके को मौकापरस्त अमेरिका ने हाथों-हाथ ले लिया है। कोरोना के साथ आर्थिक बदहाली झेल रहा चीन अपने कंगाल दोस्त पाकिस्तान की मदद नहीं कर पा रहा तो इधर अमेरिका ने पाक से नजदीकी बढ़ाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान को अपना मुरीद बनाने के लिए अमेरिका के पास इससे बेहतर मौका शायद ही कोई मिले। इस बात को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी समझते हैं। इसीलिए पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली दूर करने में मदद का ऐलान करने के बाद अब अमेरिका ने बिजली संकट से उबारने के लिए भी पीएम शहबाज शरीफ को मदद का भरोसा दिया है।

अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उनका देश पाकिस्तान के बिजली संकट को खत्म करने में मदद देने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में सोमवार को राष्ट्रीय ग्रिड में खराबी के कारण बड़े पैमाने पर बत्ती गुल रही, जिससे राजधानी इस्लामाबाद और वित्तीय हब कराची समेत मुल्क के बड़े हिस्से में लाखों लोग अंधेरे में रहे। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रिड में सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजकर 34 मिनट पर खराबी आ गई, जिससे बत्ती गुल हो गई। लाहौर और कराची जैसे पाकिस्तानी महानगरों में 12 घंटे से अधिक वक्त से अंधेरा छाया हुआ है। करीब चार महीने में यह दूसरी ऐसी घटना है।

अमेरिका ने कहा चुनौतियों में पाकिस्तान के काम आता है अमेरिका

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को अपने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘बेशक, हमने देखा है कि पाकिस्तान में क्या हुआ है। बिजली गुल रहने से प्रभावित हुए सभी लोगों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। जाहिर तौर पर अमेरिका ने कई चुनौतियों में हमारे पाकिस्तानी साझेदारों की मदद की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले में भी सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन मुझे अभी तक कोई खास अनुरोध मिलने की जानकारी नहीं है।

पाकिस्तान लगातार कम होते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे खराब वित्तीय संकट का सामना करने वाले देशों में से एक बन गया है। देश के बिजली क्षेत्र की दयनीय स्थिति इसकी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था का परिणाम है। अमेरिका पाकिस्तान को मदद के बहाने अपना मुरीद बनाना चाहता है। ताकि वह अपने हित में पाकिस्तान से उसके दोस्त चीन की जासूसी करा सके। साथ ही जरूरत पड़ने पर पाकिस्तानी आतंक के जरिये भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना सके।

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