देश को कब और कैसी मिली अपनी पहली मिक्सी? सालों रसोई घरों पर राज करने वाले Sumeet Mixer की कहानी

देश को कब और कैसी मिली अपनी पहली मिक्सी? सालों रसोई घरों पर राज करने वाले Sumeet Mixer की कहानी

यादें सिर्फ इंसानों से जुड़ी हुई नहीं होतीं, आपके घर में रखी हुई हर पुरानी चीज आपकी याद का हिस्सा है. रसोई में पड़ी कोई बड़ी और मजबूत सी थाली शायद आपके मामा के यहां से दी गई हो, या फिर वो पुराना टीवी जो स्टोर में पड़ा है, जिसके आने पर आप बचपन में इतना खुश हुए थे कि महीने भर तक आपका उसके सामने से उठने का मन ही नहीं करता था, ये सब हमारी यादों का हिस्सा है.

देश के बहुत से लोगों की ऐसी ही एक खास याद जुड़ी है एक मिक्सर से. जी हां सब्जी के मसाले पीसने वाला मिक्सर. ये वो खास मिक्सर है जिसने एक समय में पूरे भारत के रसोई घरों पर एकछत्र राज किया. ऐसा इसलिए भी था क्योंकि यही मिक्सर देश का पहला अपना मिक्सर था. देश इसे सुमीत मिक्सी के नाम से जानता है. इस देसी मिक्सी के तैयार होने और इसके देश का नंबर वन मिक्सी ब्रांड बनने की कहानी भी बहुत अलग है.

ये मिक्सर ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है’ का एक सटीक उदाहरण है. तो चलिए जानते हैं देश के पहले मिक्सी की कहानी:

विदेशी मिक्सी पर निर्भर था अपना देश

आज हमारे देश में मिक्सर ग्राइन्डर के एक से बाढ़ कर एक ब्रांड हैं. आप मिक्सी लेने चले जाएं तो छोटी से छोटी इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप में भी आपको मिक्सी के कई मॉडल दिखा दिए जाएंगे, लेकिन पहले ऐसा नहीं था. बहुत सी ऐसी साधारण चीजें थीं जिनके लिए लोगों को विदेशी सामान पर निर्भर रहना पड़ता था. इन्हीं में से एक थी मिक्सी. उन दिनों अपने देश में कोई भी ऐसी कंपनी नहीं थी जो मिक्सी बनाती हो. उन दिनों मिक्सी सिर्फ संपन्न घरों में होती थी और ये विदेशी ब्रांड होती थी.

भारतीय रसोई में कामयाब नहीं थी विदेशी मिक्सी

देश के अन्य घरों की तरह ही यहां के एक इंजीनियर साहब सत्यप्रकाश माथुर की धर्मपत्नी माधुरी माथुर भी विदेशी ब्रॉन ब्रांड की मिक्सी का इस्तेमाल किया करती थी. सब कुछ तो ठीक था लेकिन इन विदेशी मिक्सर्स में एक बड़ी समस्या ये थी कि इसे विदेशी खान पान में इस्तेमाल होने वाले मसालों के हिसाब से बनाया गया था लेकिन भारतीय रसोइयों में बनने वाले खाने में मोटे और सख्त मसालों का इस्तेमाल होता था.

ऐसे सख्त मसालों को झेल पाने की ताकत इन विदेशी मिक्सियों में नहीं थी. नतीजन, एक दिन मिसेज माथुर की मिक्सी जवाब दे गई. उनकी मोटर जल गई और मिक्सी खराब हो गई. अब समस्या ये थी कि उन दिनों ब्रॉन जैसे विदेशी ब्रांड की मिक्सी का देश में कोई भी सर्विस सेंटर नहीं था, जहां से इसे ठीक करवाया जाता.

मिसेज माथुर के गुस्से ने देश को दी स्वदेशी मिक्सी

अब मिक्सी खराब होने की वजह से मिसेज माथुर का गुस्सा सातवें असामान पर चढ़ गया और ये गुस्सा उतरा उनके इंजीनियर पति सत्यप्रकाश माथुर पर. मिसेज माथुर ने गुस्से में लाल होते हुए अपने पति को ये चुनौती दे डाली कि ‘अगर आप सच में इंजीनियर हैं तो इस मिक्सी को ठीक करिए.’ पत्नी की ये चुनौती इंजीनियर साहब के लिए भारी मुसीबत साबित हो सकती थी.

अब भला कोई पति अपना काम धंधा छोड़ कर कैसे उस मिक्सी को ठीक करने बैठ जाएगा जिसके बारे में उसे कोई अधिक जानकारी नहीं है. लेकिन मिस्टर माथुर अलग ही मिजाज के इंसान थे. उन्होंने ना केवल अपनी पत्नी द्वारा दिए गए चैलेंज को स्वीकार किया बल्कि तुरंत ही इस विदेशी मिक्सी को ठीक करने की बजाए नई मिक्सी बनाने में लग गए. कुछ दिनों की मेहनत के बाद ही उन्होंने ऐसी मिक्सी तैयार कर दी जो भारतीय रसोई की जरूरत के हिसाब से एकदम सही थी.

एक प्रयोग जो इस तरह बन गया एक ब्रांड

मिस्टर माथुर द्वारा तैयार की गई इस एल आकर की स्वदेशी मिक्सी में 500-600 वाट की दमदार मोटर लगी थी. बताया जाता है कि यह मोटर 20,000 आरपीएम का टॉर्क उत्पन्न करती थी. मिस्टर माथुर का हौसला तब बढ़ गया जब उनकी पत्नी और दोस्तों ने इस मिक्सी की तारीफ करनी शुरू की. यहीं से उन्हें इस मिक्सी को भारत की हर रसोई तक पहुंचाने का विचार आया.

वह उन दिनों सीमेंस कंपनी में काम कर रहे थे. उन्होंने तुरंत ही अपने बॉस के पास जाकर नई कंपनी डालने की इजाजत मांग ली. परमिशन मिलने के बाद 1963 में भारत को मिली उसकी पहली स्वदेशी मिक्सी. इसी साल मिस्टर माथुर ने अपनी पत्नी माधुरी माथुर के नाम से मिक्सी बनाने वाली ‘पावर कंट्रोल एंड अप्लायंसेज कंपनी’ रजिस्टर कारवाई और अपनी स्वदेशी मिक्सी को सुमीत नाम दिया.

सुमीत नाम क्यों पड़ा !

सुनने में ऐसा लगता है जैसे इस मिक्सी का नाम मिस्टर माथुर ने अपने किसी फैमिली मेंबर के नाम पर रखा हो लेकिन ऐसा नहीं था. दरअसल, सुमीत का मतलब होता है ‘अच्छा दोस्त’, ये मिक्सी रसोई में भारतीय ग्रहणियों की अच्छी दोस्त बनकर उनका काम आसान कर सके इसीलिए उन्होंने इसका नाम सुमीत रखा.

देखते ही देखते नंबरवन ब्रांड बन गया सुमीत

इस मुंबई ब्रांड मिक्सी में इतनी ताकत थी कि ये सख्त से सख्त मसालों का भी चूरा बना देती थी और सालों साल इसकी मोटर बिना रुके काम करती थी. बताया जाता है कि ये मिक्सी 20 सालों तक चलती थी. यही कारण था कि 1990 के दशक तक सुमीत नंबर वन मिक्सी बनी रही. 1980 के दशक में सुमीत मिक्सी का कोई तोड़ ही नहीं था. कंपनी के दावे के अनुसार 80 के दशक में हर महीने करीब 60,000 मिक्सी बिक जाया करती थी.

सालों तक सुमीत मिक्सी देश के लोगों के लिए एक भरोसेमंद ब्रांड बनी रही.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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