माँ-बाप के गुजरने के बाद 10 साल का ये मासूम बच्चा खुद खेती कर रखता है अपना खयाल

माँ-बाप के गुजरने के बाद 10 साल का ये मासूम बच्चा खुद खेती कर रखता है अपना खयाल

अक्सर कहा जाता है, कि अगर इंसान के हौंसले बुलंद हो तो वह आसमान की बुलंदी को भी छू सकता है। यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जंहा एक छोटे से मासूम बच्चे की कहानी है। यह 10 साल का बच्चा आज लोगों के लिए एक उदाहरण बन चुका है। जी हां, इस बच्चे की कहानी सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे और बच्चे की हिम्मत की दात देंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों के अनुसार, 10 साल के डांग वान खुयेन के हौसले और आत्‍मसम्‍मान के आगे सब छोटे जान पड़ते हैं। जिस मासूम उम्र में हम खुद से खाना नहीं पका पाते, यह बच्‍चा अकेले खुद की देखभाल करता है। जिस मासूम उम्र में हम खुद के लिए कुछ भी नहीं कर पाते वहीं यह छोटा बच्चा अकेले खुद की देखभाल कर रहा है।

मीडिया खबरों के अनुसार, इस बच्चे के मां-बाप नहीं है इस वजह से यह अकेले रहता है। खास बात यह खेती करता है साथ ही सब्जियां उगाता है और खुद उन्हें पकाकर खाता भी है।

खबर विस्तार

मीडिया खबरों के अनुसार, यह छोटा सा बच्चा वियतनाम के एक सूदूर गांव में रहता है। जिसकी जिंदगी कभी आसान नहीं रही, बताया जाता है- कि मासूम उम्र में ही मां छोड़कर चली गई तब बह अपनी दादी के पास रहने के लिए चला गया। वंही पिता काम की तलाश में दूर शहर चले गए।

बच्चे की जिंदगी में हालात और भी बुरे तब हो गए, जब काम करते वक्‍त एक दुर्घटना में पिता की मौत हो गई। और दादी माँ ने मुंह मोड़ते हुए दूसरी शादी कर ली और दूसरे गांव चली गईं। यानी अब डांग अपनी जिंदगी में अकेला हो चूका था, बिल्‍कुल अकेला।

गोद लेने आए लोग तो साथ जाने से किया इनकार

अब डांग गांव में अपने घर में अकेले रहता है। रिपोर्ट के अुनसार, पिता शहर से पैसे भेजते थे, जिससे परिवार चलता था। कपड़े खरीदे जाते थे। दादी मां खाना पकाकर ख‍िलाती थी। लेकिन माँ-बाप के न रहने पर डांग की जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

ऐसे में डांग ने अपने जीवन के संघर्ष से हार नहीं मानी और जीवन यापन के लिए खुद जिम्मेदारी उठाने की ठानी। वियतनामी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डांग को हर दिन घर से सटे खेतों में काम करने हुए देखा जा सकता है।

लेकिन यंहा ध्यान देने बाली बात, बच्चे का हौसला देखने की है। क्यूंकि जब दूसरे परिवार ने डांग को गोद लेने की इच्छा जताई, तब उसने ‘मैं अपना खयाल खुद रख सकता हूँ’ कहते हुए साथ जाने से मना कर दिया।

‘मैं अपना खयाल खुद रख सकता हूं’

जिस दिन इस मासूम को अपने पिता की मौत की खबर मिली थी वह उसी दिन टूट गया था। वहीं एक स्थानीय शिक्षक ने गांव वालों की मदद से कुछ पैसे जमा करे और डांग के पिता की लाश को शहर से गांव लाया गया।

जिसके बाद उनकार अंतिम संस्कार किया गया। डांग की दादी ने भी उसके बारे में कोई खबर नहीं ली जिसके बाद उसी शिक्षक ने डांग वान खुयेन के बारे में स्थानीय प्रशासन को सूचना दी। उसे फॉस्टर होम ले जाने की बात भी की गई,लेकिन डांग ने इसके लिए भी इंकार कर दिया और कहा मैं अपना ख्याल खुद रख सकता हूं।

रोजाना जाता है स्कूल

डांग अभी दस साल का है और सबसे खास बात इतनी छोटी सी उम्र होने के वाबजूद वह हर काम को ध्यान में रखकर चलता है इसी वजह से उसने अपना स्कूल एक भी दिन नहीं छोड़ा। पहले सुबह वह साइकिल से स्कूल जाता है। स्कूल से वापस आने के बाद डांग अपना सारा काम और खेतों में भी मेहनत करता है।

पड़ोसियों की मदद से करता है रोजाना के काम

डांग को उसके पड़ोसी अन्न देते हैं,जबकि वह अपने आप खेती करके सब्जी उगाता है। जब कोई उसे साथ रहने को कहता है तो डांग जवाब देता है कि वह अकेले रहना चाहता है और वह अपना खयाल रख सकता है। आपको बता दे, डांग का घर कोई पक्के तरीके से नहीं बना हुआ है वह लकड़ी के बने हुए घर में रहता है जिसमें रात के समय तेज हवाएं आती हैं।

कहानी हुई सोशल मीडिया पर वायरल

स्थानीय श‍िक्षक जिन्होंने डांग की मदद की, उन्ही ने जब उसकी कहानी फेसबुक पर शेयर की तब बह देखते ही देखते वायरल हो गई। जिसके बाद से यह मामला स्‍थानीय मीडिया में चर्चा में है। देश और दुनिया के लोग डांग के हिम्‍मत को सलाम कर रहे हैं। कई लोगों ने उसे गोद लेने की पेशकश की है, जबकि बहुतों ने दूसरे ढंग से उसकी मदद करने की इच्‍छा जताई है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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