सूरत के प्रवीण ने ट्रेडिशनल फार्मिंग छोड़ मिर्च की खेती शुरू की, तीन महीने में ही 6 लाख रुपए का मुनाफा

सूरत के प्रवीण ने ट्रेडिशनल फार्मिंग छोड़ मिर्च की खेती शुरू की, तीन महीने में ही 6 लाख रुपए का मुनाफा

कम लागत और कम वक्त में अगर बढ़िया मुनाफा कमाना हो तो मिर्च की खेती बढ़िया विकल्प है। सूरत के रहने वाले प्रवीण मंगुकिया ने 7 एकड़ जमीन पर मिर्च की खेती की है। वे गुजरात के साथ ही मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसकी मार्केटिंग कर रहे हैं। कई व्यापारी तो सीधे उनके खेत से भी प्रोडक्ट खरीदते हैं। पिछले तीन महीने में उन्होंने करीब 6 लाख रुपए की कमाई की है। आने वाले दिनों में प्रवीण को इससे और अधिक मुनाफे की उम्मीद है।

प्रवीण कहते हैं कि पहले मैं पारंपरिक खेती करता था। उसमें पूरी मेहनत और सालभर काम करने के बाद भी अच्छी कमाई नहीं होती थी। फिर लोगों ने सलाह दी कि मैं खेती में नए प्रयोग करूं। इसके बाद अलग-अलग फसलों की खेती को लेकर मैंने कुछ साल प्रयोग किए। किसी में नुकसान हुआ तो किसी में थोड़ा बहुत मुनाफा हुआ। कुछ सालों बाद मुझे लगा कि मिर्च की खेती में कम लागत में अच्छी-खासी कमाई की जा सकती है।

पहले तीन महीने में 23 टन मिर्च का प्रोडक्शन

इसके बाद साल 2021 में प्रवीण ने 7 एकड़ जमीन पर मिर्च की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने एक नर्सरी से 50 हजार पौधे खरीदे। जिसकी लागत करीब 60 हजार रुपए आई। इसके बाद खेत की तैयारी और खाद वगैरह पर खर्च किए। करीब 45 दिन बाद पौधों पर मिर्च दिखने शुरू हो गए। उसके कुछ दिन बाद मिर्च की तुड़ाई शुरू हो गई। वे बताते हैं कि कुल तीन अलग-अलग स्टेज में मिर्च की तुड़ाई होती है। पिछले तीन महीने के दौरान 23 टन से ज्यादा मिर्च का प्रोडक्शन उन्होंने किया है।

मल्चिंग तकनीक अपनाई ताकि नुकसान कम हो

प्रवीण कहते हैं कि मिर्च की खेती में कई चीजों का ध्यान रखा जाता है। कई बीमारियां भी लगती हैं। साथ ही मौसम से भी मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचता है। इससे बचने के लिए फसल की अच्छी देखभाल जरूरी होती है। इसके लिए उन्होंने खेत में मल्चिंग तकनीक अपनाई है, ताकि मौसम या किसी बीमारी से फसल को नुकसान कम हो। इसमें पैसे थोड़े अधिक लगे, लेकिन आगे के लिए बेहतर हो गया। इससे न सिर्फ बीमारियों से छुटकारा मिला बल्कि खरपतवार और मौसम की मार से भी निजात मिल गई। इस तकनीक में पानी की जरूरत भी कम पड़ती है।

प्रवीण बताते हैं कि हम खेती में देसी तकनीक अपना रहे हैं और पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। बाहर से केमिकल फर्टिलाइजर लाने की बजाय खुद ही खाद तैयार करते हैं। इसके लिए भी हमने खुद का सेटअप तैयार किया है। जिसमें गोबर, गो मूत्र और एग्रीकल्चर वेस्ट का इस्तेमाल करते हैं।

मिर्च की खेती के लिए किस तरह की मिट्टी की जरूरत होती है?

मिर्च की खेती के लिए काली और लाल मिट्टी दोनों ही बेहतर होती हैं। इसके साथ ही बलुई मिट्टी में भी मिर्च का अच्छा प्रोडक्शन होता है। बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस खेत में मिर्च की फसल लगी हो वहां जलजमाव नहीं होना चाहिए। बेहतर प्रोडक्शन के लिए जमीन का पीएच लेवल 6-7 के बीच होना चाहिए। अगर मिट्टी में हल्की नमी बरकरार रहे तो बढ़िया प्रोडक्शन होता है।

साल में तीन बार कर सकते हैं मिर्च की खेती

मिर्च की खेती साल में तीन बार की जा सकती है। पहली खेती फरवरी से मार्च के महीने में की जाती है। इसकी फसल गर्मी के सीजन में तैयार होती है। दूसरी खेती जून-जुलाई महीने में की जाती है और अक्टूबर तक प्रोडक्शन होने लगता है। वहीं, तीसरी खेती नवंबर महीने में की जाती है और मिर्च की तुड़ाई फरवरी-मार्च में की जाती है। यानी गर्मी, बरसात और ठंड तीनों ही मौसम में मिर्च का प्रोडक्शन होता है।

फसल की बुआई से पहले खेती की तैयारी अच्छी तरह से करनी चाहिए। इसके लिए ऑर्गेनिक तरीके से खाद-वगैरह खेत में मिलाना चाहिए। तीन से चार बार खेत की जुताई करनी चाहिए। फिर अलग-अलग क्यारियां बनानी चाहिए। इसके बाद 60-60 सेंटीमीटर की दूरी पर प्लांटिंग करनी चाहिए।

जहां तक सिंचाई की बात है, गर्मी के दिनों में हर 5-6 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए, जबकि ठंड में 12-15 दिनों के बीच सिंचाई करनी चाहिए। बरसात के मौसम में हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेत में पानी न ठहरे, इससे फसल को नुकसान होता है।

मिर्च की खेती के लिए जरूरी बातें

  • मिर्च की फसल को बीमारियां जल्द लगती हैं।
  • इसलिए इसकी देखभाल की जरूरत होती है।
  • इसके लिए रेगुलर ऑर्गेनिक स्प्रे का छिड़काव करना होता है।
  • खरपतवार से फसल को बचाने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाएं।
  • खेत में बारिश का पानी जमा नहीं होने दें, वरना फसल खराब हो जाएगी।
  • पौधे हमेशा अच्छी नर्सरी से ही खरीदें, ताकि बेहतर प्रोडक्शन हो।

बेहतर प्रोडक्शन वाली मिर्च की वैराइटी

जाहवार मिर्च 283- मिर्च की इस किस्म को काफी उन्नत माना जाता है। यह करीब 105 से 110 दिन में पक जाती है और लाल मिर्च लगभग 130 से 135 दिन में तैयार होती है। इससे प्रति हेक्टेयर 85 से 95 क्विंटल हरी मिर्च और 18 से 22 क्विंटल लाल मिर्च का प्रोडक्शन होता है।

जाहवार मिर्च 148- यह किस्म जल्द पक जाती है, जो कि कम तीखी मिर्च होती है। हरी मिर्च 100 से 105 दिन में तैयार हो जाती है, तो वहीं लाल मिर्च 120 से 125 दिन में तैयार होती है। इससे प्रति हेक्टेयर 85 से 100 क्विंटल हरी और 18 से 23 क्विंटल सूखी मिर्च का प्रोडक्शन होता है।

आंध्रा ज्योति- मिर्च की इस किस्म को पूरे देश में उगाया जाता है। इससे प्रति हेक्टर 18 से 20 क्विंटल सूखी मिर्च की पैदावार प्राप्त होती है।

आर्को लोहित- इस किस्म के फल तीखे होते हैं। इनका रंग लाल होता है। यह 200 दिन में तैयार हो जाती है। प्रति हेक्टर लगभग 35 क्विंटल मिर्च का प्रोडक्शन होता है।

पूसा ज्वाला- इसके वौधे छोटे होते हैं, लेकिन मिर्च की लंबाई 9 से 10 सेंटीमीटर होती है। प्रति हेक्टेयर 75 से 80 क्विंटल हरी मिर्च वहीं सूखी मिर्च 7 से 8 क्विंटल निकलती है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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