बेटे ने नोकरी छोड़कर पुराने स्कूटर पर माता को 564 दिन, 18 राज्य और 56000 किलोमीटर की पूरी की यात्रा, पूरी बात जानकर आप भी सोच में पड़ जायेंगे

बेटे ने नोकरी छोड़कर पुराने स्कूटर पर माता को 564 दिन, 18 राज्य और 56000 किलोमीटर की पूरी की यात्रा, पूरी बात जानकर आप भी सोच में पड़ जायेंगे

मां और बेटे के बीच प्यार के कई किस्से हमने सुने होंगे। किसी भी माता-पिता के संस्कारी बेटे को श्रवण कुमार का उदाहरण दिया जाता है। जिसने एक स्कूटर लेकर अपने अंधे माता-पिता को यात्रा कराई। अब इस कलियुग में ऐसे बच्चों से मिलना समुद्र से सुई खोजने के बराबर है। लेकिन अब मामला कलियुग के श्रवण कुमार का है जो अपनी मां को 56000 किमी के सफर के लिए एक पुराने स्कूटर पर ले गए थे।

कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले कृष्ण कुमार ने अपना जीवन अपनी मां को समर्पित कर दिया है। 42 वर्षीय कृष्णा ने अपनी 70 वर्षीय मां के साथ देश भर के तीर्थ स्थलों की यात्रा शुरू की थी। जो करीब तीन साल बाद बनकर तैयार हुआ है। उन्होंने स्कूटर पर 46,522 किलोमीटर का सफर पूरा किया था।

कृष्णा ने मीडिया से कहा, “यह स्कूटर मेरे पिता का है। जिसने मुझे 2001 में तोहफा दिया था। 2015 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। वह हमारे साथ नहीं था, इसलिए मैंने अपनी मां को स्कूटर पर ले जाने का फैसला किया। इसलिए पापा भी हमारे साथ रहेंगे। हम तीनों (मेरी माँ, मेरे पिता की आत्मा और मैं) ने मिलकर यह यात्रा पूरी की है।

इस संबंध में कृष्णा की मां ने कहा, ”इस पूरी यात्रा के दौरान हम कभी किसी होटल में नहीं रुके। हमने हमेशा मंदिरों, मठों और सरायों को अपना आश्रय बनाया है। हां, इस यात्रा के दौरान मुझे कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं हुई। क्योंकि मेरे बेटे ने मेरी बहुत अच्छी सेवा की थी। वे कहते है इस यात्रा के दौरान मैंने जो जीवन जीया, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

कृष्णा बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। लेकिन तीर्थयात्रा करने के लिए मां ने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वह 2000 मॉडल बजाज स्कूटर पर अपनी मां के साथ देश के सभी तीर्थ स्थानों पर गए थे।

आपको बता दें कि दोनों ने 2 साल 9 महीने में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सभी धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था। मां-बेटे ने यह सफर 16 जनवरी 2018 को शुरू किया था। जिसे उन्होंने “मातृ सेवा संकल्प यात्रा” नाम दिया।

कृष्णा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें काफी परेशानी हुई लेकिन स्थानीय लोगों और प्रशासन ने उनकी मदद की थी। पिछले साल सितंबर में कृष्णा अपनी मां के साथ अपने गृहनगर मैसूर लौटे थे। उनसे कहा कि अब वह धर्म कर्म के मार्ग पर चलेंगे। क्योंकि वह रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के विचारों से काफी प्रेरित हैं। कृष्ण ने शादी न करके जीवन भर अपनी माँ की सेवा करने की योजना बनाई थी।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!