बॉर्डर पर देश की सुरक्षा करते हुए की पढ़ाई, होनहार BSF जवान टॉपर रैंक लाकर बन गया IAS officer

हौसलें अगर बुलंद हों तो मंजिलें आसान हो जाती हैं। कुछ कर गुजरने का जज्बा अगर हममें हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता। यूं तो असफलता पचाना किसी के भी लिए आसान नहीं होता लेकिन जब कोई बार-बार सफलता के एकदम करीब पहुंचकर असफल होता है तो तकलीफ ज्यादा होती है। लेकिन बो कहते है ना की शुभ काम में देरी जरूर होती है, लेकिन एक दिन ऐसा परिणाम दिखाती है की सब देखते रह जाये।

ऐसा ही कुछ हुआ लुधियाना के BSF जवान रहे हरप्रीत सिंह के साथ। यूपीएससी परीक्षा का सफर सभी के लिए अलग होता है। कोई जल्दी सफल हो जाता है तो किसी को बहुत सारे अटेम्प्ट्स देने पड़ते हैं। लेकिन हरप्रीत सिंह के साथ कुछ ज्यादा ही हो गया बह एक बार नहीं 5 बार फेल हुए, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। और आख़िरकार IAS अफसर बनाकर ही दम लिया। क्या है इनकी कहानी? आइये जानते है।

ऐसा था BSF जवान का IAS बनने का सफर!

हरप्रीत सिंह ने ‘साल 2016 में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ज्वाइन किया। यहां तक यूपीएससी के जरिए ही पहुंचा। फाॅर्स ज्वाइन करने के बाद, उनकी पोस्टिंग भारत और बांग्लादेश की सीमा पर हो गई। सीमा पर ड्यूटी अच्छी तो लगती लेकिन उनका सपना सपना आईएएस ऑफिसर बनना था।

इसलिए ड्यूटी के दौरान जब उन्हें टाइम मिलता था, वे यूपीएससी की तैयारी करते थे। इस पर हरप्रीत कहते है कि:-

“मेरा लक्ष्य मेरे दिमाग में साफ था। इसलिए कोई भी चीज मुझे इससे भटका नहीं पाई। ड्यूटी के अलावा अपना सारा समय मैंने अपने नोट्स पढ़ने में लगाया पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन मेरा वैकल्पिक विषय था। दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत, इन दो बातों को ही मैं अपनी सफलता का मूल मंत्र मानता हूं। मुझे लगता है कि हमें कभी अपने सपने का पीछा नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे ये कितना भी मुश्किल क्यों न हो। कोशिश करते रहो।”

सफलता के करीब पहुंचकर बार-बार हुए असफल!

हरप्रीत सिंह ने एक नहीं बल्कि पांच बार यूपीएससी परीक्षा दी। जिसमें केवल पहले अटेम्प्ट में वे प्री पास करके अटक गए लेकिन बाकी के दो अटेम्प्ट्स में साक्षात्कार राउंड तक पहुंचकर भी सेलेक्ट नहीं हुए। जाहिर है ऐसे में निराशा तो होती ही है लेकिन हरप्रीत ने हर हाल में हिम्मत बनाए रखी।

हरप्रीत के जीवन में बहुत कुछ हो रहा था लेकिन नौकरी भी साथ-साथ चल रही थी। उन्होंने कभी जॉब छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। इसी बीच साल 2017 में चौथे अटेम्पट में हरप्रीत ने सभी स्टेजेस पार कर लीं और उन्हें इंडियन ट्रेड सर्विस एलॉट हुई। तब उन्होंने तब बीएसएफ छोड़कर आईटीएस ज्वाइन कर लिया।

बीएसएफ का कमांडेंट पद छोड़ हरप्रीत ने ज्वॉइन तो कर लिया लेकिन इस रैंक से उनका मन नहीं भरा। नतीजा यह हुआ कि वे अभी भी तैयारी करते रहे। इस प्रकार नौकरियां बदलीं लेकिन हरप्रीत के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी। और आखिर में उन्होंने साल 2018 में एक बार फिर UPSC का एग्जाम दिया, और नतीजा आया ऑल इंडिया 19वीं रैंक। यानी हरप्रीत ने टॉप किया, और उनका सपना पूरा हो गया।

जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए

हरप्रीत दूसरे कैंडिडेट्स को सलाह देते हैं कि इस जर्नी के दौरान कभी भी सेल्फ कांफिडेंस न खोएं और लगे रहें। ये सभी के साथ होता है पर जीतता वही है जो इनसे घबराता नहीं है। सच्ची मेहनत का फल ईश्वर एक दिन जरूर देते हैं, क्यूंकि लेकिन प्रयास सच्चा है तो सफलता मिलती जरूर है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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