14 साल में हुआ शोषण, पढ़ाई के लिए छुपाई पहचान, समाज से लड़कर बने महाराष्ट्र के 1st किन्नर Advocate

14 साल में हुआ शोषण, पढ़ाई के लिए छुपाई पहचान, समाज से लड़कर बने महाराष्ट्र के 1st किन्नर Advocate

आज के आधुनिक दौर में पहले के मुकाबले बहुत कुछ बदल चुका है. लोगों ने बहुत सी बातों के लिए अपने नजरिए को बदला है. लेकिन अफसोस यह है कि आज भी हमारे देश में बहुत से लोगों के मन से किन्नरों के प्रति घृणा का भाव नहीं गया है. इन्हें लोग आज भी कम आंकते हैं, इन्हें तरह तरह के नामों से बुलाते हैं.

अब समय बदल रहा है, अपने आप को सम्मान और हक दिलाने के लिए किन्नर खुद ही आगे आ रहे हैं और हर क्षेत्र में अपने साथियों के लिए दरवाजे खोल रहे हैं. ठीक उसी तरह जिस तरह महाराष्ट्र के इस किन्नर ने मिसाल कायम की है :

बने महाराष्ट्र के पहले किन्नर एडवोकेट

पवन यादव महाराष्ट्र के पहले किन्नर एडवोकेट बन गए हैं. LLB करने के बाद पवन अधिवक्ता बने हैं. किन्नर समाज को नई पहचान दिलाने में जूते महाराष्ट्र के पवन यादव का मानना है कि जिस किन्नर समाज को हमेशा आम समाज से सम्मान नहीं मिला उसमें इतने क्षमता है कि वो हर क्षेत्र में काम कर सकता है.

माता पिता का मिला साथ, पवन पर है गर्व

मुंबई के गोरेगांव में रहने वाले पवन का किन्नर होते हुए एडवोकेट बनने का सपना पूरा हुआ है उनके मां बाप की वजह से हुआ है. हमने ऐसी बहुत सी सच्ची कहानियां देखी और सुनी हैं जब खुद मां बाप ने ही अपने किन्नर बच्चे को खुद से अलग कर दिया लेकिन पवन इस मामले में भाग्यशाली रहे हैं. मीडिया से बात करते हुए पवन ने बताया कि उन्हें उनके मां-बाप की तरफ से हमेशा सहयोग मिला.

उनके पिता सरकारी नौकरी में हैं, उन्हें हमेशा लोगों से पवन के बारे में बुरा-भला सुनना पड़ा है लेकिन वह हर बात को सह लेते थे. ये सब देखकर पवन को हमेशा बुरा लगता था और उन्होंने ये सब सहने के बाद मन में ये ठान लिया था कि वह जीवन में कुछ ऐसा करेंगे जिससे उनके माता पिता का नाम रोशन हो. आज पवन ने खुद की बात को सही साबित कर दिखाया है. महाराष्ट्र के पहले किन्नर अधिवक्ता बनने के बाद आज उनके माता पिता और किन्नर समाज को उन पर गर्व है.

पढ़ाई में भी आईं मुश्किलें

आज भले ही पवन इतिहास रच चुके हों लेकिन उनका यहां तक पहुंचने तक का सफर बहुत कठिन रहा है. पढ़ाई से लेकर समाज के व्यवहार तक हर जगह उन्हें ये अहसास कराया गया कि वह औरों से भिन्न हैं. एलएलबी की पढ़ाई के लिए जब पवन ने फॉर्म भरा तो उन्होंने ट्रांसजेंडर कॉलम पर टिक किया. इसके बाद जब उनका फॉर्म कॉलेज पहुंचा तो उनका एडमिशन तक रोक दिया गया. इसके लिए पवन को कॉलेज प्रशासन और कॉलेज के ट्रस्टी से मुलाकात कर बात करनी पड़ी. इसके बाद जा कर उनका एडमिशन एक स्पेशल कोटे के तहत हुआ. इतना ही नहीं, पवन को लॉ कॉलेज में आम लड़कों की तरह रहने की कोशिश करनी पड़ी जिससे कि उनकी पहचान छुपी रहे और वह अच्छे से अपनी पढ़ाई कर सकें.

लैंगिक शोषण के बाद नहीं मिला न्याय तो कर लिया वकील बनने का फैसला

पवन ने एडवोकेट बनने का फैसला यूं ही नहीं किया था बल्कि इसके पीछे उनका एक बहुत बड़ा दर्द जुड़ा है. पवन ने इस बारे में मीडिया को बताया जब वह 14 साल के थे तभी उनका लैंगिक शोषण हुआ था. इसके लिए उन्होंने न्याय की गुहार लगाई मगर उन्हें कहीं भी न्याय नहीं मिला. हर तरफ उन्हें दुत्कारा गया, उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया. इसके बाद उन्होंने सोच लिया कि वह खुद एक वकील बनेंगे और किन्नर समाज के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!