बिना हाँथ की महिला भीख मांगती थी, अब उनके पैरों से बनी पेंटिंग हजारों रुपए में बिक रही हैं

हमने अपने जीवन में ऐसे बहुत से लोगो को देखा है, जिनको भगवान हर सुख सुविधा देता है। लेकिन उसके बावजूद भी वह लोग अपनी किस्‍मत को कोसते रहते है और बिना प्रयास किये थक कर हार कर बैठ जाते है और अपने जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर पाते है।

वही कुछ लोग ऐसे भी होते है, जिनके जीवन में बहुत से कठिन हालात होते है, लेकिन फिर भी वह उनसे डर कर पीछे नहीं हटते और मेहनत करके जीवन में सफल हो जाते है।

आज ऐसी ही मोटिवेशनल स्‍टोरी हम आपके पास लेकर आये है, जिसे सुन कर आपके मन में भी एक उम्‍मीद जाग जायेगी।

वह महिला जोकि बचपन से ही दिव्‍यांग थी। दोनों हाथ ना होने के बावजूद भी उसने ऐसा कार्य किया जिससे उसे एक अलग पहचान मिल गई। कैसे बदल गई उस महिला कि जिंदगी आइये जानते है इस बारे में।

ऋषिकेश की अंजना

आज हम जिसकी बात कर रहे है, ऋषिकेश  उत्‍तराखंड में रहने वाली महिला की जिनका नाम अंजना माली है। अंजना माली एक गरीब परिवार में जन्‍मी थी। भगवान के उन्‍हें दोनों हाथ नहीं दिये थे। वह बचपन से ही अपंग थी।

अंजना ने इसे भगवान की मर्जी समझ कर अपने इस रूप को ऐसे ही एक्‍सेप्‍ट कर लिया था।

अंजना के हाथ के अलावा उनके शरीर के अन्‍य अंग भी ज्‍यादा अच्‍छे से काम नहीं करते है। जिसे देख कर अंजना को लगा कि उनके पास भीख मांगने के अलावा और कोई चारा नहीं है

इसलिए ही वह किसी और काम पर ध्‍यान ना देते हुए, भीख मांगने का काम करने लगी। उन्‍होने यह कार्य इसलिए चुना क्‍योंकि वह चा‍हती थी कि वह अपने घर में मदद कर सके।

पेंटिंग करना था काफी पसंद

भगवान की मर्जी को समझ कर अंजना ने भीख मांगने का काम भी शुरू कर दिया। जब वह भीख मांगती थी, तो लोग एक या दो रूपए उन्‍हें दे दिया करते थे।

जिससे वह अपने घर में मदद किया करती थी। लेकिन अंजना का एक अलग शौक भी था। उन्‍हें पेंटिग  करना काफी अच्‍छा लगता था।

इसी शौक के कारण वह इन भीख के पैसे से कुछ पैसे बचा कर पेंटिंग के लिए आवश्‍यक सभी जरूरी सामान खरीद लिया करती थी। आप सोच रहे होंगे कि हाथ होने के बाद भी अंजना किस तरह पेंटिंग करती होंगी।

आपको बता दे कि अंजना अपने पैरों से बहुत ही सुन्‍दर और आकर्षक पेंटिग बनाती है। अंजना इतनी शानदार और विभिन्‍न तरह की खूबसूरत पेटिंग बनाती है, कि उनकी चित्रकारी देख कर लोगों के होश उड़ जाते है। लोग अंजना की चित्रकारी को काफी पसंद करते है।

विदेशी महिला ने की अंजना की मदद

अंजना एक दिन उत्‍तराखंड में ऋषिकेश के घाट किनारे बैठ कर चारकोल के टुकडे से कुछ लिख रही थी। उसी समय ऋषिकेश में घूमने आई एक विदेशी स्‍टेफनी की नजर अंजना पर पड़ी।

अंजना को देख कर वह समझ गई कि अंजना पैरों से चारकोल की सहायता से भगवान राम जी का नाम लिखना चाहती है।

जब अंजना भगवान राम का नाम लिख रख रही थी। तब स्‍टीफनी वहा खड़ी होकर अंजना को निहार रही थी। अंजना को देखते देखते स्‍टीफनी समझ गई कि अंजना के अंदर एक पेंटर छिपा बैठा है।

इसके बाद वह विदेशी महिला स्‍टीफनी अंजना की कला को पहचान कर उसे पैरो की मदद से पेंटिंग करना सिखाने लगी। ताकि वह सम्‍मान के साथ अपनी जिंदगी जी सके।

स्‍टीफनी की सहायता से अंजना बहुत ही जल्‍दी खूबसूरत पेंटिंग बनाना सीख गई और उसने पेंटिग बनाना स्‍टार्ट कर दी।

कई तरह की पेंटिंग बनाती है अंजना

जैसे जैसे समय बीतता गया और भी अंजना की कला में निखार आता गया और वह कई तरह की पेंट्रिग बनाने लगी। वह अपनी पेंटिग में देवी देवता, पशु पक्षी और नेचर के खूबसूरत नजारें को दर्शाती हे।

अंजना की पेंटिंग लोगों को इतनी पसंद आने लगी कि ऋषिकेश में लोग उनकी पेटिंग खरीदने घाट पर आने लगे। और इससे अंजना को काफी फायदा भी होने लगा। अपनी कमाई से अंजना बहुत ही अच्‍छे से घर का खर्चा चलाने लगी है।

फरिश्‍ते की तरह की स्‍टीफनी ने मदद

अंजना कि जिंदगी में स्‍टीफनी भगवान के फरिश्‍ते की तरह आई लोग अंजना को पहले ताने मारा करते थे और उनका मजाक भी बनाते थे। लेकिन स्‍टीफनी ने अंजना के अंदर की कला को पहचाना और उसे जीवन में आगे बढ़ाने के लिए मदद की।

स्‍टीफनी ने अंजना की कला को निखारने के लिए हर संभव प्रयास किया। प्रारंभ में तो अंजना के लिए यह सब करना बहुत ही मुश्‍किल था। क्‍योंकि अंजना के हाथ ना होने के साथ साथ उनका पूरा शरीर भी ज्‍यादा उनका साथ नहीं दे पा रहा था।

अंजना की कमर उन्‍हें बहुत ही परेशान करती थी। जिस वजह से वह झुककर भी चलने लगी थी। लेकिन स्‍टीफनी के मोटिवेशन की वजह से अंजना यह कार्य कर पाई और वह इसमें सफल भी हो गई।

उन्‍हें इससे एक अलग पहचान मिली और लोग उनकी पेटिंग को इतना ज्‍यादा पसंद करने लगे, की लोग उन्‍हें उनकी पेटिंग के लिए हजारों रूपये तक देने लगे।

हालातो से ना हारकर अंजना ने जो अपनी मेहनत से एक अलग पहचान हासिल की वह बहुत ही मोटिवेशनल है। भले ही भगवान ने उन्‍हें कमी के साथ पैदा किया हो। लेकिन उन्‍होंने अपनी कमी को वरदान में बदल दिया। अंजना की सफलता हमारे लिए एक सीख भी है।

वह लोग जो हमेशा अपनी किस्‍मत का रोना रोते रहते है, उन्‍हें अंजना से कुछ सीखना चाहिए। अंजना का जीवन और भी अच्‍छा हो और वह आगे भी इसी तरह सफलता प्राप्‍त करे बस यही हमारी इच्‍छा है। हम उनके उज्‍जवल भविष्‍य की कामना करते है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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