नौकरी छोड़ शुरू की बंजर ज़मीन पर खेती, कीवी और सेब बेच सालाना कर रहे 40 लाख की कमाई

दिल्ली की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ मनदीप वर्मा ने ऑर्गेनिक फलों की खेती शुरु की है। ‘स्वास्तिक फार्म’ नाम के फलों के इस बगीचे में मनदीप कीवी और सेब उगाते हैं और ये ताजे फल पूरे देश में बेचे जा रहे हैं।

हिमालय पर्वतों की तलहटी में बसा एक छोटा सा गांव है शिल्ली। इस गांव में 5 एकड़ का एक बगीचा है, जहां बड़ी संख्या में कीवी और सेब उगाए जा रहे हैं और सबसे खास बात यह है कि इन फलों को उगाने के लिए किसी भी तरह के आर्टिफिशियल खाद या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। प्राकृतिक तरीकों से फल उगाने वाले ‘स्वास्तिक फार्म ’ के संस्थापक, मनदीप वर्मा कहते हैं कि इन फलों को उगाने के लिए किसी भी तरह के कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

फलों की ऑर्गेनिक खेती से आज मनदीप साल में करीब 40 लाख रुपए तक कमा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में एक कंपनी से की थी।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि साल 2010 में उन्होंने अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की और बिजनेस मार्केटिंग में अपना पहला कदम रखा। वह बताते हैं, “अपनी आईटी की नौकरी में मैं करीब आठ क्लाइंट देखता था। इससे मुझे काफी अच्छा एक्सपोजर मिला और मेरा अपना नेटवर्क भी मजबूत हुआ।”

नौकरी छोड़ Swastik farms शुरू करने का लिया फैसला

दिल्ली में कराब साढ़े चार साल काम करने के बाद, मनदीप का मन अपनी जड़ों की ओर वापस जाने लगा। वह सोलन जिले में अपने घर वापस जाना चाहते थे। मनदीप बताते हैं कि न तो वह अपनी नौकरी से संतुष्ट थे और न ही करियर में अपने उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ रहे थे। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर, अपना खुद का कुछ काम शुरु करने का फैसला लिया।

लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि आखिर करना क्या है? वह कहते हैं, “हमें बचपन से यही बताया गया था कि पढ़ने का मतलब, पारंपरिक नौकरी हासिल करना है।” मनदीप कहते हैं कि उन्होंने काफी रिसर्च की और यह समझने की कोशिश की कि जो शिक्षा और स्किल उनके पास है, उसके साथ वह क्या अलग कर सकते हैं।

काफी सोचने-समझने के बाद, 38 वर्षीय मनदीप ने स्वास्तिक फार्म शुरू करने का निर्णय किया। उन्होंने अपनी पत्नी से नौकरी छोड़ने और खेती करने के विचार पर चर्चा की। पत्नी ने उनके विचारों का पूरा समर्थन किया। मनदीप बताते हैं, “हमारे पास शिल्ली में 4.84 एकड़ पुश्तैनी जमीन ऐसे ही खाली पड़ी हुई थी। हमने खेती के लिए उस जमीन को इस्तेमाल करने का सोचा।”

खेती के बारे में कुछ नहीं जानते थे मनदीप

अब मनदीप के सामने एक समस्या थी। उन्हें मार्केटिंग का अनुभव तो था, लेकिन खेती की जानकारी जरा भी नहीं थी। उन्हें नहीं पता था कि कौन सी सब्जी या फसल कैसे उगाई जाती है। इसके अलावा, वह जमीन भी बंजर पड़ी हुई थी और उसे खेती के लिए कभी इस्तेमाल नहीं किया गया था।

मनदीप बताते हैं कि अपनी जिस पुश्तैनी जमीन पर उन्होंने खेती करने का निर्णय किया था, उस जमीन पर कभी किसी तरह का काम ही नहीं किया गया था। उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि उस जमीन पर फसलें उगाई जा भी सकेंगी या नहीं। जमीन पूरी तरह से घास और दूसरे जंगली पौधों से भरी हुई थी।

मनदीप कहते हैं, “मेरा मानना है कि प्रकृति को हमेशा पोषक तत्व विरासत में मिलते हैं, जैसे पत्ते, कार्बनिक पदार्थ आदि। हिमालय की मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर है और मैंने खेती के लिए मिट्टी पर विश्वास करने और किसी भी तरह का केमिकल इस्तेमाल न करने का निश्चय किया।”

बंजर जमीन में बोया सफलता का बीज

मनदीप के रास्ते में अभी और बाधाएं थी। एक समस्या यह भी थी कि उनकी जमीन ढलान पर थी और समतल नहीं थी। ऐसे में मनदीप ने जंगली पौधों को हटाकर मिट्टी को समतल किया। वह कहते हैं कि इस जमीन को खेती के लायक बनाने में काफी समय और मेहनत लगी।

मनदीप ने तब खेती के बारे में जानने के लिए इंटरनेट का उपयोग किया और सैकड़ों वीडियोज़ देखे। वह बताते हैं कि इंटरनेट की मदद से उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती के बारे में जाना और उनाज उगाने के लिए ज़रूरी पहलुओं के बारे में सीखा। साथ ही उन्होंने कई कृषि पत्रिकाएं भी पढ़ीं और स्थानीय अधिकारियों व बागवानी विभाग में काम करने वाले विशेषज्ञों से भी मार्गदर्शन लिया।

वह कहते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में पांच महीने का समय लगा। इस दौरान मनदीप को यह जानने में मदद मिली कि वहां आस-पड़ोस के किसान बंदरों के आतंक से काफी परेशान थे। अक्सर बगीचे और खेतों में बंदर आकर उधम मचाते और फल नष्ट कर देते थे। मनदीप कहते हैं, “यह परेशानी देखते हुए मैंने एक सुरक्षित फल उगाने का फैसला किया।”

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छोटी सी जगह में लगाए 150 कीवी के पौधे 

मनदीप ने हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें कीवी उगाने (Kiwi farming in India) का सुझाव दिया। उन्हें पता चला कि लगभग 30 किमी दूर रहने वाले कुछ किसान फल की खेती कर रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि फल उगाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है और फिर उन्होंने प्रोफेसरों के मार्गदर्शन पर चलने का फैसला किया।

कीवी के बारे में बात करते हुए मनदीप कहते हैं, “कीवी के जब फल लगते हैं, तो शुरुआत में वह खट्टा होता है और इस पर बाहर से इसकी सतह बालों जैसी होती है, जिस कारण बंदर फलों को नहीं छूते हैं। यह एक अलग तरह का और विदेशी फल है इसलिए इसका बाजार भी अच्छा है। मैंने एलिसिन और हेवर्ड किस्मों के 150 कीवी के पौधे खरीदे और उन्हें जमीन के एक छोटे से हिस्से पर उगाना शुरू किया।”

कब शुरू किया Swastik farms?

मनदीप ने मिट्टी में पोषक तत्वों को जोड़ने के लिए जीवामृत का इस्तेमाल किया। जीवामृत गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और अन्य कार्बनिक पदार्थों का मिश्रण होता है। वह बताते हैं, “मैंने सप्त धन्यंकुर का इस्तेमाल भी किया। यह लोबिया, गेहूं, चना, काला चना, हरी मूंग दाल, तिल और चना सहित सात अनाजों का मिश्रण होता है। इन सभी की समान मात्रा लेकर रात भर भिगोया जाता है और फिर पानी निकाल दिया जाता है, ताकि यह अंकुरित हो सके। फिर अनाज से एक पेस्ट तैयार किया जाता है और पानी व गोमूत्र के साथ मिलाया जाता है। कुछ घंटों के बाद इसे फ़िल्टर किया जाता है और स्टोर किया जाता है।”

इस मिश्रण का छिड़काव पौधों के फूल आने और शुरुआत की अवस्था के दौरान किया जाता है। मनदीप फर्मेंटेड छाछ का छिड़काव पौधों पर करतें हैं, ताकि खेत में फसलों पर कोई कीट हमला न कर सके।

साल 2016 में मनदीप ने पहली बार फसलों की कटाई की। मनदीप बताते हैं कि उन्होंने अपनी उपज को स्थानीय बाजार में 350 रुपए प्रति किलो बेचा और उम्मीद के मुताबिक उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद, साल 2017 में उन्होंने ‘स्वास्तिक फार्म ’ नाम से बिजनेस शुरु किया और अपनी वेबसाइट लॉन्च की।

उनका कहना है कि वेबसाइट ने उन्हें उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु के ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने में मदद की।

Swastik farms में उगा रहे इटालियन किस्म के सेब

कीवी उगाने  में सफल होने के बाद, मनदीप ने सेब उगाने का सोचा और उसमें निवेश किया। वह बताते हैं, “साल 2018 में, मैंने एक इटालियन किस्म की सेब उगाने का फैसला किया। इस किस्म के पेड़ों की ऊंचाई कम होती है और एक साल में फल लगते हैं।”

मनदीप का कहना है कि उन्होंने 12,000 पौधों के साथ दो नर्सरी भी बनाई है। यहां वह पौधे उगाते और बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल जाता है। मनदीप का कहना है कि उन्होंने अपने स्वास्तिक फार्म में 14 लाख रुपये का निवेश किया और अब उनके पास 700 कीवी के पौधे हैं, जो 9 टन फल देते हैं। इसके अलावा, उनके पास 1,200 सेब के पेड़ हैं।

उनका कहना है कि फलों की खेती सालाना 40 लाख रुपये का राजस्व उत्पन्न कर रही है। वह कहते हैं, “मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कीवी उत्पादन 45 टन तक बढ़ जाएगा।”

सोलन में रहनेवाले उद्यमी और मनदीप द्वारा उगाए जाने वाले फलों के ग्राहक दीपक मेहता कहते हैं, “मैं स्वास्तिक फार्म से चार साल से कीवी और सेब खरीद रहा हूं। इन फलों की खपत घर में होती है और इसे तो मैं अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के बीच उपहार के रूप में भी देता हूं। ”

‘खेती है शानदार पेशा’

दीपक कहते हैं कि मनदीप के खेत में उगने वाले जैविक फल, बाजार में मिलने वाले फलों की तुलना में कई मायनों में अलग हैं। वह बताते हैं, “बाजार में मिलने वाले फलों की तुलना में स्वास्तिक फार्म (Swastik farms) के फलों का स्वाद मीठा और बेहतर होता है। ये ताजा होते हैं और लगभग दो से तीन महीने तक चलते हैं, जबकि बाजार से खरीदे गए दूसरे फल दस दिनों से अधिक नहीं टिकते हैं। मेरा परिवार इन जैविक उत्पादों के अलावा, किसी अन्य उत्पाद को पसंद नहीं करता है।”

शुरुआत में मनदीप को गुणवत्ता वाले पौध के स्रोत मिलने और इन्हें उगाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। वह बताते हैं कि गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री और पौधे खोजने के लिए उन्होंने बहुत रिसर्च की। धीरे-धीरे, रास्ते बनते गए और वह मंजिल तक पहुंच गए।

मनदीप आगे कहते हैं कि उन्होंने अपना पेशा बदलकर एक बहुत बड़ा जोखिम उठाया था। वह कहते हैं, “मुझे चिंता थी कि मैं अपने स्थिर कॉर्पोरेट जीवन को छोड़ने के बाद, सफलता प्राप्त कर पाऊंगा या नहीं। मेरे माता-पिता ने मेरी पूरी यात्रा में साथ दिया है, लेकिन दोस्त और रिश्तेदार को शायद इस पर पूरी तरह से यकीन नहीं था। ”

वह कहते हैं कि उनके कई दोस्त खेती को नीचे स्तर या छोटा काम मानते थे। मंदीप कहते हैं, “मुझे लगता है कि किसान के प्रति समाज की धारणा बदलनी चाहिए, क्योंकि यह एक शानदार पेशा है।”

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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