मजदूरी करते थे माता-पिता, कठिन मेहनत और संघर्षों को पार कर UPSC में हासिल की तीसरी रैंक

मजदूरी करते थे माता-पिता, कठिन मेहनत और संघर्षों को पार कर UPSC में हासिल की तीसरी रैंक

अगर इंसान के मन में कुछ कर गुजरने का मजबूत इरादा है तो वह अपने जीवन में कामयाबी की बुलंदियों को जरूर हासिल करता है। कभी ना हार मानने का जज्बा नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है। इस संसार में हर कोई व्यक्ति सपना देखता है कि वह अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति बने, परंतु ज्यादातर लोग अपने जीवन की परिस्थितियों के आगे हार मान जाते हैं।

वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जीवन की हर कठिन परिस्थिति को पार करते हुए कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसकी वजह से दुनिया भर में इनका नाम हो जाता है। आज हम आपको इसी तरह के एक शख्स के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिसकी जिद्द और उनके हौसले के आगे सभी प्रकार की चुनौतियों के पहाड़ भी बौने हो गए।

हम आपको जिस शख्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं उनका नाम गोपाल कृष्णा रोनांकी है। इन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष पूर्ण जीवन को पार करते हुए ना सिर्फ सिविल सर्विस एग्जाम में सफलता हासिल की है बल्कि पूरे भारत में तीसरा रैंक इन्होंने हासिल किया।

एक गरीब किसान के बेटे हैं गोपाल कृष्णा रोनांकी

गोपाल कृष्णा रोनांकी के माता-पिता अप्पाराव और रुक्मिनम्मा श्रीकाकुलम शहर से 70 किलोमीटर दूर पलासा मंडल के परसम्बा गांव में किसान मजदूर थे। इस छोटे से गांव के लड़के ने सफलता का स्वाद चखने के लिए अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। गोपाल कृष्ण रोनांकी ने स्थानीय सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी।

गरीबी की वजह से गोपाल को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ग्रेजुएशन करना पड़ा, इतना ही नहीं बल्कि परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए इन्होंने श्रीकाकुलम में एक स्कूल में पढ़ाना भी शुरू किया था। आपको बता दें कि एक शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए गोपाल ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी।

आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत बाधाएं आईं

गोपाल कृष्णा को अपने जीवन में बहुत सी मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा था, इतना ही नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण भी इनको बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा। गांव के दलित परिवार के विवाह में शामिल होने की वजह से उनके माता-पिता का सामाजिक रूप से 25 वर्ष तक बहिष्कार किया गया था, इसकी वजह से उनके जीवन में आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत सी बाधाएं उत्पन्न हुई थीं।

कोचिंग सेंटर में नहीं मिला दाखिला

जब गोपाल कृष्ण अपने सिविल की तैयारी कर रहे थे तो इनके पास इतना समय नहीं निकल पाता था कि वह अपनी तैयारी ठीक प्रकार से कर सकें, जिसकी वजह से इन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और हैदराबाद आ गए थे।

हैदराबाद में गोपाल ने सिविल की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर जॉइन करना चाहा परंतु पिछड़े इलाके से आने के कारण इनको किसी भी कोचिंग सेंटर ने दाखिला नहीं दिया था, ऐसी स्थिति में गोपाल के पास सेल्फ स्टडी के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था, इतनी कठिनाई झेलने के बावजूद भी इन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी। इन्होंने अपनी कमजोरी को मजबूत बनाने की कोशिश की। इन्होंने खुद जमकर मेहनत की। उन्होंने कोई क्लासरूम या कोचिंग अटेंड नहीं किया।

कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत गोपाल ने सिविल सर्विस एग्जाम में लहराया कामयाबी का परचम

आपको बता दें कि गोपाल ने वर्ष 2015 में अपना पहला यूपीएससी एटेम्पट दिया था लेकिन इसमें वह प्रीलिम्स क्लियर नहीं कर पाए थे, इसके बाद इन्होंने और बेहतर तैयारी की। साल 2016 की कोशिश में यह प्रीलिम्स क्लियर कर गए। गोपाल ने मेंस के लिए तेलुगू लिटरेचर को अपना ऑप्शन सब्जेक्ट चुना था, इनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसकी वजह से उन्हें कोई भी कोचिंग नहीं ली थी। इनका बताना है कि कई दोस्तों द्वारा हतोत्साहित किया गया।

उनके दोस्त कहा करते थे कि तेलुगू मीडियम में पढ़ाई करके यूपीएससी सिविल सर्विसेज को क्रैक करना बेहद मुश्किल है लेकिन गोपाल ने अपने दोस्तों को गलत साबित कर दिया और ट्रांसलेटर की सहायता से इन्होंने अपना यूपीएससी इंटरव्यू भी तेलुगु भाषा में ही दिया था। मेहनत और लगन का फल इनको मिला और वह आज एक सफल आईएएस अफसर बन गए।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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