यूपी की बहादुर महिला सिपाही जिसने 300 बच्चों को कराया आजाद, हुईं सम्मानित

फिरोजाबाद की एक महिला सिपाही ने ऐसा कार्य किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गवर्नर आनंदी बेन पटेल और केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने उसको सम्मानित किया. 21 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन शक्ति के तहत फिरोजाबाद की सिपाही को प्रशस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया.

फिरोजाबाद के एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट में कार्य करने वाली 30 वर्षीय महिला सिपाही हैं रिंकी सिंह, जिन्होंने बाल श्रमिकों के उत्थान और उनका बचपन बचाने के लिए अभियान छेड़ रखा है. रिंकी सिंह अपनी टीम के साथ उन बाल श्रमिकों को आजाद कराती हैं जो ढाबों पर, होटलों में, रेस्टोरेंट में, हलवाई की दुकान पर, गैराज में मजदूरी करते हैं.

ऐसे बाल श्रमिकों को रिंकी सिंह और उनकी टीम खोजती है और उनको बाल श्रम से मुक्त कराती हैं. महिला सिपाही रिंकी सिंह ने अपने काम से सभी को प्रभावित किया है. उनकी कोशिशों की वजह से एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग में फिरोजाबाद ने बेहतर काम किया है. बाल भिक्षुओं के रेस्क्यू में भी फ़िरोज़ाबाद ने बढ़िया काम किया है.

30 वर्षीय महिला सिपाही के द्वारा किए गए कार्यों को उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी सराहा है और उनको 21 अगस्त को लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम में सम्मानित भी किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा एक प्रशस्ति पत्र, एक मोबाइल फ़ोन देकर सम्मानित किया गया.

रिंकी सिंह ने आजतक को बताया कि बाल श्रमिकों को भी मुक्त कराकर उन्हें बाल श्रमिक स्कूलों में सरकार द्वारा मुफ्त पढ़ाया जाता है. बाल श्रमिकों के परिवार को भी सरकार द्वारा प्रतिमाह भत्ता भी दिया जाता है, ताकि यह बाल श्रमिक पढ़ते भी रहे और साथ ही इनके परिजन जीवनयापन के लिए धन भी मिले.

रिंकी सिंह ने साल 2020 में चाइल्ड लेबर अभियान के तहत ही 153 बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उन्हें घुटन भरी जिंदगी से निजात दिलाकर नया जीवन दिया है. इतना ही नहीं रिंकी सिंह ने साल 2020 में 90 ऐसे बाल भिक्षुओं को भी मुक्त कराया है, जो किसी न किसी कारण चौराहे गलियों में या मंदिरों के पास भीख मांगते हैं.

साल 2021 में अभी तक रिंकी सिंह ने अपनी टीम के साथ 57 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है. रिंकी सिंह ने बताया कि वह बाल श्रमिकों को जब पकड़ते हैं, तब उनको सीडब्ल्यूसी यानी बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद समिति निर्णय लेती है कि उन बच्चों को कहां भेजना है.

रिंकी सिंह की टीम में दो महिलाएं और पांच पुरुष होते हैं, सभी एक गाड़ी में निकल जाते हैं और होटल, ढाबों, चौराहे, गैरेज में बाल श्रमिकों को खोजते हैं. फिरोजाबाद के एसएसपी अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि जो लोग यह समझते हैं कि पुलिस विभाग में महिलाएं पुरुषों के बराबर कार्य नहीं कर सकती तो वह यह भी जान लें कि अभी हुए ओलंपिक गेम में महिलाओं ने ही सबसे ज्यादा पदक जीते हैं, इसलिए फ़ोर्स में किसी भी तरह से महिलाओं को पुरुषों से कम आंका नहीं जाना चाहिए.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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