लॉकडाउन में चली गई नौकरी इसलिए घर पर बना डाला ई-बाइक, तमिलनाडु के सरवन ने निकाला आपदा में अवसर

लॉकडाउन में चली गई नौकरी इसलिए घर पर बना डाला ई-बाइक, तमिलनाडु के सरवन ने निकाला आपदा में अवसर

पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों से आज हर कोई परेशान है। इसके साथ ही इन वाहनों से जो धुआं निकलता है, उससे प्रदूषण की भी बढ़ोतरी होती है। हालांकि इसके निदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहन बने हैं, परंतु आम आदमी के पास इतने पैसे नहीं कि हर कोई इलेक्ट्रॉनिक वाहन खरीद सके।

तमिलनाडु के लाल ने बनाया इलेक्ट्रिक बाइक

कहते हैं ना कि “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।” इस कड़ी में तमिलनाडु  से ताल्लुक रखने वाले सरवन ने ई-बाइक का निर्माण अपने घर पर ही कर दिया।

मशीनों के साथ खेला करते थे बचपन से ही

सरवन इलेक्ट्रिशियन का कार्य करते हैं परंतु लॉकडाउन के कारण उन्हे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके उपरांत उन्होंने खेती प्रारंभ की और अपने परिवार का आजीविका चलाने लगे। इसके बाद उनके पास जो भी वक्त बचता, उसमें वे कुछ ना कुछ एक्सपेरिमेंट करते रहते।

7 वर्ष पूर्व की थी कोशिश ई-बाइक के निर्माण की

सरवन ने बताया कि उन्होंने 7 साल पूर्व ही ई-बाइक के निर्माण के लिए प्रयास की थी, परंतु वे उसमें सफलता हासिल नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। इससे रिलेटेड वीडियो को भी देखा करते थे। जब लॉकडाउन लगी और नौकरी छूट गई तो उन्होंने फिर से इस पर कार्य प्रारंभ किया।

पुरानी गाड़ी खरीदकर किया ई-बाइक का निर्माण

ई-बाइक के निर्माण के लिए उन्होंने एक पुरानी बाइक को खरीदा और फिर उसमें बैटरी फिट करने का प्रयास किया। हालांकि वह इसमें थोड़े सफल हुए परंतु अपने बेहतर रिजल्ट के लिए उन्होंने फिर से एक और बाइक खरीदी एवं इस बार वे अपने कार्य पूरी तरह में सफल हो गये।

कर रहे खूब उपयोग

उन्होंने बताया कि मैं 45 दिनों से इस गाड़ी का उपयोग कर रहा हूं और यह बहुत अच्छा रिजल्ट दे रही है। उन्हें इस बाइक को बनाने में 26000 की लागत हुई और लगभग 3 माह का वक्त लगा। इस बाइक की माइलेज 45 किलोमीटर प्रति घंटा है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग का ज्ञान जरूरी

उन्होंने बताया कि अगर आप ई-बाइक का निर्माण करना चाहते हैं, तो आपको मैकेनिकल जानकारी अच्छी तरह होनी चाहिए। इससे ही गाड़ी बनाने में मदद मिलेगी।

चार्ज के लिए करते हैं यूपीएस का उपयोग

उन्होंने बताया कि यह बाइक में आमतौर पर लगभग 20 एएच लिथियम आयन बैटरी का उपयोग किया जाता है, परंतु मैं इतने रुपए खर्च नहीं कर सकता था। जिस कारण उन्होंने lead-acid 13 एएच बैट्री का उपयोग किया।

सोलर पैनल का करते हैं इस्तेमाल

वे अपने की बाइक की बैटरी को चार्ज करने के लिए सोलर पैनल का उपयोग करते हैं। उनके घर में 315 वाट का सोलर पैनल लगा है एवं यूपीएस भी है। जब यूपीएस चार्ज होता है तो वह इससे अपने बाइक को चार्ज के लिए यूज करते हैं।

दिव्यांग व्यक्ति के लिए भी

इस बाइक की एक सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे विकलांग व्यक्ति भी चला सकता है। ब्रेक दबाने के उपरांत मोटर बंद हो जाते हैं, जिस कारण बैटरी की बचत होती है। इसके साथ ही इसका माइलेज भी बेहतर है एवं इसमें अधिक साउंड भी नहीं आती।

सबसे अच्छी बात है कि इससे प्रदूषण पर कोई खतरा नहीं एवं पेट्रोल की कीमत से कोई परेशानी नहीं होती।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!