खेत और मकान गिरवी रखकर की पढ़ाई, बने IAS ऑफिसर

हम सभी के जीवन में कठिनाइयाँ तो आती हैं, पर कभी-कभी जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सुनते हैं, जिसका जीवन अत्यंत मुश्किलों भरा हो, तो हमें लगता है कि इनके आगे हमारी परेशानी तो कुछ भी नहीं है। जीवन में अत्यधिक संघर्षों के बाद भी कुछ लोग वह मुकाम प्राप्त कर लेते हैं, जिनके बारे में हम सिर्फ़ सोच ही सकते हैं।

ऐसे ही एक व्यक्ति हैं महाराष्ट्र के माधव गिट्टे, जिन्होंने वर्ष 2020 बैच में UPSC की परीक्षा पास माधव गिट्टे की जगह कोई और होता तो शायद हार मान जाता, क्योंकि हालात इतने विपरीत थे कि घर-खेत तक गिरवी रखना पड़ा। पढ़ाई बीच में छूटी। खेतों में मजदूरी की। इन सबके बावजूद माधव ने अपने ना सपनों को गिरवी रखा और ना ही मेहनत करनी छोड़ी।

बेइंतहा गरीबी में पले बढ़े माधव गिट्टे महाराष्ट्र के नांदेड़ से 70 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव के रहने वाले हैं। माधव यूपीएसपी परीक्षा 2019 में 210वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बने हैं। माधव के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी युवाओं को प्रेरित करने वाली है।

आईएएस माधव गिट्टे का परिवार

माधव गिट्टे किसान परिवार से हैं। माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं। पांच भाई बहन हैं। तीन बहन व दो भाई। माधव चौथे नंबर के हैं। अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं। इनके पास चार एकड़ खेत है। परिवार उसी पर खेती करता है। साथ ही दूसरे के खेतों में मजदूरी भी। खुद माधव भी मजदूरी करते थे।

स्कूल पढ़ाई के लिए रोज साइकिल से 22 किमी का सफर

मीडिया से बातचीत में माधव बताते हैं कि वर्ष 2004 में मां को कैंसर हो गया था। तब मैं दसवीं कक्षा में था। 11 किलोमीटर दूर ​स्कूल रोजाना साइकिल से आया-जाया करते थे। 22 किलोमीटर में सफर के बाद खेतों में मजदूरी भी करते। मां का पुणे में ऑपरेशन करवाया, मगर सालभर बाद उनका निधन हो गया।

एक साल के लिए छोड़ दी थी पढ़ाई

मां की मौत के बाद प​रिवार की आर्थिक स्थिति अधिक खराब हो गई थी। फीस के पैसे नहीं थे तो माधव ने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और पिता के साथ खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया। पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई फिर से शुरू करें। एक साल बाद माधव ने 12वीं कक्षा में दाखिल लिया और वर्ष 2007 में 56 फीसदी अंकों से पास की। अब कॉलेज फीस की नौबत आ गई।

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जब हर मोड़ पर मिली निराशा

12वीं में कम प्रतिशत होने के कारण माधव को सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिल नहीं मिला। आईटीआई के लिए आवेदन किया तो उसमें भी नंबर नहीं आया। ऐसे में फिर से खेतों में मजदूरी करने लगे, मगर उसी साल अकाल पड़ गया तो मजदूरी भी नहीं मिली। इस बीच पुणे जाकर एक कम्पनी में बतौर हैल्पर काम करने लगे। वहां पर फीवर हो गया तो गांव लौट आए।

कॉलेज में दाखिले के लिए ब्याज पर लिए रुपए

हर तरफ निराशा हाथ लगने के दौरान अगस्त 2008 में माधव के पास एक डिप्लोमा कॉलेज से सामान्य फीस में पॉलिटेक्निक करने का कॉल लैटर आया। छात्रावास फीस 5 हजार और ए​डमिशन फीस 2 हजार रुपए थे। यह पैसे भी ब्याज पर जुटाए थे। पहला साल तो जैसे तैसे निकल गया, मगर दूसरे-तीसरे साल के लिए फिर पैसे ब्याज पर लेने पड़े। आखिर वर्ष 2011 में माधव ने 87 फीसदी अंकों के साथ कॉलेज टॉप किया।

इस बार खेत गिरवी रखना पड़ा

माधव बताते हैं कि पॉलिटेक्निक के बाद मैं जॉब करना चाहता था, ताकि ब्याज पर लिए रुपए चुका सकूं, मगर पिता आगे और पढ़ाना चाहते थे। पिता ने हौसला बढ़ाया तो पुणे के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। 30 हजार रुपए एडमिशन व 45 हजार छात्रावास की फीस थी। इस बार हमने खेत गिरवी रखकर पैसे जुटाए। एजुकेशन लॉन के लिए काफी प्रयास किया, मगर वो नहीं मिला।

तीसरे साल घर भी गिरवी रख दिया

खेत गिरवी रखकर जुटाए पैसों से इंजीनियरिंग कॉलेज में दो साल तो निकल गए, मगर तीसरे साल फिर आर्थिक दिक्कत आई तो इस बार पिता ने घर गिरवी रख दिया। फिर जब ग्रामीणों को पता चला कि माधव इंजीनियरिंग कर रहा है और पढ़ाई में भी अव्वल है। जल्द ही कहीं अच्छी नौकरी लग सकता है। ऐसे में चौथे साल बिना कुछ गिरवी रखे ब्याज पर पैसे मिल गए थे।

प्लेसमेंट में मिली पहली नौकरी

इंजीनियरिंग की डिग्री मिलती उससे ही कॉलेज प्लेसमेंट के जरिए माधव को बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी मिल चुकी थी। माधव ने पुणे में वर्ष 2014 में एक कम्पनी ज्वाइन की। यहां दो साल तक जॉब किया, मगर माधव ने कुछ बड़ा करने के अपने सपने को नहीं छोड़ा। माधव अपने जैसे परिवारों के लिए कुछ करना चाहते थे।

दोस्त ने बताया यूपीएससी के बारे में

पुणे में बतौर इंजीनियर जॉब करने के दौरान माधव के दोस्त ने उन्हें एक यूपीएससी टॉपर का मॉटिवेशनल वीडियो दिखाया तो माधव ने अफसर बनने की ठानी और दो माह तक यूपीएसपी की परीक्षा और पाठ्यक्रम संबंधी जानकारी जुटाई। फिर सुबह पांच से छह बजे तक लाइब्रेरी जाना शुरू किया। सुबह दस से शाम पांच बजे तक ऑफिस में काम और उसके बाद रात दस बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई।

दोस्त बोले- ‘हम हैं ना, तुम तैयारी करो’

दिन में काम और सुबह-शाम लाइब्रेरी का रूटीन पांच माह तक चला। ऐसे में माधव को लगा कि जॉब करते हुए यूपीएससी की तैयारी करना मुश्किल है। नौकरी छोड़ना चाहा तो पिता का जवाब था कि बड़ी मुश्किल से नौकरी मिली है। कर्ज भी उतारना है। दोनों को साथ करते रहो, मगर माधव के दोस्त मदद को आगे आए। दोस्त अक्षय ने रूम रेंट की जिम्मेदारी उठाई। दिलीप ने मेस का खर्च दिया। तेजस रविराज ने यूपीएससी परीक्षा की टेस्ट सीरीज उपलब्ध करवाई। दोस्त आशीष व आजिक्य ने भी मदद की।

डेढ़ साल का वक्त मांगा और वर्ष 2020 में आईएएस बने

दोस्तों से इतनी मदद मिलने के बाद माधव ने उनसे सफल होने के लिए डेढ़ साल का वक्त मांगा और वर्ष मार्च 2017 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए। 18 जून को पहली यूपीएससी की परीक्षा दी। पहली बार में प्रारम्भिक भी पास नहीं कर पाए, मगर दोस्तों और परिवार ने हिम्मत नहीं टूटने दी। फिर 2018 में दुबारा कोशिश की। इस बार 567रैंक हासिल हुई, मगर आईएएस कैडर नहीं मिला। माधव ने वर्ष 2019 में तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार मेहनत रंग लाई और माधव ने 210वीं रैंक हासिल कर आईएएस बन गए। की और IAS ऑफिसर बने। थोड़े-थोड़े पैसों के लिए परेशान होते हुए एक किसान माधव से IAS माधव बनने की उनकी जीवनयात्रा की कहानी जिसने भी सुनी।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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