बेटे के लिए नहीं मिला सेफ प्रोडक्ट तो शुरू किया अपना ब्रांड, बनी साल की पहली Unicorn कंपनी

हाल ही में टीवी पर प्रसारित किए गए लोकप्रिय रियलीटी शो, द शार्क टैंक के जरिए मामाअर्थ की फाउंडर, ग़ज़ल अलघ को एक अलग पहचान मिली है।

आज शायद देश के हर घर में युवा बिजनेसवुमन, ग़ज़ल का नाम जाना जाता है। साल 2022, गज़ल के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है।

जनवरी में उनकी डिजिटल-फर्स्ट ‘हाउस ब्रांड्स’ कंपनी, Honasa Consumer Pvt. Ltd. साल 2022 की पहली भारतीय यूनिकॉर्न कंपनी बन गई है।

होनासा कंज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड, मामाअर्थ, द डर्मा कंपनी, एक्वालोगिका और आयुगा जैसे ब्रांड्स की पैरेंट कंपनी है। कंपनी ने फंडिंग के नवीनतम दौर में 52 मिलियन अमरीकी डालर जुटाए हैं।

इसके बाद, इस बिजनेस का मूल्य अब 1.2 बिलियन अमरीकी डालर हो गया है। ग़ज़ल के पति वरुण अलघ भी इस कंपनी के को-फाउंडर हैं। इसी साल ग़ज़ल ने 10 मार्च को अपने दूसरे बेटे अयान को भी जन्म दिया है।

उन्होंने द बेटर इंडिया के साथ एक सफल बिजनेस चलाने, यूनिकॉर्न तक पहुंचने और दोबारा मां बनने के सफर पर बात की है। उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की है कि एक स्टार्टअप में निवेश करते समय वह किन बातों का ध्यान रखती हैं।

समस्याओं से भागने के बजाय ढूंढे समाधान

ग़ज़ल का जन्म और पालन-पोषण, चंडीगढ़ के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने कॉलेज में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। उनकी पहली नौकरी NIIT के साथ एक कॉर्पोरेट ट्रेनर की थी।

उनकी पेंटिंग में बचपन से दिलचस्पी थी। वह बताती हैं कि साल 2011 में उनकी वरुण से शादी हुई थी। वह एक ऐसा दौर था, जब उनके बचपन का शौक़ एक बार फिर से जीवित हो गया था।

अपने शौक को बढ़ावा देते हुए 2013 में, उन्होंने ‘न्यूयॉर्क एकेडमी ऑफ आर्ट’ में फिगरेटिव आर्ट का एक कोर्स भी किया। अगस्त 2014 में अपने पहले बेटे अगस्त्य के जन्म तक, ग़ज़ल और वरुण अपने-अपने प्रोफेशनल करियर में लगे हुए थे।मामाअर्थ के बारे में बात करते हुए ग़ज़ल बताती हैं कि इसका आइडिया सबसे पहले उन्हें और वरुण को अपने पहले बेटे के जन्म के बाद आया था।

उन्होंने बताया कि उनके बच्चे की स्किन जन्म से ही संवेदनशील थी। किसी भी भारतीय प्रोडक्ट के इस्तेमाल से बच्चे की स्किन पर फौरन रैशेज आ जाते थे और वह बहुत रोता था। ग़ज़ल याद करते हुए कहती हैं, “तब माता-पिता के रूप में हमने अपने बच्चे के लिए बेहतर दुनिया बनाने की ठान ली थी।

” फिर दोनों ने भारत में बेबी स्किन केअर प्रोडक्ट्स पर अपनी रिसर्च शुरु की। उन्होंने पाया कि कई प्रोडक्ट में विभिन्न तरह के केमिकल, टॉक्सिन और दूसरी चीज़ें मौजूद थीं, जो बच्चे के लिए काफी हानिकारक होती हैं।

पहले दूसरे देशों से मंगावाना शुरू किया प्रोडक्ट

एक घटना को याद करते हुए ग़ज़ल कहती हैं, “जब मैं न्यूयॉर्क में पढ़ रही थी, तब कुछ बेबी स्किन केअर प्रोडक्ट्स को दुकान के रैक से हटाया जा रहा था, क्योंकि उनमें कार्सिनोजेन्स होते थे। मुझे यह जानकर काफी आश्चर्य हुआ कि इन्हीं चीज़ों का इस्तेमाल उन प्रोडक्ट में किया जा रहा था, जिन्हें मैं अपने बेटे के लिए इस्तेमाल कर रही थीं।”

इस बात से वह काफी असहज और डर गई थीं। ग़ज़ल और उनके पति ने अपने बच्चे के लिए कई सुरक्षित विकल्पों की तलाश की, लेकिन भारतीय बाजार में उन्हें कुछ भी नहीं मिला। फिर उन्होंने भारत के बाहर से प्रोडक्ट मंगाना शुरु किया। इसके अलावा, दोस्तों और रिश्तेदारों को भी उन्हें खरीदने में मदद करने के लिए संपर्क किया।

लेकिन परेशानी अब तक हल नहीं हुई थी। ग़ज़ल बताती हैं कि कई बार जब तक प्रोडक्ट उन तक पहुंचते थे, तो उसकी एक्सपाइरी तारीख करीब होती थी, जिस कारण उसे वे लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं कर पाते थे।

यही वह समय था, जब उन्होंने फैसला किया कि इस समस्या का समाधान वे खुद अपना प्रोडक्ट बनाकर करेंगे। ग़ज़ल ने सामग्री, भारत में उनकी उपलब्धता और लागत पर गहरी रिसर्च शुरु की और यह पता करने की कोशिश में लग गईं कि क्या यह भारत में कर पाना संभव है या नहीं।

मामाअर्थ की शुरुआत कब हुई?

गज़ल कहती हैं, “हमने दिसंबर 2016 में मामाअर्थ के बेबी केयर प्रोडक्ट का पहला सेट लॉन्च किया।” इनमें टॉक्सिन-फ्री बॉडी लोशन, मच्छर भगाने वाले क्रीम आदि शामिल थे। कुछ ही महीनों के भीतर, बच्चों के लिए मच्छर भगाने वाला क्रीम अमेज़न पर सबसे बेस्ट सेलर बन गया। उन्हें इस प्रोडक्ट के लिए बहुत सारी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिलीं, खासकर बच्चों की मां से।

शुरूआत में, दोनों ने छोटे स्तर पर दोस्तों और परिवार के माध्यम से फंड जुटाए। अपने प्रोडक्ट को सही दिशा में ले जाने के लिए ग़ज़ल ने काफी बच्चों की मांओं से बात की, उनकी प्रतिक्रिया ली और महसूस किया कि कई लोग बेबी स्किन केअर प्रोडक्ट्स में मौजूद हानिकारक केमिकल के बारे में जानते तक नहीं हैं।

अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने के अलावा, उन्होंने लोगों को इस बारे में शिक्षित करने पर भी जोर दिया कि किसी भी प्रोडक्ट का लेबल पढ़ते समय क्या देखना चाहिए?

ग़ज़ल बताती हैं कि शुरुआत में उनके मन में यूनिकॉर्न कंपनी बनने का कोई ख्याल नहीं था। शुरुआत में उनका उद्देश्य सिर्फ 1,000 माता-पिता की मदद करना था। वह भारतीय माता-पिता के लिए एक समस्या का हल निकालना और उन्हें अपने बच्चे के लिए एक बेहतर विकल्प देने की कोशिश कर रही थीं।

ग़ज़ल बताती हैं कि कुछ समय बाद ग्राहकों ने ही सुझाव दिया कि उन्हें बड़ों के लिए भी सुरक्षित टॉक्सिन-मुक्त पर्सनल केयर प्रोडक्ट बनाना चाहिए।

Mamaearth कर रहा महिला उद्यमियों का समर्थन

आज ग़ज़ल के पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं द्वारा स्थापित स्टार्टअप्स में निवेश कर रहा है।

वह कहती हैं कि इनमें से ज्यादातर युवा महिलाएं हैं, जो किसी समस्या का समाधान निकालने वाले एक अच्छे बिजनेस आइडिया या ऐसे प्रस्ताव के साथ अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, जो वर्तमान में भारतीय बाजार में उपलब्ध नहीं है।

अपने बारे में विस्तार से बात करते हुए ग़ज़ल कहती हैं, “मैं उनके लिए एक सपोर्ट सिस्टम बनाना चाहती हूं क्योंकि मुझे पता है कि शुरुआत करना या फाउंडर बनना एक कठिन यात्रा है, जिसपर अकेला ही चलना होता है।

महिलाओं के लिए यह और भी मुश्किल है, हालांकि चीजें थोड़ी बेहतर हो रही हैं। लेकिन अब भी मुझे एक मजबूत मेंटर नेटवर्क नहीं दिख रहा है, जहां बिजनेस करने वाली महिलाएं वास्तव में एक-दूसरे को बढ़ने में मदद करें।”

Mamaearth किसी कंपनी में निवेश से पहले किन बातों का रखता है ध्यान?

ग़ज़ल बताती हैं कि वह ऐसे बिजनेस में निवेश करना पसंद करती हैं, जिससे किसी समस्या का हल निकले या फिर कोई ऐसा प्रस्ताव हो, जो वर्तमान में भारतीय बाजार में मौजूद नहीं है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू प्रोडक्ट और बाजार में उसकी कीमत है। एक प्रोडक्ट जो अच्छा तो है, लेकिन उसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि लोग उसे खरीद ही ना पाएं, तो यह बड़े पैमाने पर किया जाने वाला बिजनेस नहीं है।

तीसरी बात जो निवेश करते समय ग़ज़ल देखती हैं, वह है बाजार का आकार जिसमें संबंधित फाउंडर काम कर रहा है। वह देखती हैं कि उनके पास बड़े बाजार की दूरदर्शिता है या नहीं। क्योंकि बाजार से ही बिजनेस बढ़ता है। वह कहती हैं, “एक बिजनेस तभी समझ में आता है, जब वह स्केलेबल और सस्टेनबल हो।”

इसके अलावा, वह बिजनेस से परे जाकर, फाउंडर्स में अधिक रुचि रखती हैं। वह देखती हैं कि क्या वे वास्तव में बिजनेस बनाने में अपनी सारी ऊर्जा लगाने के लिए तैयार हैं या नहीं?”

“आपके बिज़नेस का मकसद क्लियर होना चाहिए”

गजल कहती हैं, “मुझे लगता है कि किसी भी व्यवसाय को करने के लिए आपके पास एक बहुत ही मजबूत उद्देश्य होना चाहिए। जब समय कठिन हो, तो कुछ ऐसा होना चाहिए जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे।

” खुद का उदाहरण देते हुए वह बताती हैं कि मामाअर्थ के शुरुआती दिनों में वह उद्देश्य उनका बेटा था। जब भी उन्हें लगता था कि चीजें कठिन होती जा रही हैं, तो ग़ज़ल अपने बेटे का चेहरा याद करती थीं और उन्हें महसूस होता कि उन्हें यह करना ही है।

हाल ही में, ग़ज़ल ने बेंगलुरु के स्टार्टअप, यूवी हेल्थ में निवेश किया है। इस स्टार्टअप की फाउंडर महक मलिक हैं। यूवी हेल्थ महिलाओं की ज़रूरतों को पूरा करता है और “पीसीओएस /पीसीओडी, मासिक धर्म की समस्या, थायराइड, बांझपन और वजन बढ़ने, प्रजनन और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।”

वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि पीसीओएस / पीसीओडी और पीरियड से संबंधित मुद्दे ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें भारत में अन्य हेल्थकेयर स्टार्टअप्स के बीच सक्रिय रूप से पूरा नहीं किया जा रहा है। ज्यादातर कंपनियां बड़ी और अधिक लोकप्रिय स्वास्थ्य चिंताओं से निपट रही हैं।

महिलाओं में पीसीओएस/पीसीओडी की यह समस्या काफी बड़ी है। महक, महिलाओं के लिए ऑनलाइन सही डॉक्टर, डायट और एक्सरसाइज़ प्लान तक बनाने की कोशिश कर रही हैं।”ग़ज़ल ने हाल ही में ब्लिसक्लब में भी निवेश किया है, जो एक घरेलू भारतीय एक्टिववियर ब्रांड है।

मातृत्व और बिजनेस के बीच संतुलन कैसे बनाएं?

ग़ज़ल स्पष्ट रूप से स्वीकार करती हैं कि मातृत्व को संतुलित करने और एक सफल बिज़नेस चलाने की धारणा एक ‘मिथक’ है। वह कहती हैं कि कई दिन ऐसे होते हैं, जब बच्चों को बिजनेस से ज्यादा समय की ज़रूरत होती है। लेकिन फिर कभी-कभी बिज़नेस की मांग के कारण बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते हैं।

उनका कहना है कि वह संतुलन बनाए रखने की भरपूर कोशिश करती हैं। इसके लिए वह प्रोफेशनल और पर्सनल लेवल पर शेड्यूल बनाने पर जोर देती हैं। वह कहती हैं कि दिन के कम से कम 30 मिनट वह अपने बेटे के लिए रखती हैं और उसके साथ समय बिताती हैं।

इसके अलावा, एक और चीज़ उन्होंने सीखी है। उन्होंने ऐसे इवेंट, मीटिंग, इंटरव्यू को “ना” बोलना सीखा है जिसका कोई महत्व नहीं है। वह कहती हैं, “मैं बहुत सारे इंटरव्यूज़ के लिए मना कर देती हूं, जिसका कोई मतलब नहीं होता है।

ऐसी चीजें जिसके लिए फोन पर 5 मिनट में बात हो सकती है, उसके लिए मीटिंग आदि के लिए मना कर देती हूं। इससे मुझे अपने समय को सही तरह से इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।”

“अपनों से मदद मांगने में कोई बुराई नहीं”

बिजनेस करने वाली मांओं को सलाह देते हुए गजल कहती हैं, “क्योंकि आप एक बिजनेस चलाने वाली मां हैं, इसलिए अपना ख्याल रखना ज़रूरी है।

आपके पास मन की शांति के लिए ‘मी टाइम’ होना चाहिए और साथ ही आपको अपने दिन या सप्ताह की योजना बनाने के लिए भी समय होना चाहिए। अगर चीजें आपके कंट्रोल में होती हैं, तो आप वास्तव में खुश रहते हैं।”

बिजनेस में कदम रखने वाली महिलाओं के लिए ग़ज़ल एक और सलाह देती हैं कि जब चीजें अपने तरीके से नहीं होती हैं, तो मदद या कंफर्ट मांगने से कतराना नहीं चाहिए। वह कहती हैं, “शुरुआत में, हमने अच्छी खासी वेतन वाली आराम की नौकरी छोड़ दी और अपने माता-पिता से समर्थन करने के लिए कहा।

लंबे समय तक, मुझे लगा कि सब कुछ करने की जिम्मेदारी मुझ पर है – चाहे वह बच्चे की परवरिश करना हो, बिजनेस से जुड़ी समस्याओं को हल करना हो, या स्केलिंग करना हो।

एक दिन था, जब चीजें मेरे लिए भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा हो गईं और मैं टूट गई।”जब वह सब कुछ छोड़ने के कगार पर थीं, तब उनके पति ने उनसे पूछा कि उन्होंने मदद क्यों नहीं मांगी।

ग़ज़ल कहती हैं, “मदद मांगना आसान नहीं होता है। लेकिन जब मैंने अपने परिवार से मदद मांगी और मुझे जो समर्थन मिला उससे मैं हैरान रह गई। मेरे पास ‘मॉमप्रेन्योर्स’ के लिए एक सलाह है कि आपको सब कुछ हल करने की ज़रूरत नहीं है। कृपया अपने आस-पास के लोगों से मदद मांगें, विश्वास करें कि वे मदद के लिए आगे आएंगे।”

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok mantra से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है.]

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