दादा-पोती की जोड़ी ने किया कमाल, दादा के सहयोग से पहले प्रयास में 23 साल की उम्र में निशा ग्रेवाल बन गईं IAS

दादा-पोती की जोड़ी ने किया कमाल, दादा के सहयोग से पहले प्रयास में 23 साल की उम्र में निशा ग्रेवाल बन गईं IAS

जिंदगी के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए हर व्यक्ति को किसी न किसी का साथ और सपोर्ट चाहिए होता है, ताकि वह मुश्किलों से घबराए बिना अपने सपने को पूरा कर सके। हालांकि हर किसी को बेहतर साथी और सपोर्ट नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को अकेले ही संघर्ष करना पड़ता है।

लेकिन आज हम आपको दादा-पोती की एक ऐसी दमदार जोड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ समाज की रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ा बल्कि एक दूसरे की हिम्मत और ताकत भी बने। जी हाँ… हरियाणा की एक लड़की ने अपने दादा जी के सपोर्ट पर न सिर्फ यूपीएससी की परीक्षा दी, बल्कि उसमें सफलता भी हासिल करने में भी कामयाब हुई।

आ गया है बदलाव का समय

हमारे समाज में पुराने समय से ही महिलाओं को ज्यादा पढ़ने लिखने और बाहर जाकर नौकरी करने की आजादी नहीं दी जाती थी, हालांकि बदलते समय के साथ आज लोगों की सोच में काफी सकारात्मक बदलाव आ चुका है।लेकिन इसके बावजूद भी देश के कुछ राज्य ऐसे हैं, जहाँ आज भी महिलाओं के पैरों में परंपरा के नाम पर बंदिशों की बेड़ियाँ डाल दी जाती है।

इन बंदिशनुमा राज्यों में हरियाणा का नाम सबसे ऊपर आता है, जहाँ आज भी कई गांवों में बहु और बेटियों को घर से बाहर निकल कर पढ़ने और नौकरी करने की इजाजत नहीं है।ऐसे में हरियाणा के एक छोटे से गाँव से ताल्लुक रखने वाली निशा ग्रेवाल ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोगों को नींद से जागाने का काम किया है।

दादा-पोती की जोड़ी ने कर दिखाया कमाल

निशा ग्रेवाल के पिता बिजली विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उनके दादा जी रामफल पूर्व में गणित के टीचर रह चुके हैं। ऐसे में जब निशा ने कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया, तो उनके दादा जी ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया।

यूं तो निशा के पूरे परिवार ने उनके इस फैसले में उनका साथ दिया, लेकिन निशा अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा जी को देती हैं। निशा के दादा जी ने उन्हें परीक्षा की तैयारी करने में काफी मदद की, इसके साथ ही उन्होंने निशा को गणित के सवाल हल करने भी सीखाए।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने के दौरान निशा के दादा जी उनके शिक्षक बन जाते थे, जो निशा के साथ बैठकर घंटों किताब पढ़ते और उसे सारे टॉपिक बहुत ही आराम से समझाते थे। निशा के दादा जी उसे रोजाना 8 से 9 घंटे क्लास देते थे और निशा को इंटरव्यू के लिए भी तैयार करते थे।

पहले ही कोशिश में प्राप्त की सफलता

निशा ग्रेवाल ने अपने दादा जी की मदद से न सिर्फ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की, बल्कि दिन रात मेहनत करके पहली कोशिश में ही सफलता भी हासिल कर ली। निशा ने साल 2020 की यूपीएससी परीक्षा में 51वां रैंक प्राप्त किया है, जिसके बाद उनके घर में जश्न का माहौल है।

दादा और पोती की इस जोड़ी ने कड़ी मेहनत और नई सोच के दम पर समाज को यह बताने की कोशिश की है कि बदलते समय के साथ लोगों को रूढ़िवादी सोच भी बदल देनी चाहि, क्योंकि आज लड़कियाँ हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं और कामयाबी भी हासिल कर रही हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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