कहानी कार Seat Belt की, आज बचती है करोड़ों जानें, कभी गलती से हुआ था इसका आविष्कार, जानिए इतिहास

अगर आप कार से सफर कर रहे हैं तो किसी भी तरह की दुर्घटना से बचने के सीट बेल्ट लगाना बेहद जरूरी माना जाता है. सीट बेल्ट न लगाना यातायात नियमों के खिलाफ माना जाता है.

ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि सीट बेल्ट बनाने का आइडिया किसे और कैसे आया होगा, पहला सीट बेल्ट कब डिजाइन हुआ होगा? आइए जानते हैं सीट बेल्ट के बारे में ऐसी ही कुछ खास बातें.

आज भले ही सुरक्षा को देखते हुए कार में सफर करते समय सीट बेल्ट लगाना बहुत जरूरी माना जाता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सीट बेल्ट का पहला डिजाइन कार के लिए नहीं तैयार हुआ था.

1800 में डिजाइन हुई पहली सीट बेल्ट

सर जॉर्ज कैली को सीट बेल्ट के अविष्कार का श्रेय दिया जाता है. 1800 के आस-पास उन्होंने इस सीट बेल्ट का आविष्कार किसी कार के लिए नहीं बल्कि अपने ग्लाइडर के लिए डिजाइन किया था.

विमानन क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण अविष्कारकों में गिने जाने वाले गिना जाने वाले सर जॉर्ज कैली द्वारा तैयार किया गया डिजाइन कारों के मामले में उपयोगी नहीं था. कारों के लिए पहला सीट बेल्ट तैयार करने का श्रेय गया अमेरिकी अविष्कारक एडवर्ड क्लैगहॉर्न को. 1885 में उनके द्वारा डिजाइन किये गए सीट बेल्ट को न्यूयॉर्क की टैक्सियों में इस्तेमाल किया जाने लगा.

समय के साथ किये गए सुधार

सीटबेल्टों के बाजार में आने के बाद इनकी लोकप्रियता तो धीरे-धीरे बढ़ रही थी लेकिन इसके शुरुआती डिजाइन में ज्यादा सेफ्टी नहीं थी. इसके बाद 1946 में डॉ सी हंटर शेलडन ने रीट्रैक्टेबल सीट बेल्ट तैयार की.

वो डॉ सी हंटर शेलडन ही थे जिन्हें एयरबैग और रेसेस्ड स्टीयरिंग व्हील जैसे सुरक्षा मानकों को डिजाइन करने का श्रेय दिया जाता है. डॉ शेलडन के डिजाइन के बाद सीट बेल्टों की लोकप्रियता बढ़ी और 1950 के आस-पास लगभग सभी रेसिंग कारों में इसका इस्तेमाल होने लगा. कई जगहों पर रेसिंग कारों के लिए सीट बेल्ट को अनिवार्य बना दिया गया.

लोग नहीं खरीदते थे सीट बेल्ट

पहले आपको अपनी कारों के लिए अलग से सीट बेल्ट लेनी पड़ती थी लेकिन 1950 के दशक में बाजार में पहली बार ऐसी कारें आईं जिनमें पहले से ही कार कंपनियों अपनी ओर से सीट बेल्ट लगाकर देने लगीं. नैश और फोर्ड जैसी कंपनियों ने सीट बेल्टों को कार का अहम हिस्सा बनाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया.

हालांकि ये दोनों कंपनियां ऑप्शनल सीट बेल्ट के बदले ग्राहकों सेअतिरिक्त पैसे ले रही थीं. ऐसे में लोग पैसे बचाने के लिए बिना सीट बेल्ट वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे थे. फोर्ड के अनुसार उन दिनों 100 में से 2 लोग ही अपनी कारों में सीट बेल्ट लगाने का ऑप्शन चुन रहे थे.

स्वीडन की कार कंपनी साब ने पहली बार अपनी कारों के लिए सीट बेल्ट को स्टैंडर्ड फीचर बनाया.

बता दें कि आज की कारों में इस्तेमाल होने वाली सीट बेल्टों को 3-प्वाइंट सीट बेल्ट कहा जाता है. पहले डिजाइन की गई सीट बेल्ट केवल कमर को सुरक्षा देती थी लेकिन आधुनिक सीट बेल्ट के डिजाइन पूरे शरीर की सेफ्टी के लिए तैयार किए जाते हैं.

साल 1935 में अमेरिका के रोजर डब्ल्यू ग्रिसवोल्ड और ह्यूग डीहैवेन ने आधुनिक सीट बेल्ट का डिजाइन तैयार किया था. इसके बाद स्वीडन के नील्स बोहलिन ने इसमें सुधार किये.

नील्स बोहलिन को वॉल्वो ने अपना चीफ सेफ्टी इंजीनियर बना लिया था. बताया जाता है कि वॉल्वो के तत्कालीन सीईओ के एक रिश्तेदार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसके बाद वॉल्वो ने अपनी कारों में सीट बेल्ट को अनिवार्य बना दिया.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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