देशों का कर्ज संकट बन सकता है वैश्विक मंदी की वजह: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि दुनिया के कई देशों में बढ़ रहा कर्ज का संकट ग्लोबल लेवल पर मंदी की बड़ी वजह बन सकता है.

कर्ज से जुड़ी असुरक्षा की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अगर इसे नज़रअंदाज करके बिना हल किए छोड़ दिया गया तो यह लाखों लोगों को गरीबी रेखा के नीचे भेज सकता है.

आपको बता दें कि वित्त मंत्री ने गुरुवार 12 जनवरी को ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ नाम से आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

इस कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने सत्र की अध्यक्षता भी की. दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई कार्यक्रम और सत्र आयोजित किए जाएंगे.

विकास के सामाजिक पहलू पर ध्यान देने की जरूरत

सत्र के दौरान सीतारमण ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर कर्ज से जुड़ी असुरक्षा की स्थिति बढ़ रही है और प्रणालीगत ग्लोबल कर्ज संकट का खतरा उत्पन्न कर रही है.

इस स्थिति को उन देशों में साफ देखा जा सकता है जो आज बाहरी कर्ज चुकाने और भोजन व फ्यूल जैसी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बीच में फंसे हुए हैं.

उन्होंने कहा कि कई देश लगातार बढ़ते वित्तीय अंतर का सामना कर रहे हैं. इसके साथ ही विकास के सामाजिक पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है.

क्या है वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ?

वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ एक वर्चुअल सम्मेलन है जिसे भारत की विदेश नीति में एक नए प्रयोग के तौर पर आयोजित किया जा रहा है. इस सम्मेलन में करीब 120 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.

‘ग्लोबल साउथ’ के अंतर्गत एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के विकासशील देश और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ आती है. इस सम्मेलन की थीम ‘एकता की आवाज, एकता का उद्देश्य’ है.

हमारी विकास योजनाएं ग्लोबल साउथ के लिए रोल मॉडल

सम्मेलन में निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत दशकों से ग्रांट, लेटर ऑफ क्रेडिट, ITEC पहल और तकनीकी परामर्श के जरिए अनगिनत क्षेत्रों में विकास के लिए सहयोग बढ़ाने के प्रयासों में आगे रहा है.

हमारी विकास योजनाएं ग्लोबल साउथ के बाकी देशों के लिए रोल मॉडल बन रही हैं. उन्होंने कहा, “हमें ऐसे सिस्टम की संभावना ढूंढने की जरूरत है जिससे मल्टीलेटर डेवलपमेंट बैंकों (MDB) की ओर से दिया जाने वाला समर्थन टिकाऊ और देश की जरूरतों के अनुसार हो.

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