पति की ज़िन्दगी बचाने के लिए साड़ी में मैराथॉन दौड़ गई, ‘महाराष्ट्र की मैराथॉन लेडी’ लता खरे की कहानी

मैराथॉन दौड़ना बिल्कुल भी आसान नहीं होता. हम और हमारे जैसे कई लोग रोज़ उठकर 20 मिनट चल नहीं पाते, मैराथॉन तो अलग ही मामला है. अगर हम आपसे ये कहें कि कोई महिला 60 की उम्र में साड़ी में मैराथॉन दौड़ गई और जीत भी गई?

पति की जान बचाने के लिए मैराथॉन में दौड़ गया

बात है 2014 की. महाराष्ट्र की लता खरे के पति की तबीयत अचानक ख़राब हो गई. जीवन भर खेत में मज़दूरी कर अपना घर चलाने वाली लता के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. पति का MRI स्कैन होना था जिसके लिए 5000 रुपये की ज़रूरत थी. इतनी ज़्यादा रक़म इस दंपत्ति ने पहले देखी भी नहीं थी, घर में ये रक़म होने की तो बात ही दूसरी थी.

गांव में किसी ने मैराथॉन दौड़ने को कहा

लता को गांव में किसी ने बताया कि गांव के पास ही मैराथॉन हो रही है और उसमें प्रथम आने पर मिलने वाले 5000 रुपये कैश के बारे में बताया. लता को स्पोर्ट्स, दौड़ और मैराथॉन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उसके बावजूद उसने मैराथॉन दौड़ने का निर्णय लिया.

तीन किलोमीटर की दौड़ में प्रथम आई

साड़ी, चप्पल पहनकर लता ने मैराथॉन में हिस्सा लिया. दौड़ के बीच में ही उनकी चप्पल टूट गई लेकिन लता के क़दम नहीं रुके. लता उस दौड़ में प्रथम आईं और उन्हें पति के इलाज के लिए पैसे मिल गए.

लता खरे ने उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और आस-पास के क्षेत्रों में होने वाले कई मैराथॉन में हिस्सा लिया. लता साड़ी में कभी चप्पल तो कभी नंगे पांव ही दौड़ती.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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