गरीब का बेटा, जिसने चाय-पान बेचते हुए सच किया पिता का सपना, CWG में देश के लिए जीता ‘पहला मेडल’

शनिवार दोपहर को, 21 वर्षीय भारोत्तोलक संकेत महादेव सरगर ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पहला पदक दिलवाया. 55 किग्रा वर्ग में कुल 248 किलोग्राम भारोत्तोलन के साथ संकेत ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. मलेशिया के मोहम्मद अनीक बिन ने 249  की कुल लिफ्ट के साथ स्वर्ण पदक जीता.

CWG 2022 में मेडल जीतने वाले संकेत कौन?

संकेत का सिल्वर मेडल उनके चाय बेचने वाले पिता के लिए किसी गोल्ड से कम नहीं है. पिछले साल पटियाला के नेशनल वेटलिफ्टिंग कैंप में जाने से पहले खुद संकेत भी रोजाना परिवार की मदद के लिए चाय स्टाल पर चाय बेचने जाया करते थे.

भारत का ये नया सिल्वर बॉय महाराष्ट्र के सांगली में स्थित अपने टी स्टाल पर अक्सर पिता के साथ चाय बेचता दिख जाता था. इसके साथ ही संकेत ट्रेनिंग भी करते और कॉलेज भी.

चाय बेचने वाले के बेटे ने कर दिया कमाल

संकेत पर गर्व महसूस कर रहे उनके पिता महादेव सरगर अपने बेटे के जीत का जश्न मनाने के लिए आधे दिन की छुट्टी ली है. लंबे समय बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब संकेत के पिता चाय नहीं बेच रहे.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘मैं काम से एक घंटे की छुट्टी तो ले ही सकता हूं.’ संकेत के मेडल ने परिवार को खुशी मनाने का एक बहुत बड़ा कारण दिया है.

संकेत की बहन भी है वेटलिफ्टर

पिछले ही महीने संकेत की छोटी बहन काजल सरगर चौथे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पहली गोल्ड मेडलिस्ट बनी थीं. संकेत के पिता ने काजल का जीता हुआ मेडल अपने टी-स्टाल पर लगाया है और अब वह संकेत का मेडल भी यहीं लगाना चाहते हैं.

महादेव कभी नहीं चाहते थे कि उनका बेटा उनके और उनके पिता की तरह सड़क पर कोई काम करे. वह अपने दोनों बच्चों के लिए उसके सुनहरे भविष्य का सपना देखते रहे.

पिता संग दुकान पर बेचते थे चाय

संकेत ने चाय की दुकान पर एक प्रकार का मूंग पकोड़ा, जिसे मंगोड़े कहा जाता है और वड़ा पाव बनाया करते थे. इसी दुकान पर पान भी बेचा जाता है. लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह जीवन में आगे बढ़ें.

इंडियन एक्स्प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “मैं उसे बताता था कि मेरे पिता केले बेचते थे और मैं चाय और पकोड़ा बेचता हूं. इसलिए बड़े सपने देखो. आज के पदक के साथ, उसने अपने साथ साथ मेरी पहचान भी बदल दी है.”

संकेत का कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीतने का सपना तब शुरू हुआ जब उन्होंने 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गुरुराजा पुजारी को सिल्वर मेडल जीतते देखा. वह इस बारे में बताते हैं कि “मुझे वह दिन याद है.

मैं चाय की दुकान पर था और मैंने देखा कि गुरुराज भाई कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीत रहे हैं. मुझे विश्वास था कि एक दिन मैं भी वही उपलब्धि हासिल कर सकता हूं.”

संकेत के पिता भारोत्तोलन कोच नाना सिंहसाने के प्रशंसक रहे हैं. सिंहसाने द्वारा संचालित दिग्विजय भारोत्तोलन केंद्र, उनकी चाय की दुकान के पास स्थित था. संकेत ने 2012 में केंद्र में दाखिला लिया.

संकेत को प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ शिक्षाविदों का प्रबंधन करने और स्टाल पर अपने पिता की मदद करने के लिए समय निकालने में छह महीने लगे.

पिता चाहते हैं कुछ बड़ा करे

संकेत ने बताया कि उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह चाहते हैं कि वह या तो पढ़ाई करें या खेल में आगे बढ़ें. जब उन्होंने भारोत्तोलन का प्रशिक्षण शुरू किया, तो उन्हें चाय की दुकान पर भी उनकी मदद करनी पड़ी.

संकेत का दिन सुबह 6 बजे दुकान पर शुरू होता था, यहीं वह अपने प्रशिक्षण के लिए जाने से पहले दिन के लिए सामान तैयार करते थे. स्कूल के बाद संकेत पान के पत्तों का भी प्रबंधन करते थे.

2017 में सांगली के इस युवा खिलाड़ी ने महाराष्ट्र जूनियर भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में 49 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 194 किलोग्राम भारोत्तोलन के साथ स्वर्ण पदक जीता.

जिसमें स्नैच में 86 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 108 किलोग्राम शामिल थे. उन्होंने 2018 में चैंपियन और उसके बाद उसी वर्ष विशाखापटनम में जूनियर राष्ट्रीय युवा चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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