IAS ऑफिसर रामवीर सिंह, आज भी ड्यूटी के बाद पिता के साथ खेतों पर करते हैं काम, जानिए क्यों?

दोस्तों, आप सभी ने सरकारी गाड़ियों में घूमते हुए IAS ऑफिसर्स को देखा होगा या फिर उन्हें डयूटी पर तैनात अथवा किसी ख़ास मौके पर उनका सम्मान किया जाता हुआ देखा होगा। उन्हें देखकर अक्सर लोगों की नज़र कुछ पल को ठहर जाती हैं और ऐसा हो भी क्यों नहीं, आख़िर एक IAS ऑफ़सर का रुतबा ही ऐसा होता है।

परन्तु आप किसी ऐसे IAS ऑफीसर के बारे में बता सकते हैं, जो अपनी सरकारी ड्यूटी के साथ-साथ रोज़ाना खेतों में भी खून-पसीना बहाते हुए काम करता हो। यदि नहीं देखा तो आपको संगरूर में ज़िला उपायुक्त की पोस्ट पर तैनात रामवीर सिंह के बारे में अवश्य जान लेना चाहिए।

किसान परिवार में हुआ था IAS Ramvir Singh का जन्म

रामवीर सिंह का जन्म हरियाणा के झज्जर में एक किसान परिवार में हुआ था। हालांकि उनके पिता जी पहले गवर्नमेंट सर्वेंट थे, परन्तु ड्यूटी से रिटायर होने के पश्चात वे खेती-बाड़ी का काम ही सम्भालने लगे। रामवीर जब छोटे थे तभी से अपने परिवार के साथ खेतीबाड़ी तथा पशुओं के कामकाज में हाथ बंटाते थे।

करते हैं खेतों के काम, सरकारी आवास में भी पालते हैं गाय

अभी कुछ समय पहले जब IAS Ramvir Singh को चेहरे पर सूती कपड़ा बाँधकर तथा हाथ में दाती लेकर खेतों पर गेहूँ काटते हुए देखा गया तो लोगों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। इतना बड़ा आदमी और यह छोटे मोटे काम कर रहा है! यह वाकई में चौकानें वाली बात थी, लेकिन बिल्कुल सच।

इतना ही नहीं डीसी साहब रामवीर सिंह ने उनके सरकारी निवास पर गायें भी पाल रखी है, जिनसे वे रोज़ाना सवेरे अपने हाथों से दूध निकाला करते हैं। IAS रामवीर सिंह का मानते हैं कि व्यक्ति चाहे जहाँ से भी आया हो, उसे अपना पारम्परिक काम कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वही उसका आधार होता है।

एक किसान के साधारण बेटे से तय किया IAS बनने तक का सफर

रामवीर सिंह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने मेहनत कर अपने दम पर ही एक साधारण लड़के से IAS बनने की यात्रा तय की। परन्तु अभी भी वे ड्यूटी से समय निकालकर अपने पिताजी की मदद के लिए बेझिझक खेतों में चले जाते हैं। वे मिट्टी से जुड़े हैं तथा खेतों में समय व्यतीत करना उन्हें पसंद है। इस प्रकार से वे एक सरकारी अफसर होने के साथ-साथ एक अच्छा बेटा होने का फ़र्ज़ भी बखूबी निभा रहे हैं।

उन्होंने दिल्ली के जेएनयू से राजनीति शास्त्र में पहले बीए और फिर एमए की डिग्री प्राप्त की। फिर सिक्योरिटी रिलेशंस में एमफिल का डिग्री भी हासिल की। इसके साथ ही वे UPSC परीक्षा की तैयारियों में भी जुट गए थे। फिर अपने कड़े परिश्रम से उन्होंने 2009 बैच का IAS ऑफिसर बनकर सारे परिवार को गौरवान्वित किया। IAS बनने से पूर्व वे बतौर IRS अधिकारी भी काम कर चुके हैं। फिर इसके बाद 31 अगस्त वर्ष 2009 में उन्हें ड्यूटी हेतु नियुक्त किया गया।

नई पीढ़ी को परिवार की परंपरा से जोड़े रखना चाहते हैं

रामवीर सिंह ने बताते हैं कि दिन के वक़्त वे ऑफिस के काम में बिजी रहते हैं, फिर अनाज की मंडी में गेहूँ की खरीद चल रही होती है, उसका जायजा लेने निकल जाते हैं। फिर शाम के समय घर वापस आकर वे सरकारी रिहायश परिसर पर स्थित खेत में काम देखने चले जाते हैं। वहाँ पर गेहूँ की फ़सल के साथ, सब्जियाँ और फल भी उगाए जाते हैं। उन्हीं की कांट-छांट और सार सम्भाल करने के काम में लग जाते हैं।

IAS Ramvir Singh यह काम इसी उद्देश्य से करते हैं कि नई पीढ़ी सदैव अपने परिवार की परंपरा से जुड़ी रहे। खेती का काम करके उन्हें मानसिक सुकून तो मिलता ही है, साथ ही उनको इस बात की भी ख़ुशी होती है कि वह अपने बच्चों को अपनी मिट्टी से जोड़ने में कामयाब रहे हैं। उनका मानना है कि यह पारम्परिक कार्य करके ही बच्चे जान पाते हैं वे किस परिवार से ताल्लुक रखते हैं और हमारी परंपरा जीवित रहती है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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