मां ने गहने बेचे, रंगाई-पुताई का काम किया, फिर पुरानी जींस के उपयोग से खड़ा किया 1.5Cr का बिजनेस

आज के दौर में जितनी महंगाई है, पैसा कमाना भी उतना ही आसान है. नहीं यकीन आता तो अपने आसपास नजर घुमा कर देखिए. हमारे बाप-दादा के जमाने में किसी ने ये सोचा होता कि बाजार से लोगों का समान लाकर उसके बदले उनसे पैसे ले लेते हैं

तो लोग उस पर हंसते. लेकिन आज हम धड़ल्ले से पैसे दे कर ऑनलाइन समान मंगाते हैं. ऐसे ही बहुत से उदाहरण हैं हमारे पास जिनसे ये सिद्ध होता है कि आज के समय में पैसा चारों तरफ बिखरा पड़ा है. बस चाहिए तो सिर्फ उसे उठाने की सोच.

अब जैसे कि बिहार के इस युवक को ही देख लीजिए. हम सब अपनी पुरानी जींस या तो किसी जरूरतमंद को दे देते हैं या फिर वो समय के साथ कचरे में चली जाती है,लेकिन इस युवा ने उन्हीं पुरानी जींस से अपना बिजनेस खड़ा कर लिया है. सबसे खास बात है कि इनका स्टार्टअप पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना चल रहा है.

पुरानी जींस से बनाया 1.5 करोड़ का स्टार्टअप

 

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प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना वेस्ट के दम पर पैसा कमाने वाला ये कमाल का दिमाग बिहार के मुंगेर जिले के सिद्धांत कुमार ने पाया है. सिद्धांत आईआईटी से पास आउट हैं और अब दिल्ली में रहते हैं.

सिद्धांत कुमार ने डेनिम डेकोर के नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया. इस स्टार्टअप के माध्यम से वह पुराने जींस से डोकोरेशन की नई चीजें सजाते हैं. सिद्धांत पुरानी जींस का रियूज़ कर के 400 से अधिक तरह के सामान बना चुके हैं. कमाल की बात ये है कि उनके इस स्टार्टअप का सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ के ऊपर है.

संघर्ष कर यहां तक पहुंचे

यहां तक पहुंचना बिहार के सिद्धांत के लिए आसान नहीं था लेकिन उन्होंने रिस्क लिए, मेहनत की और आज एक सफल मुकाम तक पहुंच गए. दैनिक भास्कर को दिए अपने इंटरव्यू में सिद्धांत ने बताया कि वह 2004 से 2006 तक पटना में रहकर फाइन आर्ट्स एंड डिजाइन की पढ़ाई कर रहे थे.

 

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इस दौरान उनके कुछ दोस्तों ने उन्हें सलाह दी कि पटना के इस कॉलेज से प्लेसमेंट मिलना संभव नहीं. ऐसे में उन्होंने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एडमिशन ले लिया.

उनके इस फैसले का विरोध उनके पिता ने ही किया. वह घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से सिद्धांत को दिल्ली नहीं भेजना चाहते थे. सिद्धांत अपने फैसले पर अड़े रहे.

अंत में उनकी मां ने अपने गहने बेचकर उन्हें पढ़ने के लिए दिल्ली भेजा. दिल्ली आने के बाद सिद्धांत का संघर्ष और बढ़ गया. उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए घरों-बंगलों में रंगाई-पोताई का काम किया. इसके साथ ही रात के समय बार में भी काम करते रहे.

पहला स्टार्टअप बंद करना पड़ा

 

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2010 में फाइन आर्ट की पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से मास्टर ऑफ डिजाइन किया. इसके बाद उन्हें बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी मिल गई. हालांकि कुछ ही महीने बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आ गए.

2013 में सिद्धांत ने बच्चों के लिए एजुकेशनल गेम्स डिजाइन करने का स्टार्टअप शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने अपने इस स्टार्टअप को महीने के 8 से 10 लाख के टर्नओवर तक पहुंचा दिया था लेकिन उन्हें कुछ दिक्कतों के कारण इसे बंद करना पड़ा.

इसके बाद नए स्टार्टअप का आइडिया उन्हें अपने घर से ही आया. उन्होंने अपने घर की प्लेन दीवारों को पुरानी जींस से डेकोरेट किया. उनका ये आइडिया लोगों को पसंद आया और उन्हें कमरा डेकोरेट करने पर तारीफें मिलने लगीं. यहीं से सिद्धांत को पुरानी जींस से अन्य चीजें सजाने की प्रेरणा मिली.

डेनिम डेकोर ने दी पहचान

सबसे पहले सिद्धांत ने अपने जान पहचान वालों से पुरानी जींस मांगी और पुरानी एंटीक चीजें जैसे लालटेन, केतली आदि खरीद लाए. उन्होंने पुराने जींस से 50-60 डेकोरेटिव्स तैयार किये और दिल्ली के सबसे पॉश सिलेक्ट सिटी मॉल में इनका स्टॉल लगाया. मॉल में मिले रिस्पॉन्स के आधार पर सिद्धांत ने ये तय किया कि इस काम को वो अब एक स्टार्टअप के तौर पर शुरू करेंगे.

डेनिम डेकोर द्वारा बनाई चीज़ें अपने देश में ही नहीं बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी खूब पसंद की जाती हैं. दिल्ली में भी कई डेनिम स्टोर अपने यहां के इंटीरियर डेकोर के लिए सिद्धांत को चुनते हैं.

सिद्धांत ने जिस स्टार्टअप को 50 से 60 हजार में शुरू किया गया था आज उसी का टर्नओवर डेढ़ करोड़ हो चुका है. कोरोना काल में सिद्धांत ने अपनी सोच के दम पर 25 नए कारीगरों के घर पर मशीन लगवाकर उन्हें काम दिया.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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