जानिए, कैसे एक छोटा सा ढाबा चलानेवाला 12वीं पास लड़का, बन गया रिजॉर्ट का मालिक

भारत जैसे विकासशील देश में लाखों उद्यमी अपना स्टार्टअप और उद्योग चला रहे हैं। छोटे से छोटा उद्यम भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। हम आपको आज एक ऐसे ही उद्यमी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनका सपना एक रिजॉर्ट  खोलने का था। लेकिन इस क्षेत्र में नए होने के कारण, उन्होंने सबसे पहले अपने बिजनेस की शुरुआत लुधियाना में एक ढाबे से की। आज वही शख्स हिमाचल प्रदेश में एक शानदार रिजॉर्ट चला रहा है। यह कहानी अंकुश कक्कड़ की है। वह फिलहाल हिमाचल प्रदेश में Treeoise Resort चला रहे हैं। उन्होंने ढाबे से रिजॉर्ट तक पहुंचने की अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया।

अंकुश अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं, “हमने बचपन से ही संघर्ष देखा है। मेरे पिता शॉल की एक दुकान चलाते हैं। मैं बचपन में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ, पिता के काम में हाथ भी बंटाता था। स्कूल की पढ़ाई खत्म हो जाने के बाद, मैं दुकान में काम करता था। लेकिन 12वीं में जब गया, तो एहसास हुआ कि मुझे पिताजी की दुकान को आगे बढ़ाना है, उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।”

12वीं के बाद, अंकुश ने बिजनेस स्किल्स की ट्रेनिंग लेने का फैसला किया। ट्रेनिंग के बाद, साल 2000 में अंकुश ने अपने पिता के साथ मिलकर, लुधियाना बस स्टैंड के पास एक ढाबा खोला। उनका ढाबा जल्द ही काफी लोकप्रिय हो गया और उनकी बिक्री भी बढ़ने लगी। कुछ समय बाद, अंकुश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, तो उन्होंने लुधियाना में 42 बिस्तरों वाला एक होटल भी खरीद लिया।

पूरा किया रिजॉर्ट खोलने का सपना

अंकुश कहते हैं कि सफलता मेहनत करने वाले और उम्मीद रखने वालों को मिलती है। ठीक उसी तरह अंकुश ने पूरी मेहनत और लगन से अपने सपने को साकार करने की ठान ली। साल 2020 में हिमाचल प्रदेश के बद्दी में 33000 स्क्वायर यार्ड में अंकुश ने अपना पहला रिजॉर्ट खोला। इस रिजॉर्ट का नाम है- Treeoise Resort !
अंकुश बताते हैं, “लुधियाना में अपने ढाबे और होटल के बिजनेस की बदौलत जो कुछ भी कमाई हुई, मैंने सबकुछ रिजॉर्ट में निवेश कर दिया। मैंने इसमें 3 करोड़ रुपए का निवेश किया है।”

लॉकडाउन के दौरान की कोरोना मरीजों की मदद

साल 2020 में जब भारत पूरी तरह से कोरोना महामारी की चपेट में था, उसी समय 28 फरवरी 2020 को अंकुश ने Treeoise Resort की शुरुआत की थी। अंकुश जानते थे कि कोविड-19 की वजह से व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हुआ भी ठीक ऐसा ही। होटल इंडस्ट्रीज कोविड-19 के बाद घाटे में चली गईं। एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण तकरीबन 43 प्रतिशत होटल बंद रहे, क्योंकि देश में लगे लॉकडाउन के दौरान आवाजाही पर पाबंदी लगाई गई थी।

अंकुश कहते हैं, “लॉकडाउन के दो तीन महीने बाद Treeoise Resort को क्वारेंटाइन जोन के तौर पर उपयोग किया जाने लगा। हमने मल्होत्रा हॉस्पिटल के साथ मिलकर कोरोना मरीजों के इलाज में सहायता की। जब कोरोना महामारी से पूरा देश जूझ रहा था। तब मैंने अपने रिजॉर्ट में काम कर रहे कुल 35 कर्मचारियों की तनख्वाह से लेकर उनके रहने और खाने की पूरी व्यवस्था की थी। उस समय रिजॉर्ट से होने वाली आय जीरो थी।”

मार्च 2021 तक Treeoise Resort का टर्न ओवर 1.2 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और रिजॉर्ट को 13.4 लाख रुपए का मुनाफा भी हुआ।

अब शॉल फैक्ट्री खोलेंगे अंकुश

अंकुश कहते हैं कि वह आने वाले समय में एक शॉल फैक्ट्री खोलेंगे। अंकुश अपने पिता के छोटे से बिजनेस को अब बड़ा बनाने की चाहत रखते हैं। उन्होंने बताया, “पिताजी आज भी लुधियाना में शॉल की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। मेरा मकसद अब इस छोटी सी दुकान को बड़ी फैक्ट्री में तब्दील करना है।”

अंकुश कक्कड़ की यह कहानी हमें बताती है कि सपने सच होते हैं। मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी यदि हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करते रहेंगे, तो सपने जरूर हकीकत में बदलेंगे।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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