कम खर्चे पर ऐसे बनायें धुंआ रहित चूल्हा बिना धुंआ किये बहुत ही कम ईंधन पर खाना पकाता है

भारत के कई गांव में भारतीय परिवार खाना खाने के लिए मिट्टी के बनाये बर्तनों ओर खाना बनाने के लिए मिट्टी से बने चूल्हे का इस्तेमाल करते थे। चूल्हा पुराने समय मे संयुक्त परिवार का चिन्ह हुआ करता था, आज भी चूल्हे से बने खाने के स्वाद का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है।

आज के दौर भागदौड़ भरी जिंदगी में चूल्हा लगभग गायब हो चुका है। इसका स्वाद भी वही जान सकता है जिसने इसका स्वाद चखा होगा। इसको शब्दों में बया नहीं किया जा सकता। गाँवों में अभी भी मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाना पसन्द करते है। मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने के लिए ईंधन के तौर पर लकड़ी, कोयला या गोबर के कंडे का उपयोग किया जाता है।

 

अगर हमको कभी भी मिट्टी के चूल्हे में बने भोजन को खाने का अवसर मिले है, तो हम इसे कभी नही छोड़ते। गोबर की कंडी के उपयोग से इसमें देशी गांव के खाने की खुशबू आ जाती है। जो भोजन के स्वाद को बढ़ाता है।

चूल्हे का भोजन अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक

अगर विशेषज्ञों की माने तो भारत में कई गाँव हैं, जहां लोग अभी भी मिट्टी के चूल्हे पर बना खाना पकाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। प्राकृतिक साधनों के ज्यादा खपत से और निरंतर वनों की कटाई से प्राकृतिक साधन में कमी आते जा रही है।

ईंधन का सबसे अच्छा स्त्रोत प्राकृतिक कोयला होता है, परंतु प्राकृतिक कोयला एक ऐसा खनिज है, जिसका निर्माण धीमी गति से कई वर्षों में होता है।

निर्माण की गति धीमी है, परंतु खपत गति से हो रही है, एक समय ऐसा होगा की यह खनिज विलुप्त हो जाएंगे। जैसा की हम जानते है। एलपीजी गैस के दाम बढ़ गए है और आमदनी उतनी ही है।

ऐसे में गरीब इंसान खाएगा क्या और बचाएगा क्या। हमें सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचना हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए भी सोचना है। इस लिए इस खबर में हम जानेंगे, कम ईंधन खर्च और बिना धुँआ के किस तरह का चूल्हा तैयार किया जा सकता  है, ये चूल्हा पर्यावरण के हित में बनाया गया है, आइये जानते है।

इस तरह के चूल्हा का विचार क्यो आया

स्मोकेलेस्स चूल्हा बहुत ही शानदार उपकरण इससे खाना बनाना और सर्दी के मौसम से बचना आसान होगा। इसका उपयोग घर के भीतर भी किया जा सकता है।

बदलते समय में सभी चीजें ने नया रूप ले लिया है। पहले लोग तरह तरह के मिटटी के चूल्हे का उपयोग करते थे। परंतु आज की पीढ़ी उसे हाथ लगाना तो दूर देखना पसंद नही करती। इस लिए इस नई पीढ़ी के लिए नई तकनीक से चूल्हा बनाया गया।

धुँआ रहित चूल्हा बनाने में उपयुक्त सामग्री

इस धुंआ रहित चूल्हा को बनाने के लिए पॉलीथिन की एक बड़ी शीट की आवश्कयता होती है, इसके अतिरिक्त चूल्हा बनाने के लिए रेत, सीमेंट और ईंट भी चाहिए होती है। चूल्हे को मजबूती देने के लिए लकड़ी और लोहे की जरूरत होती है। जैसे 16 लकड़ी के डंडे, 4 पहिए, कड़ा और एक बाल्टी की भी आवश्कयता होती है।

कैसे इसे आकर्षक रूप दे

सबसे पहले फर्श पर पॉलीथीन की शीट बिछा लेते है, फिर उस शीट के ऊपर रेत और सीमेंट से तैयार मिश्रण को गोल आकार में फैला देते है। इस प्रक्रिया में आपको ध्यान रखना होता है कि गोल आकार वाली प्लेट का मुंह एक तरह से खुला रखना है, जिससे उसके अंदर लकड़ियाँ जलाने के लिए जगह बनी हो।

इसके बाद उस सीमेंट के लेप के ऊपर 4 लकड़ी के डंडे को चौकोर आकार में बिछा दें और फिर उसके ऊपर दोबारा से सीमेंट का मिश्रण फैला कर एक बड़ी गोल प्लेट तैयार करना होता है। यह आकृति हर तरफ से गोल बनेगी, जबकि सामने से इसका डिजाइन चौकोर होगा।

इस गोल प्लेट के बीच में 4 पहिए लगा कर उन्हें पेंच से अच्छी तरह से बांध देना है, इसके बाद सीमेंट से तैयार आकृति को धूप में सूखने देना है। फिर शीट से अलग करके पहियों पर खड़ा कर देना है। इस प्रकार से हम चूल्हे का आकर बना लेते है। उस तैयार बेस के ऊपर गोलाकर आकृति में ईंट की दीवार बनाते है।

इसी प्रकार की दीवार चूल्हे के अंदर वाले भाग में भी लगा दें। इस तरह करने से चूल्हे के अंदर लोहे की रॉड लगाने के लिए काफी जगह बन जाएगी। इसके बाद उस अंदर की ईंट की दीवार के ऊपर 10 से 12 लोहे की रॉड लगा देना है और उसके किनारों को सीमेंट के मिश्रण की सहायता से अच्छी तरह से ढक देना है।

इसके बाद गोल आकार वाली ईंट की दीवार को अंदर वाली दीवार से थोड़ा और ऊंचा कर देना है, जिससे उसके अंदर सरलता से आग जलाई जा सके। ईंट की दीवार को सूखने देना है। दूसरी तरफ एक बार फिर से पॉलीथिन बिछा कर गोलाकार की प्लेट तैयार कर लेना है।

इस प्लेट के बीच में बाल्टी की सहायता से दो छेद कर दीजिए। उस प्लेट को धूप से सूखाने के बाद ईंटों से बने चूल्हे के ऊपर रख देना है और सीमेंट के मिश्रण से चिपका दीजिए, चूल्हे को धूप में अच्छी तरह से सूखने दें।

इस प्रकार आपका नई तकनीक से बना चूल्हा तैयार हो जाएगा, इस चूल्हे के खुले भाग से लकड़ियाँ जलाई जा सकता हैं और चूल्हे के ऊपर मौजूद दोनों छेद से एक समय में दो प्रकार के पकवान पकाए जा सकते हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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