देसी कुम्हार ने बनाया 24 घंटे जलने वाला अनोखा दिया, पूरा देश खरीदने के लिए हुआ बेताब

परिश्रम का मनुष्य के लिए वही महत्व है जो उसके लिए खाने और सोने का है। बिना परिश्रम का जीवन व्यर्थ होता है क्योंकि प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधनों का उपयोग वही कर सकता है जो परिश्रम पर विश्वास करता है।

आज हम आपको एक ऐसे ही परिश्रमी व्यक्ति अशोक चक्रधारी के बारे में बताएंगे जिन्होंने 24 घंटे तक जलने वाले दीये का निर्माण किया है। आइये जानते है इनके बारे में।

24 घंटे तक जल सकता है दिया

छत्तीसगढ़ के रहने वाले अशोक चक्रधारी पेशे से एक कुम्हार है। वह हमेशा इसी कोशिश में लगे रहते हैं कि लोगों के लिए अच्छे और सस्ते दीये बना सकें। दिवाली, दशहरा जैसे त्योहारों में अक्सर दीये की मांग बढ़ जाती है। जिसे देखते हुए अशोक ने मिट्टी से एक ऐसा दिया बना दिया जो लगातार 24 घंटो तक जल सकता है। अशोक चक्रधारी छतीसगढ़ के बस्तर ज़िले के कोंडागांव नाम के एक छोटे से गांव में रहते हैं। उन्होंने अपनी इस कलाकारी से सभी को चौंका दिया है।

काफी पसंद किया जा रहा दिया

अशोक द्वारा बनाए गए इस दीये को खरीदने के लिए दिल्ली, मुंबई से लोगों के फोन आते हैं। अशोक ने झिटकू-मिटकी नाम से बस्तर के पारंपरिक शिल्प में एक कला केंद्र स्थापित किया है। अशोक इस 24 घंटे तक जलने वाले दीये कि खासियत बताते हुए कहते हैं कि इस दीये में तेल का फ्लो अपने आप होता है। उन्होंने दीया बनाने की तकनीक ऑनलाइन वीडियो देखकर सीखी है।

दिये का नाम जादुई दिया

उन्होंने अपने इस दिए का नाम ‘जादुई दीया’ रखा है। उन्होंने YouTube से कई तकनीक सीख कर इस दीये को बनाया। इस दीये को अनोखे तरीके से बनाया गया है। इस ‘जादुई दीये’ की खासियत यह है कि दीये में तेल सूखने के बाद इसमें अपने आप तेल भर जाता है। यह दिया लगातार जलता रहता है। इसमें नीचे के हिस्से को गोलाकार बनाया गया है, जहां बत्ती लगाई जाती है। वहीं दूसरे भाग को चाय की केतली की तरह बनाया गया है, जिसमें तेल भरा जाता है।

अशोक ने किया है कठिन परिश्रम

यह ‘जादुई दिया’ अशोक की एक साल की कठोर मेहनत का परिणाम है। अशोक ने इस दीये को बनाने के लिए बहुत संघर्ष किया है। अशोक का जीवन बचपन से ही बेहद गरीबी में बीता था। चौथी क्लास तक पढ़ाई करने के बाद वह अपने पिता के साथ मिट्टी के काम में जुट गए थे। अशोक गांव-गांव जाकर लोगों के घरों में मिट्टी के दीये बनाते थे। तभी से उन्होंने मिट्टी से नए-नए डिज़ाइन बनाने शुरू कर दिए थे। माता पिता के देहांत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी।

अशोक आज उनलोगों के लिए प्रेरणा है जो मेहनत करने से कतराते हैं। हमें अशोक से सिख लेनी चाहिए।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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