बीटेक के बाद TCS की जॉब छोड़ खेती शुरू की, खुद के साथ दूसरे किसानों की भी बढ़ा रहे आय

पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर स्थित जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर पटमदा में एक स्मार्ट युवक को ट्रैक्टर चलाते देखकर हर कोई चौंक जाता है। इस युवक का नाम राकेश कुमार महंती है, जिसने टीसीएस या टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की बेहतर नौकरी छोड़कर खेती को अपना कॅरियर चुना है। महंती ने 2012 में बीआइटी, बैंगलुरू से बीटेक किया था। इसके बाद इनका कालेज में टीसीएस ने कैंपस सेलेक्शन किया। करीब चार वर्ष तक काम भी किया, लेकिन थोड़े ही दिनों में उन्हें लगा कि ऐसी नौकरी वे ज्यादा दिन तक नहीं कर पाएंगे। इससे अच्छा होगा कि वे अपने गांव लौटें और खेती को ही कॅरियर बनाएं। आसपास के किसानों की स्थिति भी बदलने का इरादा लेकर वे गांव लौटे।

एक्सएलआरआइ से उद्यमिता विकास का कोर्स किया

टीसीएस की नौकरी छोड़कर जब वे लौटे तो प्रोफेशनल तरीके से खेती करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस की। इसके लिए जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआइ-स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में उद्यमिता विकास का कोर्स किया। इस दौरान वे किसानों और कृषि विभाग के पदाधिकारियों से भी संपर्क करते रहे। महंती कहते हैं कि मैं पारंपरिक खेती को उद्योग के रूप में बदलना चाहता था। शुरू में यह काम काफी कठिन लगा। इन चुनौतियों से निपटने के लिए देश भर का दौरा करके सफल किसानों से मिला। उनसे बातें की, फिर उनके प्रयोग को देखा-समझा। अंत में इस निर्णय पर पहुंचा कि इन समस्याओं से स्थानीय स्तर पर ही निपटा जा सकता है।

मॉडल फार्मिंग से बदली तस्वीर

राकेश महंती ने पहले से ही अपने साथ काम कर रहे पांच किसानों के सहयोग से एक छोटे से जमीन के टुकड़े पर मॉडल फार्मिंग शुरू की। इसमें सब्जी के साथ-साथ मकई-बाजरा आदि भी उगाना शुरू किया। महंती अपने साथ-साथ करीब 85 किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। वह कहते हैं कि लोग आपका अनुसरण तभी करेंगे, जब आप खुद कुछ बेहतर करके दिखाएंगे।

ब्रुक एन बीस से जुड़ रहे किसान

राकेश महंती ने वर्ष 2017 में सामाजिक उद्यम ब्रुक एन बीस शुरू किया। इसके माध्यम से किसान जैविक खेती करने के तरीके समझते हैं। खेती के लिए आवश्यक बीज, खाद, आधुनिक उपकरण आदि की जानकारी साझा करते हैं। इस उद्यम से जुड़े किसान आपस में भूमि, संसाधन, ज्ञान, उपकरण, श्रम और मशीनरी भी साझा करते हैं। इसके बदले उन्हें बिक्री बाद मुनाफे से किराया भी मिलता है। इन खेतों में काम करने वाले कृषक मजदूरों को पांच से छह हजार रुपये की मासिक आमदनी हो जाती है। महंती से देश भर के करीब 200 किसान जुड़े हैं, जो निरंतर सीखते रहते हैं।

किसान हाट भी शुरू किया

खेती की तैयारी पूरी होने के बाद महंती ने बाजार की चिंता की। इसके लिए किसान हाट की शुरूआत की। अब शहर के थोक खरीदार उनके गांव में आकर ताजा सब्जी ले जाते हैं। खुद भी शहर की हाउसिंग कालोनी-सोसाइटी में किसान हाट का स्टॉल लगने लगा। इससे लोगों में खेत से तोड़ी हुई ताजा सब्जी खाने की आदत विकसित हुई। महंती कहते हैं कि इससे पहले लोग बाजार से जाकर मजबूरी में बासी सब्जी भी खरीद लाते थे, लेकिन जब से उनकी सब्जी खरीदने लगे, बाजार जाना छोड़ दिया। ताजा सब्जी में प्राकृतिक सुगंध के साथ पौष्टिकता भी भरपूर होती है। अब उनके ग्राहकों को इसका स्वाद लग चुका है। खेती करने के अलावा वे फलदार व औषधीय पौधे भी लगा रहे हैं, ताकि हर सीजन में किसानों को रोजगार दे सकें।

किसानों-युवाओं के लिए बने रोल मॉडल

राकेश महंती के प्रयास को पूर्वी सिंहभूम जिला के पूर्व कृषि पदाधिकारी मिथलेश कालिंदी ने भी सराहा था। उन्होंने कहा कि महंती स्थानीय किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं। उच्च शिक्षित होने की वजह से उन्होंने दूसरों पर बहुत प्रभाव डाला है। किसान ही नहीं, दूसरे रोजगार में लगे युवा भी राकेश की तरह खेती करना चाहते हैं, यह बड़ी बात है। वह हाईटेक जैविक खेती कर रहे हैं और अपने उत्पादों की मार्केटिंग अपने तरीके से कर रहे हैं। उन्हें देखकर लोगों ने ज्यादा कीमत देने वाली फसलों की खेती शुरू कर दी है। महंती एक किसान स्कूल भी चलाते हैं, जहां किसानों को खेती की जैविक और आधुनिक तकनीकों का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है। कृषि विभाग भी एकीकृत खेती करने के इच्छुक किसानों को महंती के पास जाने की सलाह देते हैं।

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