खेतों में नहीं बल्कि बोरियों में उगाएं फसलें, कम लागत में मिलेगा ज्यादा उत्पादन व मुनाफा

आज हमारे पास खेती करने के बेहतर विकल्प के साथ अनेकों पद्धतियां भी हैं। अगर किसान उन पद्धतियों को अपनाकर खेती करें तो वह इसमें अधिक लाभ अर्जित करने के साथ अन्य किसानों के लिए उदाहरण भी बन सकता है।

हमारे वैज्ञानिक हमेशा कुछ-न-कुछ नई तकनीकों को विकसित कर रहें हैं जो किसानों के लिए अधिक आमदनी का स्त्रोत बन रहा है।

आज हम आपको इस कहानी द्वारा यह एक ऐसी तकनीक के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर किसान अधिक लाभ कमा रहे हैं। इस खेती को करने का तरीका अलग है इसमें फसल को खेत में नहीं बल्कि बोरियों में उगाया जा रहा है।

इस तकनीक को “जवाहर मॉडल” तकनीक नाम दिया गया है जिसमें जुताई के साथ किसानों को अन्य चीजों में कम लागत लगेगी।

जवाहर मॉडल को अपनाकर करें खेती

आप जवाहर मॉडल को अपनाकर बंजर पड़ी जमीन को भी हरा-भरा बना सकते हैं। इसके लिए आपको मिट्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि खेत में बोरियों की मदद से फसलों को लगाया जाता है।

अगर आपके पास खेत नहीं तो आप छत पर भी इस पद्धति को अपनाकर फसलों को लगा सकते है। इस खेती में आपको जुताई जैसे खर्च से बचत होगी और उत्पादन भी बेहतर होगा।

40 वर्षीय ज्योति पटेल ने अपनाया यह मॉडल

ज्योति पटेल जो कि अरेंजमेंट महिला किसान है कई वर्षों से खेती कर रही है। परंतु इस बार जवाहर मॉडल को अपनाकर खेती कर रही हैं जिससे उन्हें अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने अपने खेतों में अरहर का पौधा लगाया है वह भी जवाहर मॉडल से।

ज्योति पटेल की आयु 40 वर्ष है और वह मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से ताल्लुक रखती हैं। ज्योति पटेल के साथ उनके समूह की अन्य महिलाएं भी इस पद्धति को अपनाकर खेती कर रही हैं। जवाहर मॉडल में आपको जमीन में नहीं बल्कि बोरियों में फसलों को लगानी होती है।

जवाहर मॉडल को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

लगया है 200 अरहर का पौधा

ज्योति ने जानकारी दिया कि उन्होंने बोरियों में अरहर की फसल लगाई है। उन्होंने बताया कि जब हमारी टीम कृषि विश्वविद्यालय पहुंची तब हमें इस पद्धति के बारे में जानकारी मिली।

हमारे पास इतनी जमीन नहीं जहां हम खेती करें या फिर ट्रैक्टर से जुताई करें इसीलिए हमें यह पद्धति बहुत अच्छी लगी और हम सब ने इसे ही अपनाया। हम अपने घर के आसपास बोरियों में फसलों को लगा कर उससे उचित मुनाफा कमा सकते हैं।

मैंने 200 बोरियों में अरहर के फसल लगाई है मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे फसल में अधिक फर भी लग चुके हैं जो जमीन वाली खेती के अपेक्षा अधिक हैं।

जमीन के अभाव में छत पर बोरी में लगा सकते हैं फसलें

वह बताती हैं कि इस तकनीक को विकसित करने में जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय मेहनत की है। इस तकनीक को अपनाकर किसान बंजर पड़ी जमीन में भी फसलों को लगा सकते हैं।

अगर आपके पास जमीन नहीं है तो आप अपने छत पर भी इस पद्धति को अपनाकर फसलों की बुआई कर सकते हैं। डॉक्टर मोनी थॉमस जो कि कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक हैं वह बताते हैं कि किसानों का अधिक खर्च खेत की जुताई एवं उर्वरक चला जाता है।

हमारे देश में ऐसे भी किसान हैं जिनके पास एक एकड़ तक जमीन है ताकि वह खेती करें। ऐसे में हमारे किसान इस पद्धति को अपनाकर खेती कर सकते हैं। -Jawahar Model Farming

अरहर के साथ धनिया, हल्दी एवं अन्य फसलों को लगा सकते हैं

वह बताते हैं कि अगर आपको एक एकड़ में जवाहर मॉडल को अपनाकर अरहर की बुआई करनी है तो इसके लिए आपको लगभग 1200 बोरियों की आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ आप अन्य फसलों को भी उगा सकते हैं जैसे धनिया एवं हल्दी आदि।

आप एक बोरी में 50 ग्राम हल्दी भी लगा सकते हैं जिससे आपको ढाई किलो हल्दी प्राप्त होगा। वहीं अगर आपकी धनिया लगाते हैं तो इससे आपको 500 ग्राम तक की धनिया की हरी पत्तियां मिलेंगी। आप इससे लाखों के कीट पालकर इसे अतिरिक्त आए का स्त्रोत भी बना सकते हैं। साथ ही आप इसकी लकड़ी का उपयोग जलावन के तौर पर कर सकते हैं।

600 महिलाएं जुड़ी हैं इस खेती से

डॉक्टर थॉमस बताते हैं कि अगर हम जमीन में खेती करते हैं तो पौधों को समय-समय पर उर्वरक एवं सिंचाई की आवश्यकता होती है। परंतु अगर हम जवाहर मॉडल को अपनाकर खेती करें इसके लिए हमें इनसब से मुक्ति मिलती है। क्योंकि जब मिट्टी का निर्माण होता है उसी वक्त फ़र्टिलाइज़र को डाल दिया जाता है एक बार उर्वरक डालने से यह हमें बार-बार लाभ प्रदान करता है।

वहीं अगर हम सिंचाई की बात करें तो हमें इसके लिए सप्ताह या महीने में एक बार ड्रिप इरीगेशन या फिर पाइप की मदद से पौधों की सिंचाई करने की आवश्यकता होती है।

ऐसा नहीं है कि इस तकनीक को अपनाकर आप सिर्फ अरहर हल्दी एवं धनिया जैसे फसल को ही उगा सकते हैं आप चाहे तो बैंगन, टमाटर, मिर्च, मूली, पालक, लौकी को भी जवाहर मॉडल के जरिए उगा सकते हैं। वह बताते हैं कि स्वयं सहायता समूह के लगभग 600 से अधिक महिलाएं इससे जुड़कर इस पद्धति को अपनाकर खेती कर रही हैं।

हमें उम्मीद है कि हमारे जो पाठक खेती में अधिक रुचि रखतें हैं या खेती करते हैं वह भी इस कहानी को पढ़कर जवाहर मॉडल तकनीक को अपनाकर फसलों को बुआई कर, मिट्टी, सिंचाई, उर्वरक एवं जुताई के लागत से मुक्ति पा सकते हैं। वह भी इस पद्धति को अपनाकर खेती कर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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