गरीबी में जूते के दुकान पर काम कर पढ़ाई किए, फिर अपनी मेहनत से बदली तकदीर और बन गए IAS अधिकारी

सुख और दुख दोनों जीवन का ही हिस्सा है लेकिन कुछ ऐसे लोग होते है, जो विपरीत परिस्थितियों से घबराकर अपना लक्ष्य तक भूल जाते है, वहीं कुछ ऐसे भी होते है जो मुश्किल हालातों में भी अपनी मंजिल पाने के लिए कोई न कोई तरकीब ढूंढ ही लेते है। आज हम एक ऐसे ही शख्स की बात करेंगे, जिन्होंने जूते-चप्पल बेचते हुए, IAS बनने के सपने को संजोए और आज एक काबिल आईएएस अफसर बन देश मे तथा अपने समाज मे एक मिसाल कायम किया है।

कौन है वह शख्स?

हम बात कर रहे है, राजस्थान राज्य के जयपुर के रहने वाले आईएएस शुभम गुप्ता की, जिनकी संघर्ष की कहानी आज हज़ारों युवाओ के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
बता दें कि, शुभम ने अपने पिता के जुते-चप्पल के दुकान को संभालते हुए UPSC का एग्जाम क्रैक किया और IAS बन देश मे अपनी एक अलग पहचान स्थापित की।

आंखों में खुशी के आँसू लेकर पिता ने बताई बेटे की कामयाबी की कहानी

शुभम के पिता अनिल गुप्ता  ने बेटे के 28वें जन्म दिन पर एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान अपने बेटे की संघर्ष भरी कहानी सुनाई। जब वह अपने बेटे के बारे में बात कर रहे थे तो उनके आंखों में आँसू भरे हुए थे। उनके पिता ने बताया कि, जब वह जयपुर में ठेकेदारी का काम किया करते थे उसी वर्ष 1993 में शुभम का जन्म हुआ। जब शुभम 7वीं वर्ग में थे उस समय उनके पिता (अनिल गुप्ता) की कमाई अच्छी नही हो पा रही थी, जिसके कारण वो अपने पूरे परिवार को लेकर महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहाणू रोड चले गए और वहां जाकर एक जूते-चप्पल की दुकान खोली।

फिर उन्होंने अपने बेटे शुभम का नामांकन गुजरात के वापी स्थित श्री नारायण गुरुकुल में करा दिया। कुछ समय बाद फिर उन्होंने वापी में भी एक जूते-चप्पल की दुकान खोल दी। बता दें कि, शुभम स्कूल से आने के बाद दुकान चलाया करते थे। उनके पिता (अनिल गुप्ता) के आंखों में आँसू भर गए जब उन्होंने यह बताया कि, उन्होंने कभी सोचा भी नही था कि जूता-चप्पल बेचकर भी उनका बेटा आईएएस अफसर बन सकता है। आगे उन्होंने बताया कि, दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद शुभम दिल्ली चले गए और वहां होस्टल में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से वर्ष 2012-2015 में अर्थशास्त्र से बीए और एमए किया। उसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। आपको बता दें कि, शुभम ने अपने चौथे प्रयास में आईएएस अफसर बनने के सपने को साकार किया।

 

चौथे प्रयास मे मिली सफलता

आपको बता दें कि, शुभम ने दिल्ली में रहने के दौरान की UPSC की तैयारी जारी कर दी। लेकिन उनको पहले प्रयास में सफलता नही मिली। पहले प्रयास में तो इन्होंने UPSC का प्री भी पास नही किया लेकिन दूसरे प्रयास में UPSC में इनको 366वीं रैंक मिली। रैंक के अनुसार इनको IAS बनने के बजाय IAAS बनने का मौका मिला। अपनी टैनिंग के दौरान इन्होंने फिर से UPSC की परीक्षा दी लेकिन इसमें भी इनको सफलता नही मिली।

भारतीय अंकेक्षण और लेख सेवा में काम करने के दौरान इन्होंने 2018 में फिर से UPSC की परीक्षा दी और इनमे उन्होंने छठवां स्थान प्राप्त किया और UPSC टॉपर बन गए।

ट्रेंनिंग के दौरान मिली एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार के रूप में पोस्टिंग

शुभम ने वर्ष 2018 में UPSC का एग्जाम में 6वें स्थान प्राप्त किया और ट्रेंनिंग में दौरान उन्हें एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार के रूप में पोस्टिंग मिली।

ट्रेंनिग के बाद मिली नागपुर में पहली पोस्टिंग

आपको बता दें कि, शुभम ने जब अपनी ट्रेंनिंग पूरी की तो उनकी पहली पोस्टिंग नागपुर के एटापल्ली में एडीएम के पद पर तैनात हुई।

आज भी परिवार रहता है, रेंट के मकान में

शुभम के पिता वर्ष 2011 में अपने परिवार समेत महाराष्ट्र से जयपुर लौट आये और यहां आकर अपने बड़े भाई (कृष्ण गुप्ता) के साथ बिल्डर के रूप में कार्य कर रहे है। आपको बता दें कि, शुभम की मां एक गृहणी है तथा इनकी बहन भाग्यश्री गुप्ता एक सीए है। और शुभम ने नवंबर 2020 में रेवाड़ी के ईशा के साथ शादी कर ली। बता दें कि, आज भी इनका पूरा परिवार रेंट के मकान में रहता है।

आज शुभम उन सभी युवाओ के लिए प्रेरणा बने है, जो UPSC की तैयारी कर रहे है।

आईएएस अफसर शुभम गुप्ता को IAS बनने की शुभकामनाएं देता है तथा उनके जज्बे को सलाम करता है। साथ ही यह उम्मीद करता है कि, वह ऐसे ही मेहनत कर आगे बढ़े और देश का नाम रोशन करें।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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