कहानी उस गांव की जहां 200 से ज़्यादा जुड़वां बच्चें ले चुके जन्म, वैज्ञानिक भी नहीं समझ पा रहें वज़ह

कहानी उस गांव की जहां 200 से ज़्यादा जुड़वां बच्चें ले चुके जन्म, वैज्ञानिक भी नहीं समझ पा रहें वज़ह

दुनिया में आए दिन कोई न कोई अजीबोगरीब घटनाएं घटित होती रहती हैं, जी हां और ये घटनाएं देश-विदेश में खूब सुर्खियां भी बटोरती हैं। बता दें कि ये घटनाएं इतनी विचित्र होती हैं कि सुनने के बाद भी इन पर विश्वास नहीं होता है और आज इसी कड़ी में हम बात करने वाले हैं एक ऐसे गांव के बारे में जहां पर ज्यादातर 200 से ज्यादा बच्चे जुड़वां पैदा हो चुके हैं। ये ख़बर सुनकर ही अजीब लग रहा न!

सचमुच में ये अजीब है भी और ऐसे में जिस गांव की यह कहानी है। उसे लेकर अब वैज्ञानिक भी हैरान है, तो आइए जानते है पूरी कहानी…

बता दें कि जिनके घर जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं, लोग कई बार दोनों को पहचान ही नहीं पाते कि वो वाला कौन है जिससे कल मिले थे। लेकिन सोचो अगर एक गांव में जुड़वा बच्चों की संख्या ज्यादा हो तो क्या ही होगा? और अपने भारत में ही एक गांव ऐसा है। जहां कई जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं। आज आपको हम उसी गांव के बारे में बता रहें हैं। गौरतलब हो कि एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के कोडिन्ही में प्रति एक हजार बच्चों में से लगभग 42 जुड़वां पैदा हो रहे हैं।

जबकि अब तक पूरी दुनिया में यह औसतन एक हजार में मात्र छह का है, यानि कोडिन्ही में जुड़वा बच्चों की पैदाइश दुनिया से सात गुना ज्यादा है और यह गांव कोच्चि से लगभग 150 किलोमीटर दूर है। वहीं मालूम हो कि गांव की आबादी 2000 लोगों के आसपास की है, जिसमें से 400 जुड़वा हैं।

बता दें कि इस मामले की जांच पड़ताल करने के लिए भारत, जर्मनी और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की टीम भी आ चुकी है और वो गांव के लोगों के थूक के सैंपल भी ले चुके हैं। उनकी कद-काठी, त्वचा आदि पर शोध कर चुके हैं। लेकिन कोई भी निष्कर्ष सामने नहीं आया। साल 2008 में यहां 300 में 30 बच्चे जुड़वा बच्चे पैदा हो गए। वो बिल्कुल स्वस्थ थे। आमतौर पर ऐसा नहीं होता, एक बच्चा या फिर दोनों ही वीक होते हैं। हालांकि इसके कुछ वर्षों बाद यही संख्या 60 पहुंच गई।

वहीं एक गांव है प्रयागराज के पास उमरी, यहां भी बाकी जगहों से ज्यादा जुड़वा बच्चे पैदा हो रहे हैं। यहां भी हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई आदि के विशेषज्ञ जांच कर चुके हैं, लेकिन वे भी आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। इस गांव में लगभग ढाई सौ परिवार रह रहे हैं। बीते लगभग पांच दशक में सौ से ज्यादा जुड़वा बच्चे जन्म ले चुके हैं।

बता दें कि इस विषय को लेकर स्थानीय लोगों का मानना है कि कोडिन्ही में जुड़वां बच्चे पैदा होने का ये सिलसिला 70 बरस पहले शुरू हुआ था। 65 वर्षीय अब्दुल हमीद और उनकी जुड़वां बहन कुन्ही कदिया हैं। गांव वालों का मानना है कि इन दोनों के बाद ही गांव में जुड़वां बच्चे पैदा होने शुरू हुए। बीते दस वर्षों में तो जुड़वां बच्चें पैदा होने का ये सिलसिला और भी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है।

यह वज़ह मानते हैं डॉक्टर…

गौरतलब हो कि डॉ. कृष्णन सिरिबिजू, इस विषय पर ही काम करते हैं। वो कहते हैं कि, “यह गांव अपने आप में मेडिकल वर्ल्ड में एक चमत्कार है। मुझे लगता है कि इसके पीछे यहां के लोगों की डाइट है।” उन्होंने यह भी बताया कि 60-70 वर्ष पहले यहां शादियां 18 से 20 की उम्र में हो जाती थी। जिसके कारण परिवार जल्दी शुरू हो जाता था। यह भी एक कारण हो सकता है।

‘जुड़वा बच्चों का गांव’ के नाम से हुआ फ़ेमस…

बता दें कि कोडिन्ही गांव को ‘जुड़वा बच्चों का गांव’ कहा जाता है। गांव के लोगों को इस बात पर गर्व है। यहां तक कि गांव वालों का तो यह भी मानना है कि जल्द ही गांव में 350 जुड़वा बच्चे हो जाएंगे और बीते 50 वर्षों में यहां 300 जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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