इंजीनियरिंग के बाद रिद्धिमा ने शुरू की यूपीएससी की तैयारी, दूसरे प्रयास में बनी IAS ऑफिसर

इंजीनियरिंग के बाद रिद्धिमा ने शुरू की यूपीएससी की तैयारी, दूसरे प्रयास में बनी IAS ऑफिसर

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती हैं। इसे पास करने में अभ्यर्थियों को कई साल लग जाते हैं। कई अभ्यर्थी तो लगातार असफलता मिलने पर हिम्मत हार जाते हैं और दूसरी राह अपना लेते है। लेकिन बहुत ही कम ऐसे होते है जो अपनी कमियों को सुधार कर आगे बढ़ते है और सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं। अपनी गलतियों से सीख कर आईएएस अधिकारी बनने वाले में एक नाम है रिद्धिमा श्रीवास्तव जिन्होंने अपने दूसरे अटेम्पट में 74वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी सीएसई परीक्षा टॉप किया था.

हालांकि रिद्धिमा अपने पहले के प्रयास में प्री स्टेज भी नहीं पास कर पाई थी. लेकिन अपने हौसले और हिम्मत के साथ उन्होंने अपनी गलती को सुधारा और साल 2019 में ना केवल परीक्षा पास की बल्कि अच्छी खासी रैंक हासिल कर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया।

कौन हैआईएएस रिद्धिमा श्रीवास्तव

रिद्धिमा चंडीगढ़ के सेक्टर-24 की रहने वाली है। उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई पंजाब के मानसा से पूरी की है। इसके बाद साल 2017 में उन्होंने इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद रिद्धिमा ने साल 2018 में यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया। बता दें रिद्धिमा के पिता राजी श्रीवास्तव रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं, जबकि मां राजी पी श्रीवास्तव भी आईएएस अधिकारी हैं जोकि पंजाब के सोशल डिपार्टमेंट में बतौर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत है।

एक साक्षात्कार में रिद्धिमा ने बताया कि वह अपने माता-पिता की उपलब्धियों से काफी प्रभावित थी। उन्होंने कहा कि “मैंने हमेशा उन्हें अपने क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले और मेहनती लोगों के रूप में देखा,लेकिन उन्होंने मुझे कभी भी यूपीएससी परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर या प्रभावित नहीं किया। यह पूरी तरह से मेरा निर्णय था।

इन दो गलतियों से मिली असफलता

रिद्धिमा अपने अनुभव साक्षा करते हुए बताती है कि वो पहली बार केवल 2 या 3 अंक से चूक गई थी। उन्होंने कहा कि मुझे इसका थोड़ा बुरा तो लगा लेकिन फिर मैंने जाना कि इसमें गलती मेरी थी। अगर मैं घर पर रहकर ये परीक्षा देती तो जरूर पास कर लेती . पहली बार मैनें OMR सीट को लास्ट में भरना शुरू किया था और दूसरा समय का निर्धारण समझ नहीं पाई। अगर मैं घर पर तैयारी करती तो एग्जाम में बैठने का डर खत्म हो जाता और सोचती कि मैं एग्जाम हॉल में हूं, बिल्कुल वहीं समय और वही अनुभव करती जो परीक्षा के दौरान होता है।

सोशल मीडिया से दूर रहकर हासिल की 74वीं रैंक

पहले प्रयास की असफलता के बाद रिद्धिमा पूरी तरह अपने लक्ष्य की ओर जुट गई थी। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया यूज करना बंद कर दिया था। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया एक रूकावट बना हुआ था। अगर किसी का मैसेज आ जाए तो काफी समय मोबाइल पर गुजर जाता था. इसलिए मैंने उसे अपने से दूर कर दिया था। परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यार्थियों के लिए रिद्धिमा करती है कि अगर हम परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो हमें जल्दी से उठना चाहिए और माइंड फ्रेश रहने के लिए बीच-बीच में ब्रेक भी लेना चाहिए। भले ही रिद्धिमा सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं थी लेकिन उन्होंने इस दौरान अपने दोस्तों से बात-चीत करना नहीं छोड़ा और दोस्तों से बात करके वो हमेशा फ्रेश महसूस करती थी।

परीक्षा की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लिए रिद्धिमा कहती है कि तैयारी के लिए एक टाइम टेबल बनाएं और उसका कड़ाई से पालन करें. रिद्धिमा ने भी तैयार के दौरान अपना एक सेट टाइमटेबल बना रखा था जिसमें उनके उठने से लेकर विषयों पर ध्यान देने तक की बातें लिखी हुई थी।

अपने मुकाम तक पहुंचने के लिए रिद्धिमा रोज सुबह जल्दी उठकर अखबार पढ़ती थी, फिर अपनी रोज की पढ़ाई का कुछ समय रिवीजन को देती थी ताकि एग्जाम आने पर कुछ विषय छूट ना जाएं. वहीं मेन्स के लिए वे खुद उत्तर लिखर खुद ही चेक करती थी और फिर उसे टॉपर्स के आंसर्स से मिलान कर अपनी गलतियों को सुधारती थी। रिद्धिमा कहती है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए अनुशासन, कड़ी मेहनत और सही दिशा में प्रयास जरूरी है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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