पिता का सपना पूरा करने के लिए बेटी ने नहीं मानी हार, 4 बार असफलता हासिल करने के बाद बनीं IAS अधिकारी

देश की सबसे कठिन माने जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) को पास करने के लिए अभ्यर्थियों को कड़ी मेहनत से गुजरना पड़ता है। लेकिन कहते हैं न कि अगर मेहनत ईमानदारी से किया जाए तो कोई भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

आज हम आपको एक ऐसे आईएएस की कहानी बताने जा रहे हैं, जो तीन बार असफल होने के बावजूद अपने लक्ष्य पर अडिग रहे और एक दिन अपने सपने को साकार करने में कामयाब हो गए। ये कहानी हरियाणा की रहने वाली देवयानी की है। जिन्होंने UPSC 2020 परीक्षा में अच्छी खासी रैंक लाकर अपने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे राज्य के नाम को रोशन कर दिया। आईये अब जानते हैं उनकी सफलता का राज।

कौन हैं आईएएस देवयानी

देवयानी हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली हैं. उनके पिता का नाम विनय सिंह है। वे हिसार के संभागीय आयुक्त थे। देवयानी अपने पिता को शुरू से ही एक सिविल सेवक के रूप में काम करते देखा था, इसलिए वह भी अपने पिता जैसा बनना चाहती थी। देवयानी अपने पिता को ही प्रेरणा मानती हैं। और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ के एसएच सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की।

इसके बाद देवयानी ने साल 2014 में बिट्स पिलानी के गोवा कैंपस से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की हैं। UPSC परीक्षा में त्याग, मेहनत, धैर्य सब रखना पड़ता है, तब जाकर कोई आईएएस बनता है। ऐसा ही कुछ देवयानी  के साथ भी हुआ। उनके लिए भी आईएएस बनना इतना आसान नहीं था। उन्हें लगातार लगातार तीन बार असफलता मिली। साल 2015, 2016 में उनका प्रीलिम्स एग्जाम भी क्लियर नहीं हो पाया था, लेकिन वे अपनी हिम्मत नहीं हारी बल्कि और जोश के साथ तैयारी करती रहीं।

सेंट्रल ऑडिट विभाग में नौकरी लगने के बाद भी जारी रखी तैयारी

फिर साल 2017 में वे प्री और मेंस परीक्षा तो पास कर लीं लेकिन इंटरव्यू में पास नहीं हो पाए यानी तीसरी बार भी उन्हें असफलता हाथ लगी। लेकिन कहते हैं न कि जब इंसान किसी काम को ठान ले और ईमानदारी के साथ उस मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करे तो उसे कोई नहीं रोक सकता।

फिर उन्होंने साल 2019 में परीक्षा दी और सफल हुई। उन्हें 222 वीं रैंक हासिल हुई। उनकी चयन सेंट्रल ऑडिट विभाग में हुई थी। देवयानी  की सेंट्रल ऑडिट विभाग में ड्यूटी होने के कारण हफ्ते में सिर्फ दो दिन ही पढ़ाई करती थीं। क्योंकि ड्यूटी होने के कारण पढ़ाई के लिए उन्हें ज्यादा समय नहीं मिल पाता था। इसलिए वह वीकेंड यानी शनिवार और रविवार को ही पढ़ाई करती थीं।

11वीं रैंक हासिल कर बनीं आईएएस अधिकारी

सेंट्रल ऑडिट विभाग में नौकरी के बाद भी उनका सपना पूरा नहीं हुआ था. वो कुछ बड़ा करना चाहती थी. इसलिए उन्होंने चयन होने के बावजूद UPSC परीक्षा की तैयारी जारी रखी और साल 2020 में 11वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल पेश कीं।देवयानी  के मुताबिक वे रोजाना अखबार पढ़ा करती थी और लिखने पर ध्यान देती थी।

वे बताती हैं कि इससे एग्जाम में काफी सहायता मिलती है। इसके साथ ही इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने मॉक इंटरव्यू का भी सहारा लिया और इसका काफी फायदा हुआ। उनकी सफलता को देखकर ना सिर्फ उनका परिवार गौरान्वित महसूस कर रहा. बल्कि वो उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी बन गई हैं जो असफलता के बाद अपना सपनों पर काम करना छोड़ देते हैं.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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