पैसे नहीं थे तो मुंबई पहुंचा बिना टिकट, सोनू सूद ने 9 लाख देकर इलाज कराया

बॉलीवुड इंडस्ट्री में आज भले ही सोनू सूद को खलनायक के रूप में देखा जाता हो, लेकिन असल जिंदगी में वह वाकई एक हीरो हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने हजारों गरीब परिवारों की मदद की और गरीबों की मदद करने का यह चलन आज भी जारी है। आइए जानते हैं सोनू सूद के बारे में, जिन्होंने एक बार फिर ट्यूमर से पीड़ित एक युवक की जान बचाई है।

यह गढ़वा जिले की घटना है, जिसमें डंडई ब्लॉक के बौलिया गाँव के एक गरीब परिवार का एक लड़का पप्पू ट्यूमर की बीमारी से पीड़ित था, लेकिन अपने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इसका इलाज नहीं करा पा रहा था। जब पप्पू ने सोनू सूद के बारे में सुना, तो वह नंगे पैर मुंबई चला गया।

पप्पू के शरीर पर अच्छे कपड़े भी नहीं थे और पैरों पर भी लाल रंग के छाले थे। वह मुंबई से बिना टिकट ट्रेन में जा रहा था और जब वह टीटी द्वारा पकड़ा गया, तो उसने अपनी सारी कहानी बताई कि वह ट्यूमर से पीड़ित है और इसका इलाज कराने के लिए सोनू सूद से मिलने जा रहा है। टीटी ने उसे निकलने दिया। पप्पू जबलपुर, कटनी, इटारसी और कल्याण के बाद लोकमान्य तिलक टर्मिनल पहुंचे।

मुंबई पहुंचने के बाद, वह पहले सोनू सूद के मैनेजर से मिले और फिर जब वे सोनू सूद से मिले, तो सोनू सूद को देखते ही उनकी आँखों से आँसू गिरने लगे। इसके बाद उन्होंने सोनू सूद को पूरी स्थिति बताई।

सोनू सूद ने उसे खाना खिलाया और उसे पैसे आदि दिए। इसके बाद उसे बाबा साहेब ठाकरे अस्पताल में भर्ती कराया गया और उपचार सफल रहा। इसकी कीमत आठ से नौ लाख रुपये थी, जो सोनू सूद ने दी । जब सोनू सूद को पता चला कि उनके पास मोबाइल नहीं है, तो उन्होंने उन्हें एक मोबाइल भी दिया।

घर पहुंचने के बाद, पप्पू के परिवार के लोग यह जानकर बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी कि वे अपने बेटे पप्पू का इलाज करवाएँगे। पप्पू का पूरा परिवार सोनू सूद को अपना मसीहा मानता है।

उनके रिश्तेदारों और पड़ोसियों का यह भी कहना है कि भले ही सोनू सूद फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाते हैं, लेकिन वह वास्तव में एक हीरो हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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