5000 उधार के लिए हाथ फैलाने वाला शख्स, जो मुसीबतों से लड़ा और खड़ा कर दिया अरबों का Airtel ब्रांड

कामयाबी का सफर कभी भी दिनों में तय नहीं होता. यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है. जी तोड़ मेहनत और बहुत सी निराशाओं के बाद जा कर कामयाबी हासिल होती है. जरूरी नहीं कि कोई अगर किसी संपन्न परिवार से है तो उसके लिए कामयाब होना आसान है. कामयाबी के लिए इंसान को खुद लड़ना पड़ता है. आलीशान महलों से निकल कर सड़क से सीखना पड़ता है. तब जा कर इंसान कामयाब हो पाता है. ये सभी बातें शायद किताबी ही रह जातीं अगर कुछ लोगों ने दुनिया के सामने अपने उदाहरण ना रखे होते. ऐसा ही एक उदाहरण है सुनील भारती मित्तल.

  • सड़कों से सीखा जीवन का असली सबक
  • जब 5000 रुपये का नहीं हो रहा था इंतजाम
  • हीरो साइकिल के मलिक ने की थी मदद
  • लुधियाना से मुंबई
  • फिर हाथ लगी निराशा
  • शुरू किया नया काम
  • ऐसे हुआ एयरटेल का जन्म

कौन हैं सुनील भारती मित्तल?

वैसे तो सुनील भारती मित्तल एक जाना माना नाम हैं लेकिन संभव है कि बहुत से लोग इस नाम से परिचित ना हों. हां मगर लोगों के लिए एयरटेल नाम अपरिचित नहीं है. सुनील भारती मित्तल इसी एयरटेल के मलिक हैं. एक समय था जब मार्केट में नई आईं मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के लिए सबसे पहला टारगेट शीर्ष पर बैठी एयरटेल कंपनी ही होती थीं.

मोबाइल सेवाएं देने वाली सभी कंपनियां एयरटेल से आगे निकलना चाहती थीं लेकिन एयरटेल ने अपना दायरा इतना बढ़ा लिया कि उसे पीछे करना हर किसी के बस की बात नहीं रह गई. आज भी एयरटेल देश का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क है.

आज भले ही ये कंपनी और इसके मलिक सुनील मित्तल बेहद अमीर हैं लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी. 23 अक्टूबर 1957 को पंजाब के लुधियाना में जन्मे सुनील भारती मित्तल पंजाब के प्रसिद्ध राजनेता और दो बार सांसद रहे सत पॉल मित्तल के बेटे थे.

लोगों के बीच ये धारणा है कि नेता, अभिनेता और अमीर घरों के बच्चों को भला कैसी दिक्कत हो सकती है. इस धारणा को तोड़ने के लिए ये समझना जरूरी है कि आराम की ज़िंदगी बसर करना और जीवन में कामयाब होने में बहुत फर्क है. प्रसिद्ध व अमीर लोगों के बच्चे अन्य लोगों के मुकाबले अच्छी ज़िंदगी तो जी सकते हैं लेकिन कामयाबी के लिए उन्हें उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है जितना एक आम घर का बच्चा करता है.

सड़कों से सीखा जीवन का असली सबक

सुनील हमेशा आराम की ज़िंदगी नहीं बल्कि कामयाबी चाहते रहे, जिसके लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत और संघर्ष करना पड़ा. अपनी शुरूआती पढ़ाई मसूरी स्तिथ बिनबर्ग स्कूल से पूरी करने के बाद सुनील ने आगे की पढ़ाई ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से की और इसके बाद 1976 में पंजाब यूनिवर्सिटी के आर्य कॉलेज से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया. सुनील मित्तल का मानना है कि उन्होंने बड़े स्कूल कॉलेजों में पढ़ने के बावजूद कामयाबी का असल सबक सड़कों से सीखा.

यही वजह थी कि ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने अपने पिता की तरह राजनीति का रुख करने की बजाए अपना खुद का कारोबार खोलने का फैसला किया. अपनी कई चीजों के साथ साथ लुधियाना हमेशा से साइकिल और उसके पुर्जे बनाने के जाना जाता रहा है. सुनील ने भी इसी कारोबार में उतारने का फैसला किया और लुधियाना से ही अपने बिजनेस करियर की शुरुआत कर दी.

जब 5000 रुपये का नहीं हो रहा था इंतजाम

अपने इस साइकिल के कारोबार के लिए सुनील ने अपने पिता से 20,000 रुपए लिए और अपने दोस्त साथ मिलकर ये काम शुरू कर दिया. जब सुनील मित्तल साइकिल के बिजनेस में थे इन्हीं दिनों हीरो साईकल के मालिक और संस्थापक बृज मोहन लाल मुंजाल से उनकी नजदीकियां बढ़ीं. हालांकि सुनील मित्तल एक बड़े घर से संबंध रखते थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें कई चुनौतियों से गुजरना पड़ा.

भारत से 6वें सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके सुनील के जीवन में एक ऐसा वक्त भी आया जब उन्हें मात्र 5,000 रुपये का इंतजाम करने के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ा. खुद सुनील मित्तल ने अपने इस मुश्किल दौर के बारे में बताया था.

हीरो साइकिल के मलिक ने की थी मदद

 

सुनील ने कहा था कि ये उन दिनों की बात है जब लोग पैसों के लेनदेन के लिए सिर्फ कैश का इंतजाम करते थे. किसी को चेक द्वारा पैसे देने का चलन तब इतने जोर पर नहीं था. शायद लोगों को चेक द्वारा पैसों की धोखाधड़ी का डर था. ऐसे में सुनील भारती मित्तल हीरो साईकल के मालिक बृज मोहन लाल मुंजाल के पास गए और उनसे खुद के लिए 5000 रूपये उधार मांगे. बृज मोहन लाल ने इसमें किसी तरह की आना कानी नहीं की और तुरंत ही उन्हें 5000 का चेक दे दिया. चेक देने के बाद जब सुनील वहां से जाने लगे तब बृज मोहन लाल ने उन्हें रोक कर कुछ ऐसा कहा जो उसके जीवन की सबसे बड़ी सीख बन गई. उन्होंने सुनील से कहा कि ‘बेटा इसकी आदत मत डालना.’

लुधियाना से मुंबई

सुनील मित्तल का साइकिल का कारोबार ठीक ठाक चल रहा था लेकिन उन्हें कुछ ठीक ठाक नहीं बल्कि कुछ बड़ा करना था. 1979 में उन्हें ये बात समझ आ गई कि वह चाहे जितनी मेहनत कर लें लेकिन कभी भी इस सकिल के कारोबार को बड़ा नहीं बना पाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि वह लुधियाना जैसे शहर में बहुत बड़ा कारोबार शुरू करना संभव नहीं है. यही सोचकर उन्होंने लुधियाना शहर छोड़ दिया और अपने आगे के कारोबार के लिए मुंबई चले गए.

फिर हाथ लगी निराशा

उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिल कर 1982 तक जापान से आयात होने वाले पोर्टेबल जेनरेटर बेचने का कारोबार शुरू किया. उनका बिजनेस अच्छा चल निकला. सब कुछ अब सही लग रहा था लेकिन तभी तत्कालीन भारत सरकार ने जेनरेटर के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया और दो भारतीय कंपनियों को स्थानीय स्तर पर जेनरेटर बनाने के लिए लाइसेंस प्रदान कर दिया. साइकिल का व्यवसाय बेच कर अपने भाइयों राकेश और राजन मित्तल के साथ शुरू किए भारती ओवरसीज ट्रेडिंग को भी ग्रहण लगने की नौबत आ गई.

शुरू किया नया काम

लेकिन सुनील मित्तल ने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने हमेशा यही सोच रखी कि उन्हें कुछ ऐसा करना है जो भारत में पहले कभी किसी ने न किया हो. अपनी इसी सोच के साथ उन्होंने 1986 में पुश बटन फोन को इंपोर्ट करने का फैसला किया. ताइवान से इंपोर्ट हुए पुश बटन फोनों की मदद से मित्तल ने भारत में बीटेल ब्रांड फोन की शुरुआत की. काम जब चलने लगा तब सुनील ने 1990 के दशक तक पुश बटन फोन के साथ फैक्स मशीन और अन्य दूरसंचार उपकरण बना का काम भी शुरू कर दिया.

ऐसे हुआ एयरटेल का जन्म

अब बारी थी मोबाइल जगत में तहलका मचाने की. सुनील मित्तल को ये मौका मिला 1992 में, जब भारत सरकार ने पहली बार मोबाइल सेवा के लिए लाइसेंस बांटने शुरू किए. सुनील इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे. उन्होंने फ्रेंच कंपनी विवेंडी के साथ मिलकर दिल्ली और आस-पास के इलाकों के सेल्युलर लाइसेंस प्राप्त कर लिया.

इसके बाद 1995 में सुनील मित्तल ने सेल्युलर सेवाओं की पेशकश के लिए भारती सेल्युलर लिमिटेड की शुरुआत की और इस तरह जन्म हुआ एयरटेल ब्रांड का. एयरटेल की शुरुआती कामयाबी ऐसी थी कि जल्द ही इस कंपनी के पास 20 हजार से 20 लाख और फिर 20 करोड़ यूजर्स हो गए.

एयरटेल जैसे जैसे कामयाब होता जा रहा था वैसे वैसे अपने जैसी अन्य कंपनियों को अपने साथ मिलाने लगा. एयरटेल ने 1999 में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के जेटी होल्डिंग्स, साल 2000 में चेन्नई में स्काईसेल कम्युनिकेशन्स, और साल 2001 में स्पाइस सेल कोलकाता का अधिग्रहण कर लिया.

इसके बाद सुनील मित्तल को बड़ी कामयाबी तब मिली जब उनकी कंपनी एयरटेल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हुई. 2008 तक भारत में एयरटेल के 6 करोड़ कस्टमर्स हो चुके थे. इसके साथ ही इस कंपनी की वैल्यूएशन 40 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई और भारती एयरटेल दुनिया की टॉप टेलीकॉम कंपनी बन गई.

सुनील मित्तल को फोर्ब्स द्वारा 11.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ भारत के 6वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. कभी 4.50 लाख रुपये में शुरू की गई ये कंपनी आज लगभग 35 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ चुकी है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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