बीजेपी को मोदी का संदेश- 400 दिन शेष हैं, सभी तबकों तक पहुंचने में करें वक़्त का इस्तेमाल – प्रेस रिव्यू

राजधानी दिल्ली में हुई बीजेपी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आख़िरी दिन मोदी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों समेत समाज के सभी तबकों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए.

सूत्रों के हवाले से द हिंदू, जनसत्ता और द इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि मोदी ने “संवेदनशीलता के साथ समाज के सभी अंगों से रिश्ता जोड़ने” की बात की और ख़ासकर पसमांदा, बोहरा और सिखों जैसे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों समेत दूसरे वर्गों के लिए काम करने की बात की. हालांकि तीनों अख़बारों का कहना है कि उन्होंने इन समुदायों का नाम लिया या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, “इन समुदायों के बीच भरोसा क़ायम करने के लिए” उन्होंने ये अपील की है.

द हिन्दू अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार, मोदी ने कहा कि भारत का “सबसे अच्छा दौर आने वाला है जिसे कोई रोक नहीं सकता”. ऐसे में बीजेपी को देश के विकास के प्रति समर्पित होने की और अमृत काल (2047 तक के 25 साल के वक्त) को कर्तव्य काल में बदलने की ज़रूरत है.

अख़बार लिखता है कि मोदी ने इस दौरान सूफ़ीवाद की बात की और कार्यकर्ताओं से कहा कि वो अलग-अलग वर्गों, अलग-अलग तरह का काम करने वालों से मिलें.

अख़बार के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी को किसी तरह का “अतिविश्वास” नहीं कहना चाहिए. उन्होंने कहा कि 1998 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस कम लोकप्रिय थी, लेकिन फिर भी दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में उसने बीजेपी को हरा दिया था.

मोदी ने पर्यावरण बचाने की भी बात की और कहा कि सरकार के अभियानों के साथ-साथ पार्टी को भी “बेटी बचाओ” की तरह “धरती बचाओ” का अभियान शुरू करना चाहिए. उन्होंने कृत्रिम खाद का इस्तेमाल कम करने की भी सलाह दी.

अख़बार लिखता है कि मोदी के संबोधन के बारे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेन्द्र फडनवीस ने मीडिया से कहा, “बीजेपी अब एक राजनीतिक आंदोलन नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है और सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बदलाव लाने की कोशिश कर रही है.”

वहीं द इंडियन एक्सप्रेस ने इस ख़बर को लेकर लिखा है कि इस साल नौ राज्यों में और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र एक रणनीति के तहत बीजेपी अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है, इसी उद्देश्य से मंगलवार को पीएम मोदी ने “बिना चुनावी उद्देश्यों को मन में रखते हुए और वोटों के बारे में न सोचते हुए” समाज के सभी तबकों तक पहुंचने की बात की है.

अख़बार लिखता है कि मोदी के संबोधन को बीते साल जुलाई में हैदराबाद में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तर्ज पर समझा जा सकता है. बीते साल हुई कार्यकारिणी में मोदी ने पसमांदा मुसलमानों और केरल में ईसाई समुदाय से जुड़ने के लिए रास्ते तलाश करने की बात की थी.

उस वक्त बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और बिहार में पसमांदा मुसमानों के लिए आउटरीच कार्यक्रम बनाया था और ये सुनिश्चित करने की कोशिश की थी कि केंद्र की योजनाएं उन तक पहुंचें.

द इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, पसमांदा मुसलामानों तक पहुंचने के लिए पार्टी के कार्यक्रमों के बारे में देवेन्द्र फडनवीस ने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमारा सफ़र तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हम सभी अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में शामिल नहीं कर लेते. उन्होंने सभी समुदायों तक पहुंचने की बात की और कहा कि चुनाव में अब 400 दिन बचे हैं और हमें अल्पसंख्यक समुदायों के लिए काम करने के लिए इस वक्त का इस्तेमाल करना चाहिए.”

फडनवीस ने कहा, “प्रधानमंत्री का संबोधन हमें प्रेरित करने वाला था. उन्होंने हमें दिशा दी और भविष्य का विज़न दिया. उन्होंने कहा कि देश का सुनहरा दौर आ रहा है और हमें और मेहनत करनी चाहिए. ये एक राजनेता का भाषण नहीं था बल्कि एक स्टेट्समैन संबोधन था.”

जनसत्ता ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि “18 से लेकर 25 साल के आयुवर्ग के लोगों ने भारत का इतिहास नहीं देखा है और उन्हें पिछली सरकारों के तहत हुए ‘भ्रष्टाचार और ग़लत कामों’ की जानकारी नहीं है. इसलिए उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है, उन्हें भाजपा के सुशासन के बारे में बताने की अवश्यकता है.”

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