सोलर आटा चक्की के बिजनेस में लाखों की कमाई हो रही, बिजली बिल की झंझट भी नहीं रहती हैं

इस दुनिया में सबसे अच्छा और हल्का खाना गेंहू की रोटी और हरी सब्ज़ी है। पूरे भारत में रोटी हर घर में खाई जाती है। यह रोटी गेंहू के बारीक पिसे आते की होती है। भारतीय घरों की रसोई बिना आंटे के पूरी नहीं होती है। वैसे तो रोटी मैदे और अन्न चीज़ो से भी बनती है, परन्तु गेंहू के आंटे की रोटी की पाचक और पौष्टिक होती है।

आटा हमें गेंहू को बारीक पीसने से हासिल होता है, जिसके लिए गेंहू को बोरी या डिब्बे में लेकर आंटा चक्की जाना पढता है। वहां पर 4-5 रुपये प्रति किलो की दर से चक्की वाला आपका गेंहू पीसता है। आंटा चक्की के व्यवसाय में भी लोग अच्छा ख़ासा पैसा कमा लेते हैं। कई लोगो के घर आंटा चक्की लगाकर ही चल रहे हैं। यह लोग अपने घर पर भी लगा लेते हैं और घर से ही आंटा पीसकर पैसे कमा लेते हैं।

हमारे देश में आटा चक्की का कारोबार बहुत मुनाफा देने वाला है। यह एक ऐसा व्यवसाय हैं, जो कभी रुक नहीं सकता है। किसी भी प्रकार की मंदी या आपदा का इस पर कोई असर नहीं पढता है। महामारी के आपदा काल में भी जब सभी दुकाने बंद पढ़ गई थी, तब आंटा चक्की वालों को छूट दी गई थी। बिना रोटी के तो घर से लेकर देश भी नहीं चल सकता।

भारत के हर गाँव से लेकर बड़े शहरों और मेट्रो सिटीज में आटा चक्कियाँ देखने को मिल जाएँगी। इस चक्कियों से लोग बहुत पैसा कमा रहे है। परन्तु इनसे बिजली बिल भी बहुत आता है। ऐसे में आप एक सोलर आटा चक्की का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इस सोलर आटा चक्की का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। इस तरह की चक्की को इस्तेमाल करने पर कोई बिजली बिल नहीं देना पड़ेगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है की सोलर आटा चक्की लगाने से आपको हर महीने लाखों रुपए की कमाई होगी और बिजली बिल भी नहीं देना होगा। यह चक्की सौर ऊर्जा से प्राप्त होने वाली बिजली से चलती है, इसकी वजह से इस कारोबाबिज़नेस में अच्छा खासा मुनाफा होता है।

मीडिया और सोशल मीडिया में देखा गया की उत्तर प्रदेश के जलालाबाद जिले के लश्करपुर गाँव के निवासी मोहन चौहान  ने बीते दिनों सोलर आटा चक्की का बिजनेस लगाया है, जिसमें वह बहुत कम लागत में अच्छी कमाई कर रहे हैं। सोलर आटा चक्की लगाने से आपको बिजली या जनरेटर की भी जरूरत नहीं होती है। इसके लिए कोई ईंधन भी नहीं लेना पढ़ता है।

उत्तर प्रदेश के जलालाबाद में Solar Atta chakki mill चलाने वाले मोहन ने अपने बिजनेस को सोलर सिस्टम के जरिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर बना लिया, जिससे उन्हें हर महीने हजारों की बचत हो रही है।

रिपोर्ट्स में बताया गया की मोहन चौहान ने अपने शहर के एक कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के बाद नौकरी की तलाश की, लेकिन उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल सकी। फिर मोहन ने बिजनेस शुरू करने का मन बनाया। जिसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर बहुत रिसर्च की। जिसके बाद उन्हें सोलर आटा चक्की शुरू करने प्लान मिला।

सौर ऊर्जा आटा चक्की लगाने के लिए मोहन चौहान ने अपने घर की छत पर 22.5 किलोवाट वाले सोलर पैनल लगवाए, इसकी टोटल लागत करीब 7.5 लाख रुपए के आसपास आई थी। इसमें सोलर पैनल के अलावा स्ट्रक्चर, कनेक्टर, वायर, VFD और आटा चक्की का की लागत शामिल है। इतने पैसे में यह बिज़नेस खड़ा हो गया।

बताया गया की 22.5 किलोवाट वाले सोलर पैनल से रोज़ कम से कम 120 यूनिट बिजली तैयार हो जाती है, इसकी सहायता से 24 इंच वाली आटा चक्की को आसानी से चलाया जा सकता है। वही एक नार्मल आटा मिल को तैयार करने में करीब 3 लाख रुपए तक का खर्च आता है, जबकि हर साल इस चक्की को चलने में करीब 3 लाख रुपए बिजली के बिल का खर्च आ जाता है।’

वहीँ मोहन चौहान ने सीधे 7 लाख रुपए खर्च कर सोलर आंटा चक्की लगा ली। अब उन्हें हर बार का बिजली बिल सच जा रहा है। इस आटा चक्की के रखरखाव और मेंटनेंस की भी कोई झंझट नहीं रहती है।

मोहन चौहान अपनी इस सोलर आटा चक्की के बिजनेस से 4 महीने में 1.2 लाख रुपए कमा चुके है। मतलब 5-6 साल में चक्की की लागत के पोरे पैसे निकल जायेंगे और भी जो कमाई होगी, वह पूरी उन्हें बच जाएगी। उन्हें बिजली बिल भी नहीं देना होगा।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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