इस वजह से अजीत डोभाल को कहा जाता है ‘भारत का जेम्स बॉण्ड’, पाक में धर्म बदलकर 7 साल की थी जासूसी

अजीत डोभाल हमारे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और ये लंबे समय से भारत सरकार को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने से पहले अजीत डोभाल ने कई सालों तक भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के लिए जासूस के तौर पर भी काम किया था और ये लंबे समय तक पाकिस्तान में जासूस बनकर भी रहे थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपलब्धियों की फेहरिस्त काफी लंबी है। आज हम आपको अजीत डोभाल की कुछ ऐसी ही उपलब्धियां बताने जा रहे हैं। जिनको जानने के बाद आपको भी यकीन हो जाएगा कि क्यों इन्हें भारत का जेम्स बॉण्ड कहा जाता है।

अजीत डोभाल का जन्म

  • डोभाल का जन्म साल 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। इन्होंने अजमेर मिलिट्री स्कूल से अपनी शिक्षा हासिल की थी। 12 वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने साल 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी।
  • स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के बाद इन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी थी और इस परीक्षा को अच्छे अंकों से पास किया था।
  • इन्होंने केरल के 1968 बैच के IPS अफसर के तौर पर अपने करियर की शुरूआत की थी।
  • चार साल तक इन्होंने इस पद पर अपनी सेवाएं दी थी। इसके बाद ये 1972 में ही इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) में शामिल हो गए थे। इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) में शामिल होने के बाद इन्होंने जासूसी करना सीखा।

पाकिस्तान में जासूस बन गुजारे कई साल अजीत डोभाल

इन्होंने पाकिस्तान में एक मुस्लिम बनकर अपने सात साल गुजारे थे और ये इस देश में बतौर रॉ के अंडर कवर एजेंट के तौर पर रहा करते थे। इसके अलावा इन्होंने कई सालों तक नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में भी खुफिया जासूसी की है।

ऑपरेशन ब्लू स्टार में निभाई बड़ी भूमिक

अजीत डोभाल ने जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार में भी बड़ी भूमिका निभाई थी और इनकी मदद से ये ऑपरेशन सफल रहा था। इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए ये एक रिक्शा वाला बनें थे और रिक्शा वाला बनकर इन्होंने स्वर्ण मंदिर में प्रवेश लिया था। इस मंदिर में जाकर इन्होंने मंदिर में छुपे आतंकियों की जानकारी सेना को दी थी। जिसके आधार पर सेना ने ये ऑपरेशन किया था।

रोमानियाई राजनयिक को बचाया

1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू का अपहरण कर लिया था। अजीत डोभाल ने तब इन्हें बचाने की जिम्मेदारी संभाली थी और सफलता के साथ इन्हें रिहा करवाया था।

कंधार प्लेन हाईजैक केस

साल 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक के दौरान भी अजीत डोभाल ने एक अहम रोल अदा किया था और इनकी मदद से ही कई सारे भारतीयों कि जान बचाई जा सकी थी। अजीत डोभाल ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर के तहत इस प्लेन को हाईजैक करने वाले आतंकियों से निगोसिएशन करने का काम किया था।

सर्जिकल स्ट्राइक

साल 2014 में इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था और देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनकर इन्होंने कई सारी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है। इन्होंने साल 2015 में मणिपुर में आर्मी के काफिले पर हुए हमले के बाद, म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों को खत्म करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक का ऑपरेशन तैयार किया था और इस ऑपरेशन के तहत सभी उग्रवादियों का खत्म कर दिया था। इसके अलावा पाकिस्तान के अंदर घुसकर की गई भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक में भी अजीत डोभाल की अहम भूमिका रही है।

अनुच्छेद 370 हटाने में अजीत डोभाल की भूमिका

जम्मू कश्मीर में लगे अनुच्छेद 370 को हटाने में भी अजीत डोभाल का हाथ रहा है। इन्होंने इस अनुच्छेद को हटाने से लेकर घाटी में शांति बनाए रखने का जिम्मा अपने ऊपर लिया था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एलान के बाद अजील डोभाल काफी समय तक कश्मीर में ही रहे थे और यहां रहकर इन्होंने घाटी में शांति बनाए रखने का काम देखा था। इस दौरान इन्होंने घाटी के लोगों से भी मुलाकात की थी।

22 उग्रवादियों को पकड़ा

म्यांमार देश की सेना ने 22 उग्रवादियों को भारत सरकार को सौंप है और ये सब अजीत डोभाल की मदद से ही हो सका है। अजीत डोभाल ने इस देश के साथ इन उग्रवादियों को भारत को सौंपे जाने की डील की है और ये डील सफल रही है। इस मिशन को डोभाल की कूटनीति की सफलता माना जा रहा है।

अजील डोभाल द्वारा संभाले गए पद

  • डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक की जिम्मेदारियां संभालीं हैं।
  • ये मल्टी एजेंसी सेंटर और ज्वाइंट इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के चीफ भी रह चुके हैं।
  • एक दशक तक इन्होंने खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का नेतृत्व किया था।
  • इन्होंने कई सालों तक आईबी के डायरेक्टर के पोस्ट पर अपनी सेवाएं दी हैं और साल 2005 में ये इस पद से रिटायर हुए थे।
  • रिटायर होने के बाद भी डोभाल ने देश की सेवा जारी रखी हैं और इन्हें 31 मई 2014 को देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था।
  • 75 साल के अजीत डोभाल साल 2014 से इस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस पद पर रहते हुए इन्होंने तीन सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है और ये तीनों सर्जिकल स्ट्राइक कामयाब रही हैं। इन तीन सर्जिकल स्ट्राइक में से दो सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान देश में की गई हैं, जो कि साल 2016 और साल 2019 को गई की थी।
  • 3 जून, 2019 को इन्हें 5 साल के लिए एनएसए के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है और इन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की रैंक भी दी गया है।
  • डोभाल के पास जासूसी का लगभग 37 साल का अनुभव है और आज ये अनुभव देश के काम आ रहा है।

अजीत डोभाल को मिले सम्मान

अजीत डोभाल को भारत सरकार द्वारा कई सारे सम्मानों से नवाजा जा चुका है और इन्हें मिले अवॉर्ड की जानकारी इस प्रकार है –

  1. कीर्ति चक्र
  2. पुलिस पदक
  • राष्ट्रपति का पुलिस पदक

आपको बता दें कि ये भारत के इकलौते ऐसे नौकरशाह हैं जिन्हें ये अवॉर्ड मिले हैं।

अजीत डोभाल का परिवार

अजील डोभाल की पत्नी का नाम अरुणी डोभाल है और इनके कुल दो बेटे हैं। जिनका नाम विवेक डोभाल और शौर्य डोभाल है। शौर्य डोभाल बीजेपी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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