पान की दुकान चलाकर पढ़ाया बेटे को और बेटा बना IAS, किया अपने पिता का सपना पूरा

पान की दुकान चलाकर पढ़ाया बेटे को और बेटा बना IAS, किया अपने पिता का सपना पूरा

आज हम आपको एक ऐसी खबर बताने वाले हैं, जिसमें किसी के सपने पूरे होने की बात कही गई है। एक पान वाले ने अपने बेटे को आईएएस ऑफिसर बना करके अपनी सफलता की कहानी खुद से लिखी है। लखनऊ के गणेशगंज इलाके के रहने वाले शिव कुमार गुप्ता के बेटे ईश्वर कुमार ने आईएएस ऑफिसर बन करके अपने माता-पिता का नाम रोशन कर दिया है। ईश्वर कुमार के पिता बहुत ही गरीब है, उनका पूरा परिवार लखनऊ में एक छोटी सी घर में रहता है। लेकिन ईश्वर कुमार ने अपने माता पिता के साथ अपने पूरे परिवार और मोहल्ले का नाम रोशन किया है।

ईश्वर कुमार के पिता एक छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं, जिससे पूरे परिवार का पालन पोषण होता है। इस दुकान की अवस्था भी बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। शिव कुमार की दो बेटियां और दो बेटे हैं बड़ा बेटा ईश्वर अब IAS अधिकारी बन चुका है। सिविल सेवा में उसने 187वी रैंक हासिल किया है। जिसके कारण से आसपास और पूरे परिवार के लोगों से बधाई देने का तांता लगा हुआ है।

ईश्वर कुमार के पिता शिव कुमार के मुताबिक उनका बेटा अपने नानी घर में रह करके ही पढ़ाई करता था। शुरुआत से ही पढ़ाई में काफी बुद्धिमान होने के चलते उसे हाई स्कूल के इम्तिहान में 18 वीं रैंक हासिल हुआ था। वह अपनी पढ़ाई लखनऊ में रह करके पूरा करता था। ईश्वर के पिता ने स्वयं एक छोटी सी पान की दुकान से पूरे परिवार का पालन पोषण और बच्चों की पढ़ाई करवाई है। उनके पिता ने उन्हें इंजीनियर बनाने के लिए एजुकेशन लोन तक लिया था। वह ईश्वर कुमार की मां कुसुम देवी के मुताबिक बताया गया कि जब उनका बेटा आईएएस अधिकारी बन गया है तो उनकी माता खाना बनाना छोड़कर मंदिर में प्रार्थना के लिए चली गई।

ईश्वर की मां का कहना है कि पढ़ाई पूर्ण हो जाने के बाद उन्हें लखनऊ से गाजियाबाद में इंजरिंग के लिए भेजा गया। इसके बाद उन्हें सेल में नौकरी मिल गई थी। परिवार वालों ने यह तय कर लिया था कि नौकरी करने के बाद उनका विवाह कर दिया जायेगा। बहन अनुराधा का कहना है कि वह शुरुआत से ही काफी शर्मीले स्वभाव रहे हैं, उन्हें पढ़ाई करने के साथ क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेबल टेनिस इत्यादि खेल काफी पसंद है। वह बहुत पहले से ही अपनी पढ़ाई को काफी संजीदगी से करते आ रहे हैं।

ईश्वर ने ठान लिया था कि उन्हें आईएएस ऑफिसर ही बनना है, इसलिए वह अपनी इंजीनियरिंग खत्म होने के बाद भी लगातार पढ़ाई करते रहते थे। फिर उन्होंने अपने चौथे प्रयास में आखिरकार आईएएस अधिकारी बन कर अपना और अपने माता पिता का नाम रौशन कर दिया। ईश्वर कुमार का कहना है कि वह अपनी नौकरी के साथ पढ़ाई भी किया करते थे। वह रोजाना 4 से 5 घंटे पढ़ाई करते थे। वहीं उन्होंने पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और डिजिटल मटेरियल का भी इस्तेमाल बखूबी तरीके से किया था। छुट्टी के दिन वह 8 से 9 घंटे पढ़ाई किया करते थे। उन्होंने सिविल सर्विस के लिए किसी भी तरह की कोचिंग ज्वाइन नहीं की थी।

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