पिता का साया सर से उठा, तो ट्यूशन पढ़ाकर खुद की पढाई, पहले ही प्रयास में किया UPSC क्रैक

UPSC एग्जाम में हर साल लाखों कैंडिडेट्स बैठते हैं। लेकिन कामयाबी चुनिंदा को ही मिल पाती है। कई बार असफलता मिलने के बाद कैंडिडेट्स निराश हो जाते हैं। आज हम आपको मनीष कुमार की कहानी बताएंगे। मनीष के परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी को जारी रखा।

मनीष कुमार को UPSC CSE 2020 एग्जाम में 581 रैंक मिली है। बिहार के सहरसा के रहने वाले मनीष कुमार के पिता का निधन हो गया था। उस समय वह बेहद छोटे थे। मां शुरू से ही चाहती थीं कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने। इसलिए उन्होंने मनीष को कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।

मनीष कुमार बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे, लेकिन घर के खराब आर्थिक हालत उन्हें बार-बार परेशान कर रहे थे। दो भाई और एक बहन में मनीष सबसे बड़े हैं।

पिता का हो गया था निधन

मनीष कुमार के पिता मुसाफिर सिंह ही परिवार को सारण से सहरसा लेकर आए थे। यहां वह दवा की एक छोटी दुकान में नौकरी किया करते थे। लेकिन परिवार को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि बच्चों के सिर से पिता का साया इतनी जल्दी उठ जाएगा।

इधन मनीष कुमार ने मैट्रिक पास की और उधर साल 2010 में उनके पिता का निधन हो गया। मनीष ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई को जारी रखा। मनीष ने एक समय पर जाकर अपना खर्च खुद उठाने का फैसला किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था।

इस बीच वह खुद भी पढ़ाई किया करते थे। यूपीएससी के लिए पूरी मेहनत चाहिए होती है और दूसरा वह कोचिंग भी नहीं ले रहे थे। लेकिन जब मनीष ने यूपीएससी एग्जाम में सफलता हासिल कर ली और पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

मनीष कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत और लगन चाहिए होती है, फिर चाहे कितने भी हालात खराब क्यों न हों। मैं बस यही कहना चाहता हूं कि इस परीक्षा के लिए आपको लगाता मेहनत करनी होती है। एक या दो दिन से नहीं हो पाएगा।’

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok mantra से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है.]

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