सपने सच होते हैं, पिता मज़दूरी करते हैं, बेटे ने NEET पास किया, बनेगा गांव का पहला डॉक्टर

चाहे ज़िन्दगी में कितनी भी मुश्किलें आएं, अगर सपने सच्चे हैं तो पूरे ज़रूर होते हैं. कई बार ये साबित हो चुका है कि किसी के भी सपने सच हो सकते हैं, ज़रूरत है तो थोड़ी सी मेहनत और धैर्य की. एक मज़दूर के बेटे ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है.

मज़दूर का बेटा बनेगा गांव का पहला डॉक्टर

एक दिहाड़ी मज़दूर के बेटे, दुधाराम ने नीट  की परीक्षा पास कर ली है और गांव का पहला डॉक्टर बनने जा रहा है.

ज़िला बाड़मेर, राजस्थान गांव कामथाई, सिंधारी तहसील के दुधाराम ने NEET UG 2021 परीक्षा में 720 में 626 अंक प्राप्त किए.

आर्थिक स्थिति बनी बाधा

दुधाराम के घर की माली हालत ठीक नहीं थी. लेकिन उसने धैर्य का साथ नहीं छोड़ा और मेहनत करता रहा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुधाराम ने चार बार NEET परीक्षा दी और उसे इस बार 9375 रैंक मिला. दुधाराम ने ख़ुद से पढ़ाई करके पहली बार 2018 में परीक्षा दी थी तब उसे 440 अंक मिले थे. 2019 में उसे 558 और 2020 में 593 अंक मिले लेकिन सरकारी कॉलेज नहीं मिला.

पिता और भाई हैं कन्स्ट्रक्शन लेबर

दूधाराम के घर पर माता-पिता को मिलाकर कुल 5 सदस्य हैं. परिवार के पास 10-12 बीघा ज़मीन है लेकिन सूखे की वजह से साल में एक बार ही खेती हो पाती है, जिससे परिवार अपना पेट भरता है. दूधाराम के पिता, पूराराम और छोटा भाई मज़दूरी करते हैं. उसकी मां, लेहरो देवी भी मनरेगा में मज़दूरी करती हैं. दूधाराम के माता-पिता निरक्षर हैं.

टीचर ने किया प्रेरित

दूधाराम ने स्कूली पढ़ाई एक सरकारी विद्यालय से पूरी की है. गांव के सरकारी विद्यालय से उसने 10वीं पास की और 67-67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. स्कूल के टीचर राजेंद्र सिंह सिंघाड़ ने उसे डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया. 12वीं में दूधाराम ने 82 प्रतिशत अंक प्राप्त किए.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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