आईपीएस अंकिता शर्मा रहीं युवाओं का भविष्य, 100 छात्रों को दे रहीं यूपीएससी की फ्री कोचिंग

आईपीएस अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर की रहने वाली हैं। वह साल 2018 बैच की आईपीएस हैं। आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईपीएस होने का गौरव भी उन्हें हासिल है। आईपीएस बनने का उनका सफर आसान नहीं रहा। वह यूपीएससी की परीक्षा में तीन बार असफल रहीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। हर बार असफल होने पर दोगुने उत्साह से तैयारी शुरू की। दिन में 8 से 12 घंटे तक पढ़ाई की। इसी का नतीजा रहा कि वह चौथे प्रयास (2018) में यूपीएससी (UPSC) में 204 रैंक हासिल करने में सफल रहीं। आईपीएस बनने के बाद उन्होंने आपने आस-पास रहने वाले गरीब युवाओं के जीवन को संवारने का बीड़ा उठाया और उन्हें मुफ्त में यूपीएससी की कोचिंग देना शुरू किया। शुरुआत में पांच छात्र आए फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ने लगी। आज तकरीबन 100 छात्र आईपीएस की कोचिंग पढ़ने उनके पास आते हैं।

हर रविवार को छात्रों को देती हैं टिप्स

अंकिता शर्मा की गिनती छत्तीसगढ़ के तेज-तर्रार आईपीएस अफसरों में होती है। वह अक्सर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। यूपीएससी की तैयारी करने वाले गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग पढ़ाने को लेकर भी उनकी चर्चा होती है। इस बारे में वह बताती हैं कि, मैं छात्रों को इसलिए गाइड करती हूं ताकि वे आसानी से यूपीएससी की परीक्षा क्लीयर कर अच्छे और ईमानदार अफसर बन सकें। आर्थिक स्थिति बाधा न बने इसलिए मैं गरीब बच्चों को पढ़ाती हूं। अंकिता के मुताबिक रोजाना छात्रों को कोचिंग पढ़ा पाना संभव नहीं होता, इसलिए वह हर रविवार को कोचिंग पढ़ाती हैं। वह छात्रों को यूपीएससी पास करने की टिप्स देने के साथ ही इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवालों के बारे में बारीकी से बताती हैं। उन्हें नोट्स भी मुहैया कराती हैं। छात्रों को पढ़ाने के लिए वह अपने व्यस्ततम रूटीन के बीच एक दिन मिलने वाली छुट्टी के बावजूद कहीं घूमने नहीं जाती हैं।

तैयारी के लिए छह महीने दिल्ली में रहकर की कोचिंग

आईपीएस अंकिता शर्मा की प्राथमिक शिक्षा दुर्ग शहर में ही पूरी हुई। ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने एमबीए किया। इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी कर आईपीएस बनने का फैसला किया। उन्हें बचपन से ही वर्दी अपनी ओर आकर्षित करती थी। कुछ समय तक दुर्ग में रहकर यूपीएससी की तैयारी करने के बाद अंकिता कोचिंग करने के लिए दिल्ली आ गईं। यहां तकरीबन छह महीने तक कोचिंग करने के बाद वह वापस दुर्ग लौट गईं और घर में ही रहकर तैयारी जारी रखी। वह तीन बार असफल हुईं, लेकिन अपना इरादा नहीं बदला। आखिरकार चौथे प्रयास में वह यूपीएससी की परीक्षा पास करने में सफल हो गईं।

आदिवासी बच्चों में जगा रहीं शिक्षा की अलख

अंकिता शर्मा आदिवासी बच्चों विशेषकर लड़कियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने में जुटी हैं। उन्होंने इसके लिए मुहिम भी छेड़ रखी है। गरीब आदिवासी बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन (किताब, कॉपी, बैग, पेंसल, पेन) आदि भी वह खुद अपने पैसे से मुहैया कराती हैं। सोशल मीडिया पर आईपीएस अंकिता काफी सक्रिय रहती हैं। हजारों लोग उन्हें फॉलो करते हैं।

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