माता-पिता से प्रेरित होकर बेटी ने छोड़ा 20 लाख रुपए का पैकेज, पहले प्रयास में बनीं आईपीएस अधिकारी

माता-पिता से प्रेरित होकर बेटी ने छोड़ा 20 लाख रुपए का पैकेज, पहले प्रयास में बनीं आईपीएस अधिकारी

देश की बेटियों को अगर सही अवसर मिले तो वे हर काम कर सकती है. आज हम आपको जिस आईपीएस अधिकारी के बारे में बताने उनकी कहानी अन्य लड़कियों को प्रेरित करने वाली है. इस आईपीएस अधिकारी का नाम ईशा सिंह है. जिन्होंने पहले तो वकालत की पढ़ाई कर महिलाओं को न्याय दिलाने में अपना योगदान दिया. फिर आईपीएस अधिकारी बनकर देश की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गईं हैं.

अपने पिता से प्रेरणा लेकर उन्होने देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली. इतना ही नहीं उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में अच्छी खासी रैंक हासिल कर ना सिर्फ अपने पिता के सपनों को पूरा किया बल्कि आईपीएसस अधिकारी बनकर महिलाओं के लिए एक प्रेरणा भी बन चुकी हैं. आइए जानते हैं ईशा सिंह ने कैसे देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की.

कौन है ईशा सिंह

ईशा सिंह रामनगर ब्लॉक के जवंसीपुर गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता का नाम वाईपी सिंह है. वहीं मां का नाम आभा सिंह है. पिता आईपीएस अधिकारी के तौर पर कार्यरत हैं वहीं मां एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील हैं. परिवार का असर ईशा पर भी पड़ा. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि उन्होंने लोगों के लिए सेवाभाव की भावना जहां पिता से से सीखी तो करियर के चुनाव के दौरान मां का योगदान रहा. ईशा की शुरूआती पढ़ाई लखनऊ के मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने मुंबई के जेबी पेटिड एंड कैथेड्रल स्कूल से पूरी की है। बचपन से पढ़ाई लिखाई में अच्छा होने के कारण उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए.

बेसिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मां की तरह वकालत करने का विचार किया. बंगलूरू के नेशनल लॉ कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में कुछ समय तक काम किया. ईशा बचपन से ही समाज सेवा को लेकर काफी सजक रहती थी. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि ग्रेजुएशन के बाद उन्हें एक लॉ फर्म से 20 लाख रु. के पैकेज का ऑफर मिला था, लेकिन ईशा ने अपने पापा की तरह समाज सेवा करने का निर्णय कर उस ऑफर को ठुकरा दिया था.

आगे वो बताती हैं कि उनके करियर की सबसे बड़ी कामयाबी उस दिन हासिल हो पाई थी जब उन्होंने 3 विधवा महिलाओं का मुफ्त में केस लड़ा था. और उन महिलाओं को कोर्ट के आदेश पर 10 लाख का मुआवजा दिलवाने में सफलता हासिल कर पाईं थीं. हालांकि इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी परीक्षा भी देने का निश्चय कर लिया था.

परिवार की मदद से हासिल की सफलता

ईशा सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली. वो कहती हैं कि इस परीक्षा की सफलता के लिए वो अपने पिता आईपीएस वाईपी सिंह, मां आभा सिंह, भोनु भईया और नाना—नानी को देती हैं।

परिवार के लोगों ने उनकी तैयारी के दौरान काफी मदद की. फैमली सपोर्ट उन्हें हमेशा मिलता रहा. यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को सलाह देती हैं कि यूपीएससी परीक्षा आपके जीवन में बदलाव लाती है. पूरी ईमानदारी और सही रणनीति से मेहनत करने से सफलता जरूर हासिल होती है.

191वीं रैंक हासिल कर बनीं आईपीएस अधिकारी

सटीक रणनीति और कड़ी मेहनत की बदौलत ईशा को पहले ही प्रयास में सफलता हासिल हो गई. उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 191वीं रैंक हासिल की. इस रैंक के साथ उन्हें आईपीएस अधिकारी बनने का मौका मिल गया. उनकी इस सफलता से ना सिर्फ वो खुश हैं बल्कि उनका परिवार भी काफी उत्साहित है.

अपनी सफलता के बारे में अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए वो बताती हैं कि खुद के टैलेंट को कम नहीं समझना चाहिए. समस्याएं सबके साथ आती रहती हैं उनका सामना करके सफलता हासिल की जा सकती है। जीवन में सफल होने के लिए आपको जिद्दी बनना होगा कि अब कोई कुछ भी कहें।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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