रतन टाटा ने अपने युवा दोस्त के स्टार्टअप में किया निवेश, बुजुर्गों का अकेलापन दूर करेगी ये कंपनी

रतन टाटा के लिए नए स्टार्टअप्स में निवेश करना कोई नई बात नहीं. उन्होंने बहुत से लोगों के सपनों को अपने निवेश से सफलता की ऊंचाइयां छूने का मौका दिया. लेकिन, इस बार उन्होंने बेहद ख़ास स्टार्टअप में निवेश किया. टाटा ने इस बार एक ऐसे स्टार्टअप में निवेश किया है जो बुजुर्गों की सेवा करती है.

रतन टाटा ने किया स्टार्टअप में निवेश

रतन टाटा ने मंगलवार को गुड फेलोज नामक स्टार्टअप में निवेश का ऐलान किया. ये स्टार्टअप बुजुर्गों की सेवा के लिए है. इस अवसर पर रतन टाटा ने अपने दिल की बात कहते हुए अकेलेपन का दर्द बयां किया.

उन्होंने बताया कि बूढ़े होने पर कैसा लगता है. इस स्टार्टअप को टाटा ऑफिस के कर्मचारी शांतनु नायडू ने शुरू किया है. बता दें कि शांतनु पहले भी कई मौकों पर रतन टाटा के साथ नजर आ चुके हैं. उन्हें टाटा का युवा मित्र कहा जाता है.

पिछले महीनों रतन टाटा के साथ उनकी एक तस्वीर ने इंटरनेट पर मौजूद लोगों का दिल जीत लिया था. इस तस्वीर शांतनु अपने बुजुर्ग दोस्त व मार्गदर्शक रतन टाटा का जन्मदिन मनाते दिख रहे थे.

स्टार्टअप करेगा बुजुर्गों की सेवा

शांतनु नायडू की Goodfellows में रतन टाटा के निवेश की रकम के बारे में अभी तक कोई जानकारी साझा नहीं की गई है. इस स्टार्टअप की लॉन्चिंग के मौके पर रतन टाटा ने इस सराहनीय कदम के लिए शांतनु को उनके बधाई दी और कहा कि उन्हें इस स्टार्टअप के आगे बढ़ने पर बेहद खुशी होगी.

बता दें कि यह स्टार्टअप युवाओं को बूढ़े लोगों का सहारा बनाएगा. उनका अकेलापन दूर करने के लिए ये युवा बुजुर्गों के साथ कैरम खेलना, उनके लिए अखबार पढ़ेंगे और आराम करने में उनकी मदद करेंगे.

टाटा ने बयां किया अकेलेपन का दर्द

स्टार्टअप लॉन्च के अवसर पर रतन टाटा ने अपने दिल का हाल बयां करते हुए कहा कि, ‘आप नहीं जानते अकेले रहना कैसा होता है! जब तक आपको मजबूरी में अकेले समय न बिताना पड़े तब तक आप महसूस नहीं कर सकते कि अकेलापन कैसा होता है.’

84 वर्षीय बैचलर रतन टाटा ने आगे कहा कि, ‘जब तक इंसान सच में बूढ़ा नहीं हो जाता तब तक किसी का भी मन बूढ़े होने का बिल्कुल भी नहीं करता.’ उन्होंने बुजुर्गों की अकेलेपन की समस्या दूर करने के लिए ऐसे स्टार्टअप शुरू होना खुशी की बात है.

वहीं शांतनु नायडू ने इस मौके पर रतन टाटा को अपना बॉस, संरक्षक और मित्र बताया. उन्होंने कहा कि वह अपने स्टार्टअप गुडफेलोज के माध्यम से सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश के बुजुर्गों की सेवा करना चाहते हैं.

फिलहाल ये स्टार्टअप मुंबई में पिछले छह महीनों से 20 बुजुर्गों के साथ काम कर रही है. शांतनु ने कहा कि वह भविष्य में पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु में भी अपनी सेवाएं देने के साथ साथ इस स्टार्टअप की सेवाओं का विस्तार करेंगे.

कौन हैं शांतनु?

1993 में महाराष्ट्र के पुणे में जन्में शांतनु हुनरमंद युवा हैं. वह एक कारोबारी, इंजीनियर, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, लेखक और आंत्रप्रेन्‍यार माने जाते हैं. टाटा ट्रस्ट में डिप्टी जनरल मैनेजर का पद संभालने वाले 30 वर्षीय शांतनु ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है.

टाटा में काम करने वाले वह अपने परिवार की 5वीं पीढ़ी हैं. वह सितंबर 2014 से टाटा ट्रस्ट के साथ काम कर रहे हैं. शांतनु 2018 से रतन टाटा को सलाह देने का काम कर रहे हैं.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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