3 बार असफल होने पर भी नहीं टूटा हौसला, यूपीएससी परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS अधिकारी

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को पास करने के लिए काफी धैर्य और लगन की जरूरत पड़ती है. आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं. उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और आखिर कर अपने सपनों को पूरा किया. इस आईएएस अधिकारी का नाम मीरा के है.

वो ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो तैयारी के दौरान असफलता हासिल करने के बाद निराश होकर तैयारी करना छोड़ देते हैं. आइए जानते हैं मीरा ने कैसे देश की सबसे कठिन परीक्षा को अपने धैर्य और लगन की बदौलत ना सिर्फ पास किया बल्कि अच्छी खासी रैंक भी हासिल की.

कौन हैं मीरा के.

मीरा केरल के तृश्शूर जिले की रहने वाली हैं. एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखने वाली मीरा के पिता का नाम के. रामदास हैं. जिनकी खुदकी कंस्ट्रक्शन कंपनी है. वहीं, उनकी मां का नाम के. राधिका है. जो एक स्कूल में अध्यापिका हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई तृश्शूर से ही हुई. उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में अवसत अंक हासिल की. इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की.

एक साक्षात्कार में मीरा ने बताया था कि उनका इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद कैंपस प्लेसमेंट हो गया था. कुछ समय तक नौकरी करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का विचार किया. वो आईएएस अधिकारी बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी. इसलिए उन्होंने परिवार से बातचीत की और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने की बात कही. परिवार से अनुमति मिलने के बाद उन्होंने तैयारी शुरू कर दी.

आसान नहीं था IAS अधिकारी बनने का सफर

मीरा का यूपीएससी परीक्षा का सफर आसान नहीं था. सिलेबस को अच्छी तरह से समझने के बाद उन्होंने अपनी तैयारी तो शुरू कर दी थी लेकिन मंजिल अभी बहुत दूर थी. मीरा ने जब पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी तो वो प्रीलिम्स की परीक्षा भी पास नहीं कर पाई.

दूसरे और तीसरे प्रयास में भी उन्हें असफलता का ही सामना करना पड़ा. मीरा बताती हैं कि यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान निरंतरता और धैर्य बहुत जरूरी होता है. लेकिन लगातार असफलता हासिल होने पर उन्हें लगा कि ये करियर शायद उनके लिए नहीं है. लेकिन उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा.

चौथे प्रयास में बनीं IAS अधिकारी

अपने सपनों को पूरा करने के लिए मीरा हिम्मत नहीं हारी. लगातार प्रयास के बाद साल 2020 में उन्होंने ना सिर्फ यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि इस परीक्षा में टॉपर भी रहीं. उन्होंने 6वीं रैंक हासिल कर बता दिया कि मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती हैं.

उनकी इस सफलता से मीरा के माता पिता ही नहीं बल्कि पूरे जिले के लोग गर्व महसूस करते हैं. अपनी तैयारी के बारे में युवाओं को प्रेरित करते हुए मीरा कहती हैं कि उन्होंने एनसीईआरटी की किताबें अच्छी तरह पढ़ी थी. इसके अलावा प्रीलिम्स और मेंस के रिवीजन के लिए छोटे-छोटे नोट्स भी बनाए थे. परीक्षा के दौरान इन नोट्स से काफी मदद मिल सकी. वो कहती हैं कि सकारात्मक सोच के साथ किसी काम को किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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