एक साधारण महिला, दिमाग मे आया भयंकर आइडिया, आज सालाना करती है 60 लाख रुपये का बिजनेस

एक साधारण महिला, दिमाग मे आया भयंकर आइडिया, आज सालाना करती है 60 लाख रुपये का बिजनेस

जब एक महिला व्यवसाय शुरू करने का फैसला करती है, तो उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. यह सब तब शुरू हुआ जब आप एक महिला थीं. महिलाओं को किसी भी व्यवसाय में कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. लेकिन आज हमारे सामने ऐसी महिलाओं के कई उदाहरण हैं जिन्होंने अपने साहस से व्यापार में डटे रहे और उसे सफल बनाया. आइए आज मिलते हैं ऐसी ही एक मूल्यवान महिला से, जिसे बिजनेस में आने से पहले ही ये भी बता दिया गया था कि ये महिलाएं यह बिजनेस नहीं करती हैं. लेकिन उसने हठ करके वह बिजनेस किया और आज उसका टर्नओवर 60 लाख से ज्यादा है.

इस कहानी की आज की हीरो हैं महाराष्ट्र के उस्मानाबाद की अर्चना रवींद्र अंबुरे. अर्चना के माता-पिता में 2 बहनें और एक छोटा भाई है. पिता के कंधों पर खेलने की उम्र में ही पिता ने दुनिया छोड़ दी. अर्चना तब सिर्फ 5 साल की थीं. वह तब भी नहीं समझी थी. माँ ने बिना थके 4 बच्चों की देखभाल की.

उन्हें केवल 3,000 वेतन मिलता था लेकिन वह इसमें सारा खर्च चलाती थीं. खेतों में दिन-रात काम करने वाली मां अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती थी. मां चाहती थीं कि अर्चना डॉक्टर बने लेकिन वह सपना अधूरा रह गया. अर्चना ने बाद में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक से अपना आईटी डिप्लोमा पूरा किया. उसे इंजीनियरिंग में आगे प्रवेश नहीं मिला क्योंकि उसे वहां भी कम अंक मिले थे.

इसके बाद अर्चना ने पुणे में नौकरी करने का फैसला किया. उसने यहां काम करते हुए एक कोर्स भी पूरा किया. इसी बीच एक और झटका लगा. मां ने अपनी बहन को सोने की चेन तोड़कर पुणे के लॉ कॉलेज में दाखिल कराया. लेकिन वह असफल रही और उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. लेकिन अर्चना ने अपने पिता और बहन को नहीं खोया. अर्चना ने बाद में शादी कर ली. मैंने उसे बड़ी बहन का छोटा दिरहा दिया. वह ससुराल सहित 8 लोगों के परिवार में अपने पति के साथ रहने लगी.

अर्चना के पति एक फार्मा कंपनी में एमआर का काम करते थे लेकिन बाद में उनकी नौकरी चली गई. इसलिए दोनों में से एक को आर्थिक रूप से सक्षम होना था. उसके पति के एक डॉक्टर मित्र ने उसे लैब की जानकारी दी. अर्चना ने डीएमएलटी का कोर्स किया. फिर उसने लैब लगाई. उसने महसूस किया कि इस प्रयोगशाला में कोई व्यावसायिक अवसर नहीं था.

फिर उसने फ़ूड प्रोसेसिंग कोर्स करने का फैसला किया ताकि वह अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सके. उसकी 7 साल की बेटी और 5 साल का बेटा था. वह कोर्स करने पुणे गई थी. कई व्यवसायों के बारे में जानने के बाद, उन्होंने एक होटल फ्रेंचाइजी शुरू करने का फैसला किया.

परिवार को सारी जानकारी दी. 7-8 लाख के निवेश की जरूरत थी. उन्होंने 2 पार्टनर्स के साथ उस्मानाबाद में एक होटल शुरू किया. पूरे साल होटल ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन पार्टनर से अनबन के चलते उन्होंने 2-3 लाख रुपये के नुकसान के साथ बिजनेस छोड़ दिया. तब मन ने जाने नहीं दिया. इसी बीच पति ने कपड़े की दुकान भी शुरू कर दी थी. वह एक बार दुकान पर चप्पल खरीदने गई थी. उसे वह सैंडल नहीं मिला जो वह चाहती थी. तभी उसके मन में ख्याल आया कि अगर आप भी इस धंधे में आ जाएं.

घर वापस गया और नेट पर सारी जानकारी मिली. सब कुछ ध्यान से अध्ययन किया गया था. जिला उद्योग केंद्र से जानकारी प्राप्त की. यह देखा गया कि जिले में कोई निर्माण इकाई नहीं थी. पड़ोसी जिले में यूनिट का दौरा किया. वे जहां भी गए, वहां से उन्हें नकारात्मक जानकारी दी गई. इसे एक बहुत ही जटिल व्यवसाय कहा जाता था. आपको शामिल नहीं होने के लिए कहा गया था. निवेश पर भी काफी खर्च होने वाला था.

हालांकि, अर्चना ने वही बिजनेस करने की ठानी. विभिन्न कंपनी ब्रांडों के साथ विपणन. अपना खुद का रिदम ब्रांड पंजीकृत किया. दुकान अभी भी खुली थी. तब मुझे एक निर्माता मिला और मुझे जानकारी मिली. निवेश 50 लाख रुपये से ऊपर होना था. वह कुछ भी नहीं ढकने वाली थी. अर्चना ने अपना सोना और आधा प्लॉट बेचकर पैसे जुटाए. उसने निर्माता को 15 लाख रुपये का भुगतान किया. और इससे अपने उत्पाद बनाए. लेकिन उसने महसूस किया कि उस आदमी ने अपना उत्पाद किसी और से बनाया था जब उसका प्लांट बंद हो रहा था और वह 2-3 लाख रुपये का लाभ कमा रहा था.

फिर, वह उदास थी. लेकिन व्यर्थ नहीं. उसने अनुभव से सीखा. उसने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने उत्पाद को 150-200 दुकानों तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की. आज वे इस व्यवसाय में अच्छी तरह से स्थापित हैं. आज चंद हजार नौकरियों वाली अर्चना का टर्नओवर 60 लाख से ज्यादा है. उनके सफर को सलाम.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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