दादाजी का सपना पूरा करने के लिए छोड़ी अच्छी खासी नौकरी, 4वीं रैंक हासिल कर बनें IAS अधिकारी

यूपीएससी परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी परीक्षा देते हैं. लेकिन उन अभ्यर्थियों में कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी होते हैं जो अलग अलग क्षेत्रों से आकर इस परीक्षा में अपनी काबियलियत का आकलन करते हैं और सफलता भी हासिल करते है. आज हम आपको आईएएस अधिकारी श्रेयांस कुमट के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. लेकिन अपने टैलेंट और मेहनत की बदौलत उन्होंने आईआईटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया.

कमाल की बात ये है कि यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने पहले ही प्रयास में ना सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि अच्छी खासी रैंक के साथ टॉपर भी बनें. अपनी इस सफलता के साथ उन्होंने अपने परिवार का नाम भी रोशन कर दिया है. उनकी कहानी ऐसे युवाओं को प्रेरणा दे सकती है जो दूसरे करियर ऑप्शन्स को चुनने में भयभीत रहते हैं.

कौन हैं आईएएस श्रेयांस कुमट

राजस्थान के अजमेर शहर से ताल्लुक रखने वाले श्रेयांस एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई अजमेर से हुई. वो बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे. एक साक्षात्कार में उनके पिता ने बताया था कि जब श्रेयांस ने पढ़ाई की शुरुआत की ही थी तभी उनके अध्यापकों ने बच्चे की कुशाग्रता को देखते हुए उन्हें एक क्लास स्किप करने की परमीशन दे दी थी. इसके बाद उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में भी अच्छे अंक हासिल किए.

बेसिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की फिर एक अच्छी खासी कंपनी में 2 सालों तक नौकरी की. श्रेयांस बताते हैं कि वो यूपीएससी की तैयारी नहीं करना चाहते थे. लेकिन अपने दादा जी की इच्छा थी कि उनका नाती आईएएस अधिकारी बनकर परिवार का नाम रोशन करें. अपने दादा की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.

बिना कोचिंग हासिल की यूपीएससी परीक्षा में सफलता

श्रेयांस कुमट बताते हैं कि यूपीएससी परीक्षा में आने के लिए उन्होंने काफी सोच समझकर फैसला लिया था. अपनी तैयारी के बारे वो बताते हैं कि उन्होंने किसी भी तरह से कोचिंग की मदद नहीं ली थी. उन्होंने अपनी सारी पढ़ाई इंटरनेट, जरूरी किताबों और नोट्स की मदद से पूरी की. तैयारी से पहले उन्होंने सिलेबस निकालकर यूपीएससी पैटर्न को अच्छी तरह समझा.

फिर एनसीआरटी की किताबों का अच्छी तरह से अध्ययन किया और जनरल नॉलेज और खुद को अपडेट रखने के लिए रोजाना न्यूजपेपर पढ़ना शुरू कर दिया. जब परीक्षाएं नजदीक आ गई तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर रोजाना 8-10 घंटों की पढ़ाई शुरू कर दी. पढ़ाई के साथ उन्होंने अपने रिवीजन पर भी काफी ध्यान दिया. मॉक टेस्ट भी काफी दिए जिससे उनकी तैयारी पहले ही प्रयास में बहुत अच्छी हो चुकी थी.

4वीं रैंक हासिल कर बनें आईएएस अधिकारी

बचपन से ही पढ़ाई में रुचि होने के कारण श्रेयांस ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में साल 2018 में 4वीं रैंक हासिल की. इस रैंक के साथ उन्होंने आईएएस बनने का मौका मिला.

उनकी इस सफलता से उनके दादा जी समेत परिवार के अन्य लोग भी काफी खुश हैं. उनके दादा जी कहते हैं कि बेटे ने आईएएस अधिकारी बनकर ना सिर्फ हमारा नाम रोशन किया है बल्कि पूरे परिवार का नाम भी रोशन किया है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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