भारत-न्यूज़ीलैंड मैच: शुभमन गिल चमके, लेकिन बाकी खिलाड़ियों का प्रदर्शन क्यों सवालों के घेरे में

गिल की ख़ासियत ये है कि वो बड़े स्कोर के भूखे हैं और 30-40 रन कर उन्हें ख़ुशी नहीं मिलती. पिछली सिरीज़ में कॉमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने भी कहा था कि गिल से बड़े शतक और दोहरे शतक की उम्मीद है तभी वो टीम में अपनी जगह पक्की कर सकेंगे.

हैदराबाद में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पहले वनडे मैच में गिल ने कुछ ऐसा ही किया. उन्होंने 149 गेंदों पर 208 रन बनाए जिसमें 19 चौके और 9 छक्के शामिल रहे.

जहां बाक़ी भारतीय बैटर्स फ़्लॉप रहे, वहीं गिल की पारी ने भारत के स्कोर को 350 के क़रीब पहुंचा दिया. वनडे में डबल सेंचुरी लगाने वाले वो विश्व के आठवें और भारत के पांचवें बल्लेबाज़ बन गए.

उनसे पहले रोहित शर्मा, सचिन तेंदुलकर, विरेंदर सहवाग और ईशान किशन ने वनडे में 200 का आंकड़ा पार किया था. गिल की इस पारी ने भारत को जीत भी दिलाई और टीम में उनकी अपनी जगह भी लगभग पक्की कर दी.

पिछले कुछ समय से भारतीय टीम वनडे में रोहित शर्मा का साथ देने के लिए एक ओपनर की तलाश कर रही है और इस रेस में ईशान किशन भी शामिल हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले बांग्लादेश के विरुद्ध दोहरा शतक लगाया था. लेकिन गिल ने पिछली सिरीज़ में शतक और अब डबल शतक लगाकर अपना दावा मज़बूत कर लिया है.

डबल सेंचुरी से बनाया डबल रिकॉर्ड इस बेहतरीन दोहरे शतक के साथ शुभमन गिल ने दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए.

पहला, वो वनडे क्रिकेट में डबल सेंचुरी लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए. उन्होंने ये करिश्मा 23 साल की उम्र में कर दिखाया और ईशान किशन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा जिन्होंने 24 साल में दोहरा शतक लगाया था.

दूसरा, उन्होंने इस पारी की मदद से वनडे में अपने हज़ार रन पूरे किए. वनडे मैचों में एक हज़ार रन पार करने में गिल ने 19 पारी लगाई जो किसी भारतीय की सबसे कम पारी है. इस तरह वो एक हज़ार रन बनाने वाले सबसे तेज़ भारतीय बल्लेबाज़ बन गए.

वहीं अगर इसी श्रेणी में वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ़ नज़र डाले तो पाएंगे कि सिर्फ़ पाकिस्तान के फ़ख़र ज़मान ने हज़ार रन बनाने में गिल से कम समय लगाया. उन्होंने ये मुकाम 18 पारियों में हासिल कर लिया था.

इस मैच में कुछ ऐसे रिकॉर्ड भी बने जिसे देखकर भारतीय टीम को ख़ुशी नहीं होगी.

किसी मैच में कोई एक बल्लेबाज़ दो सौ रन बनाए और पचास ओवर में टीम का स्कोर सिर्फ़ 349 रह जाए ये टीम मैनेजमेंट के लिए परेशानी की बात है. साथ ही ये सबसे कम स्कोर है जब किसी ने पारी में दोहरा शतक लगाया हो.

इसके अलावा सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले दो बैटर्स के बीच रनों का अंतर भी इस मैच में सबसे ज़्यादा रहा. जहां, गिल ने 208 रन बनाए वहीं रोहित शर्मा जो टीम के दूसरे सर्वाधिक स्कोरर थे उन्होंने महज़ 34 रनों का योगदान दिया. दोनों के बीच 174 रनों का अंतर रहा जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

साथ ही वनडे के इतिहास में ये दूसरा मौक़ा था जब किसी बल्लेबाज़ ने 200 रन बनाए हों और पारी में किसी और ने 50 का स्कोर भी ना बनाया हो. ये सभी रिकॉर्ड इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भारत का ये 349 का स्कोर सिर्फ़ एक बल्लेबाज़ की पारी की वजह से बन सका.

अगर शुभमन गिल इस पारी में फ़ेल हो जाते तो शायद भारतीय टीम 200 का स्कोर बनाने से चूक जाती और वो भी ऐसी पिच पर जो बैटिंग के लिए बेहद मददगार साबित हो रही थी. टीम के बाकी बल्लेबाज़ों की कंसिस्टेंसी में कमी मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के लिए चिंता का विषय होगी.

ब्रेसवेल ने दी गिल को कड़ी टक्कर

हालांकि इस मैच में गिल ने दोहरा शतक जमाया, लेकिन मैच में ज़बर्दस्त रोमांच न्यूज़ीलैंड के माइकल ब्रेसवेल की पारी ने पैदा किया.
एक समय न्यूज़ीलैंड का स्कोर था छह विकेट पर 131 रन और ऐसे में लग रहा था कि भारत को बड़े अंतर से जीत मिलने वाली है. लेकिन सातवें विकेट के लिए ब्रेसवेल और मिचेल सैंटनर ने 162 रनों की पार्टनरशिप की.

सैंटनर 57 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन ब्रेसवेल अंतिम ओवर तक बने रहे. उन्होंने वनडे करियर का दूसरा शतक लगाते हए 140 रन बनाए. उन्होंने ये स्कोर महज़ 78 गेंदों पर 12 चौके और 10 छक्के की मदद से बना डाले.

जब तक ब्रेसवेल क्रीज़ पर मौजूद थे तब तक न्यूज़ीलैंड भारत को अपसेट करने में क़ाबिल नजर आ रहा था. आख़िरी ओवर में कीवी टीम को जीत के लिए 20 रन बनाने थे और शार्दुल ठाकुर के इस ओवर में पहले ही गेंद पर छक्का लगाकर ब्रेसवेल ने अपनी नीयत साफ़ कर दी थी.

लेकिन इसी ओवर में वो एलबीडब्ल्यू आउट हो गए और न्यूज़ीलैंड ये मैच 12 रनों से हार गया. हालांकि जीत भारत को ही मिली, लेकिन ब्रेसवेल के तूफ़ान ने गिल के दोहरे शतक की चमक ज़रूर कम कर दी.

पारी को जल्दी ख़त्म ना कर पाना गेंदबाज़ों की कमज़ोरी

साढ़े तीन सौ के स्कोर को बचाने में भारतीय गेंदबाज़ों को जितनी मशक़्क़त करनी पड़ी ये उसकी कमज़ोरी को भी उजागर करती है.

स्लॉग ओवर्स में पिट जाना और लोवर ऑर्डर को जल्दी पवेलियन वापस भेजना पिछले कुछ साल से भारतीय टीम की बड़ी कमज़ोरी रही है.

इस मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला. 131 पर 6 विकेट लेने के बाद आख़िरी के चार विकेटों पर लगभग 180 रन ख़र्च करना जताता है कि टीम को अनिल कुंबले जैसे बोलर की कितनी कमी खलती है जो पलक झपकते ही टेलएंडर्स को पवेलियन वापस भेज देते थे.

शायद जसप्रीत बुमराह के वापस आने पर इस कमज़ोरी पर लगाम लग सके. हैदराबाद के इस मैच में अगर आख़िरी ओवरों में मोहम्मद सिराज़ ने लगातार दो विकेट नहीं लिए होते तो शायद यै मैच न्यूज़ीलैंड के नाम होता.

वनडे का अगला वर्ल्ड कप पास आता जा रहा है. जहां शुभमन गिल ने पारी की शुरुआत के लिए अपना दावा मज़बूत किया है और भारत की एक परेशानी हल की है वहीं बोलिंग डिपार्मेंट में टीम इंडिया अभी भी पुराने रोग से लड़ रही है. भारतीय टीम को इसका इलाज चाहिए और वो भी तुरंत.

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