पेट्रोल-डीजल की चिंता छोड़िए, अपनी साइकिल को बनाइए Solar Cycle और बिना पैडल मारे ही स्कूल, कॉलेज या दफ्तर पहुंचिए

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकारें भी इलेक्ट्रिक व्हीकल पर सब्सिडी दे रही हैं. यह पर्यावरण के अनुकूल तो है, लेकिन इसे चार्ज करने के लिए बिजली चाहिए होती है और इसमें कार्बन उत्सर्जन भी होता है. तो क्या कोई ऐसा भी वाहन है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन न होता हो?

बिल्कुल है. सोलर साइकिल(Solar Cycle). यह किसी कंपनी या ब्रांड का नहीं है, ​बल्कि इसे तो 12वीं के एक छात्र ने तैयार किया है. वड़ोदरा के रहने वाले फिशरीज डिपार्टमेंट से रिटायर्ड प्रद्युम्न शाह के बेटे नील शाह ने अपनी एक साइकिल को ही सोलर साइकिल बना डाला है. नील शाह की तरह आप भी अपनी साइकिल को ऐसा बना सकते हैं.

एक पैसे का खर्च नहीं

ई-स्कूटर की तरह चलने वाली इस साइकिल में सोलर पैनल लगा है, जिसके जरिये इसकी बैटरी चार्ज होती है. इसमें आपका एक पैसा खर्च नहीं होता है और न ही इसे चार्ज करने में कार्बन उत्सर्जन होता है. इस साइकिल में लगी बैटरी सूरज की रोशनी और पैडल के जरिए चार्ज होती है.

नील को बचपन से ही विज्ञान में काफी दिलचस्पी थी. उन्होंने स्कूली दिनों में विज्ञान के अलग-अलग मॉडल्स के बारे में पढ़ा. उन्होंने जाना कि सारे आविष्कारों के पीछे विज्ञान है. स्कूल में होने वाली प्रतियोगिताओं में वे कुछ न कुछ बनाते रहे. एक बार 7वीं में उन्होंने प्लास्टिक बोतल, कार्डबोर्ड और मोटर से एक हेलीकॉप्टर भी बनाया था जो एक फुट ऊपर उड़ सकता था. बाद में उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स बनाए.

कैसे बनाएं सोलर साइकिल?

नील के शिक्षक संतोष कौशिक ने बेटर इंडिया को बताया कि उन्होंने नील को सोलर पैनल से चलनेवाली एक साइकिल तैयार करने का कॉन्सेप्ट दिया था. नील ने महज 1 महीने के भीतर इसे तैयार कर दिया. नील ने सोलर साइकिल तैयार करने के लिए तीन चीजों पर काम शुरू किया. पहला- स्‍कूटर का मॉडल, दूसरा- बैटरी का काम और तीसरा- सोलर पैनल. उनके पिता ने 300 रुपये में एक कबाड़वाले से साइकिल खरीद कर दी. नील को इसमें 12 हजार रुपये खर्च करने पड़े और सोलर साइकिल तैयार हो गई.

नील ने बताया कि इस साइकिल में उन्होंने 10 वॉट की सोलर प्लेट लगाई है, जिसकी बदौलत साइकिल 10 से 15 किलोमीटर का सफर आराम से तय कर लेती है. साइकिल पर लगे सोलर पैनल की मदद से इसकी बैटरी चार्ज होती है और यह ई-स्कूटर की तरह काम करने लगता है. साइकिल की टायर से डायनेमो जोड़ा गया है, जो सोलर लाइट के बिना भी बैटरी चार्ज कर देता है.

साइंटिस्ट बनना चाहते हैं नील

अपने सोलर साइकिल प्रोजेक्ट के बारे में नील कहते हैं कि उनके सारे दोस्त बाइक चलाना सीखते थे, स्कूटर चलाते थे, लेकिन उन्होंने फैसला किया था कि वह किसी कंपनी की नहीं, ​बल्कि खुद की बनाई बाइक चलाएंगे.

उन्हें इस तरह की और भी साइकिल बनाने के ऑर्डर मिलने लगे हैं. 10वीं से बिना ट्यूशन के ही पढ़ाई करने वाले नील बड़े होकर साइंटिस्ट बनना चाहते हैं. वे जगदीश चंद्र बोस और सतेंद्रनाथ बोस को अपना रोल मॉडल मानते हैं.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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